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विश्व एड्स दिवस ः फैल रहा खूनी पंजा

Jalaun

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। केंद्र और राज्य सरकारों की एचआईवी/एड्स खात्मे की तमाम कोशिशों और योजनाओं के बाद भी यह जानलेवा रोग काबू में नहीं आया। इसका खूनी पंजा लोगों को अपनी गिरफ्त में लेता चला जा रहा है। जिले में एचआईवी संक्रमित लोगों के आंकडे़ चौंकाने वाले हैं। जिले का सर्वाधिक पिछड़ा क्षेत्र रामपुरा में पहला एडस रोगी 2001 में पाया गया था जिसकी मौत हो चुकी है। 2002 में 13 एड्स रोगी थे जिनमें दस पुरुष व तीन महिलाएं थीं। 2007 तक इनकी संख्या बढ़कर 108 तक पहुंच गई। इनमें 75 पुरुष व 33 महिलाएं थी। वक्त के साथ ही लोगों में इस रोग के प्रति जागरूकता आई और लोग स्वेच्छा से जांच करवाने जिला चिकित्सालय व महिला चिकित्सालय में रक्त जांच के लिए आ रहे हैं। नवंबर 2012 तक जिले में अब 250 एड्स रोगी हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में दर्ज आंकडे़ उन मरीजों के हैं जो स्वेच्छा से अपनी जांच करवाने आए हैं। वर्ष 2006 में 240 पुरुष व 79 महिलाओं ने एड्स के बारे में जांच करवाई जिनमें 154 पुरुष व 36 महिलाओं का रक्त परीक्षण किया गया जिनमें दस पुरुष व तीन महिलाएं एचआईवी पाजीटिव पाए गए। इसी प्रकार वर्ष 2007 में 568 पुरुष व 499 महिलाओं ने परामर्श लिया। जिसमें परामर्शदाता की सलाह पर 244 पुरुष व 117 महिलाओं के रक्त के नमूने लिए गए जिसमें 14 पुुरुष व 5 महिलाएं एचआईवी पॉजीटिव पाए गए। 2008 में लोग इस रोग के प्रति सचेत हुए और 1159 पुरुष एवं 1429 महिलाओं ने इस रोग का परामर्श लिया और 430 पुरुष व 343 महिलाओं के रक्त के नमूने लिए जिनमें 10 पुरुष व 4 महिलाएं इस रोग से ग्रस्त पाए गए। वर्ष 2009 में 1358 पुरुष एवं 1554 महिलाओं ने परामर्श लिया और 430 पुरुष व 343 महिलाओं के रक्त के नमूने लिए। जिनमें दस पुरुष एवं चार महिलाएं इस रोग से ग्रस्ति पाए गए। वर्ष 2009 में 1358 पुरुष व 1554 महिलाओं ने परामर्श लिया जिसमें 367 पुरुष एवं 223 महिलाओं का रक्त परीक्षण हुआ जिनमें 19 पुरुष व आठ महिलाएं एड्स से ग्रस्त पाए गए। वर्ष 2010 मेें 344 पुरुष एवं 352 महिलाओं ने परामर्श लिया। जिनमें सात पुरुष एवं 2 महिलाएं एचआईवी पॉजीटिव पाए गए। वर्ष 2011 में 1245 पुरुष एवं 855 महिलाओं ने परामर्श लिया जिनमें 15 पुरुष व 11 महिलाएं एचआईवी से संक्रमित पाए गए। वर्ष 2012 नवम्बर में 2055 पुरुष एवं 1243 महिलाओं ने परामर्श लिया जिनमें 845 पुरुष एवं 354 महिलाओं के रक्त के नमूने लिए गए जिनमें 25 पुरुष व 21 महिलाएं एड्स के ग्रस्ति पाए गए। परमार्थ समाजसेवी संस्था के प्रोजेक्ट अधिकारी पवन चंदेल का कहना है कि अधिकांश रोगी संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल या संक्रमित रक्त या असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण इस रोग का शिकार हो रहे हैं। उनकी टीम प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जागरुक कर रही है।
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रामपुरा का पहला एड्स रोगी
उरई। बीहड़ की वजह से यहां के लोग रोजगार की तलाश में बाहर पलायन करते हैं। इन्हीं लोगों में था रामपुरा का राधेलाल का युवा पुत्र राकेश (दोनों परिवर्तित नाम) जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जनपद के नौगांव में दिहाड़ी मजदूरी करता था। वहीं रहते हुए उसकी एक दिन तबीयत खराब हो गई। वह चिकित्सक के पास गया। राधेलाल को संक्रमित सुई से इंजेक्शन लगा दिया और वह एचआईवी से पीड़ित हो गया। वर्ष 2001 में उसकी मौत हो गई। यह रोगी चिकित्सालय में भी दर्ज रहा है।
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उदासीन रवैया
- विभाग के पास एड्स जागरूकता की ठोस नीति नहीं है
- काउंसलर ही रोगी व संभावितों को देते हैं परामर्श
- परिवार स्वास्थ्य शिविर मेें जांच से खानापूर्ति
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सावधानी
- रक्त जांच के बाद ही शरीर मेें चढ़ाया जाए
- मरीज डिस्पोजल सुई का ही इस्तेमाल करें
- बाहर रहने वाले असुरक्षित यौन संबंधों से बचे
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बुंदेलखंड में 800 से ज्यादा है एड्स रोगी
उरई। परमार्थ समाजसेवी संस्था एवं लक्षित हस्तक्षेप परियोजना से मिले आंकड़ों के मुताबिक बांदा, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर आदि में 800 से अधिक एड्स रोगी हैं। प्रोजेक्ट अधिकारी पवन चंदेल ने बताया कि वह जोखिम ग्रुप बनाकर काम कर रहे हैं। वह लोगों को असुरक्षित यौन संबंध संक्रमित सुइयों के प्रयोग व नशा से बचाव एवं व्यवहार में बदलाव की कोशिश में जुटे हैं। बकौल पवन अभी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को और जागरूक करने की जरूरत है।
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डाक्टर ने दे दिया एड्स
उरई (जालौन)। डाक्टर ने पत्नी को संक्रमित रक्त चढ़ा एचआईवी बना दिया। उससे पति भी चपेट में आया गया। कोंच क्षेत्र के एड्स पीड़ित ने अमर उजाला से अपने अनुभव बांटे। उसने बताया कि उसकी पत्नी की तबीयत खराब थी। उसे वह इलाज के लिए झांसी ले गया। जहां रक्त अल्पता के चलते चिकित्सकों ने उसे रक्त चढ़ाया जो संक्रमित था। बस यहीं से उसकी हंसती खेलती जिंदगी उजड़ गई और पत्नी की एड्स से मौत हो गई। पत्नी से उसे भी यह रोग हो गया। मौत का खौफ उसे हमेशा सताने लगा। वह बीमारी से कम चिंता से ज्यादा बीमार रहने लगा। उसने अपनी दिनचर्या बदल ली। आज वह स्वस्थ है। दवाई भी नियमित ले रहा है। वह अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर रहा है। उनका चेकअप कराया तो वह स्वस्थ है। उसने बताया कि पत्नी की मौत के बाद कई रिश्ते आए लेकिन उसने साफ मना कर दिया।
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धैर्य और संयम जरूरी
एड्स पीड़ित व्यक्ति को धैर्य और संयम बहुत जरूरी है। इसमें रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। सावधानी और जागरूकता ही बीमारी से बचाव का रास्ता है। फिर भी अगर कोई व्यक्ति इस रोग की चपेट में आ जाता है तो उसे घबराना नहीं चाहिए। उसे हिम्मत व हौसला के साथ इस रोग से लड़ना चाहिए। इसके लिए मार्निंग वाक, योग का सहारा लेकर लंबी आयु पाई जा सकती है। साथ ही दवाओं का भी नियमित सेवन करें - डॉ. खेमचंद्र, सीएमएस
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