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रंगकर्मी लोककलाओं को अभिनय से उभारें-जुगुल किशोर

Jalaun

Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
एके हंगल नगर (जालौन)। श्रम से ही कला का सृजन होता है। यही वजह है गांवों में आज भी
मेेहनतकश तबके के सहारे ढिमरिया और राछुला दुर्लभ राग अपना अस्तित्व और देशज पहचान बचाए हुए हैं। रंगकर्मी यदि लोककलाओं को अपने सशक्त अभिनय से प्रभावी ढंग से उभारें तो मेहनतकश तबका इप्टा से जुड़ कर रंगकर्म आंदोलन को नई ऊंचाइयां दे सकता है।
इप्टा के दो दिवसीय 16 वें प्रांतीय सम्मेलन के अंतिम दिन यहां आयोजित संगोष्ठी के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार जुगल किशोर ने यह बात कही। उन्होंने कहा देशज लोककला और संस्कृतिके प्रति अभी भी लोगों का काफी आकर्षण है। जरूरत गांवों की सोंधी माटी से जुड़ी लोककलाओं के प्रदर्शन के लिए सशक्त मंच देने की है। रंगकर्म से जुड़े लोगों के सामने भौतिकता के बढ़ते प्रभाव से विलुप्त हो रही लोक संस्कृति को बचा कर उसके संरक्षण की कड़ी चुनौती भी है। उन्होंने कहा इप्टाकर्मी अपने रंगकर्म में लोक विधाओं को शामिल कर समाज के वंचित और उपेक्षित मेनहतकश तबके से सीधे जुड़ सकते हैं।प्रगतिशील लेखक हरमिंदर पांडे का सुझाव था हमें रंगकर्म साहित्य का प्रचार-प्रसार करने के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया का सहारा लेना चाहिए। लेखक राकेश कुमार ने कहा हमने साहित्य, रंगकर्म के जरिये सांप्रदायिकता की समस्या पर काफी हद तक काबू किया लेकिन बाजारवाद और उपभोक्तावाद के रूुप में आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है। रंगकर्मी बैजनाथ यादव, मुमताज हामिद ने कहा जद्दोजहद के बाद आए समाजवाद ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
साहित्य में पुरस्कार राशि एक लाख से बढ़ कर 11 लाख हो गई है। इससे तो यही लगता है जैसे साहित्यकारों को खरीद कर साहित्य समाज पर थोपा जा रहा है। इसके विरुद्ध आंदोलन जरूरी है। संगोष्ठी में लेखक विनीत तिवारी एनजीओ की के बदलते चेहरे को रेखांकित किया। एनजीओ समाजवाद लाने के बजाय पैसा बनाने और शोषण का जरिया बन रहे हैं। आंध्र प्रदेश की राह पर चल कर शोषित वर्ग को इप्टा से जोड़कर आंदोलन किया जा सकता है। लेखन और रंगकर्म के जरिये अन्य क्षेत्रों में व्याप्त समस्याओं को उजागर किया जा सकता है।
संगोष्ठी में जयप्रकाश, संतोष भदौरिया, आनंद शुक्ला, संजय श्रीवास्तव, हरिओम, चौथीराम, जयमेहता, कैलाश पाठक, भाकपा के राज्य सचिव गिरीश चंद्र, सुधीर अवस्थी, रेहान सिद्दीकीऔर राजपप्पन आदि रंगकर्मी मौजूद रहे।


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