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शासन ने बांट दी बीमार बकरियां

Jalaun

Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
कुठौंद (जालौन)। बुंदेलखंड पैकेज के जरिए गांव के गरीबों की आर्थिक दशा सुधारने को पशुपालन विभाग ने बीपीएल परिवारों को ऐसी बकरियों का वितरण कर दिया जो बीमार थी। जो उन गरीबों के घर पहुंचते ही मर गई। यह मामला कोई नया नहीं है इसके पहले भी बीमार बकरियों के वितरण का मामला सुर्खियों में रह चुका है।
जिलाधिकारी जालौन को भेजे गए शिकायती पत्र में विकासखंड क्षेत्र के ग्राम आल निवासी भानुप्रताप पुत्र आशाराम ने आरोप लगाया कि पशु पालन विभाग द्वारा बुंदेलखंड पैकेज से मिली धनराशि के अंतर्गत गांव के दस बीपीएल परिवारों को 10 बकरियां और एक बकरा दिया गया। उनकी उम्र चार से छह माह के बीच है और वह बीमार हैं। जिन्हें (कटुवा) कहा जाता है। एक जाति विशेष वर्ग जो इनका व्यापार करता है उनसे खरीदकर वितरित कर दी गई। जब लाभार्थी उन्हें घर लेकर पहुंचे तो उनकी मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। प्रति लाभार्थी को (पैंतीस हजार) रुपए की बकरियों की आपूर्ति की जानी थी जो मात्र चार से छह हजार रुपए में पूरी कर मिली। धनराशि का बंदरबाट किए जाने का आरोप शिकायत कर्ता ने लगाया है।
शिकायत कर्ता का दावा है कि गांव के जिन लाभार्थियों को बकरियों का वितरण किया गया। उनमें कई लोगों की बकरियां मृत हो गई है। इस योजना के अंतर्गत मुन्नालाल पुत्र हरमुख की एक बकरी की मौत हो गई है जो चार बकरियां बीमारी ग्रस्त हैं। आशाराम पुत्र रामलाल की दो मृत तथा दो बीमारी से ग्रस्त बुद्धूलाल पुत्र अजुद्दीन की एक मृत दो बीमारी से ग्रस्त, मुन्नी देवी पत्नी रामऔतार की दो बकरियां बीमारी से ग्रस्त होकर जीवन मौत से संघर्ष कर रही हैं।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस आपूर्ति में जान बूझकर बीमार बकरियां वितरित की गई हैं। ग्राम आल के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि उक्त प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा गरीब लोगों के हकों पर दुषारापात बरपाने पर अधिकारी तथा बराबर की भूमिका का निर्वहन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह सोचनीय बिंदु है कि आखिर बकरियों के मरने का सिलसिला क्यों जारी है। क्या शासन ने बीमार बकरियों को वितरित करने के लिए ही पैसा दिया है।
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