आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

बंद हो गई हथकरघा की खटर-पटर

Jalaun

Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
मुहम्मदाबाद (जालौन)। सूत का एक एक धागा बुनकर जीवन के संचालन का ताना बाना बुनने वाले बुनकरों के हाथ से मशीनी युग ने दस्तकारी का काम छीन लिया। दो दशक पहले गांव में खटर-खटर करके चलने वाली हथकरघा की आवाज नहीं सुनाई दे रही है। रोजगार के लिए बुनकर पलायन करने को मजबूर हैं।
सन् 1985 में इंदिरा आवास योजना के तहत सरकार ने मुहम्मदाबाद गांव में बीस परिवारों को बुनाई केंद्र कालोनी बनाकर दी थी। उसमें सूत से बुनाई करके कपड़ा, रजाई का पल्ला, तौलिया, पल्ली, टैरीकाट कपड़ा, बिछाई आदि बुनने का काम शुरू हुआ था। विभागीय प्रोत्साहन न मिलने से बुनकरों का काम बंद हो चुका है। मशीनें जंग खाकर बेकार हो चुकी हैं। कालोनी में भूसा, कंडा (उपला) लकड़ी आदि भरे हैं और बुनकरों के परिवार आज अपनी बेबसी के चलते मजदूरी करने को मोहताज हैं।
गांव के बुनकर चिंतामणि, अजुद्दीप्रसाद वर्मा, बाबूलाल वर्मा, जगोले, बद्री वर्मा, शिवनारायण, शिवचरन वर्मा आदि ने बताया कि सरकार द्वारा हम लोगों को 10 हजार रुपए में ये कालोनी बनाकर दी गई थी। यह कर्ज हम लोग अदा कर चुके हैं। कच्चा सूत न मिलने के कारण हमारा काम बंद हो गया है। वहीं बुनकर कमलापत वर्मा, लक्ष्मीनारायण, बाल किशुन, रतीराम, दयाराम, दीने वर्मा, देवीदीन, दानशाह, राजेंद्र, शिव सिंह, भगवान वर्मा, बाबू वर्मा आदि ने बताया कि जब से मिल में बने आइटम सस्ते होने से हम लोगों की रोजी रोटी छीन ली। पहले हम लोगों को सरकार कच्चा माल देती थी, तैयार माल की हम लोगों को मजदूरी मिलती थी, लेकिन वह भी बंद हो गई। इसके बाद हम लोग कानपुर से कच्चा सूत लाकर माल तैयार करने लगे लेकिन हमारे बुने हुए कपड़ों का उचित मूल्य न मिल पाने के कारण हम लोगों को यह काम बंद करके आज मजदूरी करने को विवश होना पड़ा।

इनसेट
कच्चा माल मिले तो बने बात
अगर सरकार हम लोगों को कच्चा माल उपलब्ध कराए और तैयार माल खरीदने की व्यवस्था कर दे तो हम लोगों कोे फिर से रोजी रोटी मिल सकती है। सरकारी कालोनी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कुछ समय और बंद पड़ी रही इन कालोनियों का नामों निशान मिट जाएगा।

वर्जन
उद्योग पटरी पर लाने की कोशिश
उधर, जिले के 116 बुनकरों को राज्य सरकार योजना के तहत बैंक की मदद से कार्ड बनाए गए हैं। जिनमें छह बुनकरों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए और सौ बुनकरों को एक-एक लाख रुपए का कर्ज सस्ते दर पर मिलेगा। जिससे हथकरघा उद्योग को दोबारा पटरी में लेना की कोशिश की जाएगी। - सराफत खां, हथकरघा विभाग के औद्योगिक पर्यवेक्षक
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

चंद्रनंदनी के सेट पर श्वेता के साथ हुआ भयानक हादसा, सिर पर लगी गंभीर चोट

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

मां बनने का दर्द नहीं झेलना चाहतीं अमीर औरतें, करवा रही हैं सिजेरियन

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

केले से निखारें रंगत, बाल भी हो जाएंगे सिल्की-सिल्की

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

अब फेसबुक मैसेंजर में खेलें पुराना सांप वाला गेम

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

... तो इस वजह से गणित के सवाल हल करते हुए होने लगती है घबराहट

  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

Most Read

सपा मंत्री के काफिले पर हमला, 9 भाजपाई गिरफ्तार

attack on  sp minister awadesh prasad
  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

बागी मंत्री को अख‌िलेश ने क‌िया कैब‌िनेट से बाहर

vijay mishra expelled from akhilesh cabinet
  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

पीएम मोदी के बयान से हिला पाकिस्तान, सर्जिकल स्ट्राइक-2 की तैयारी तो नहीं!

prime minister statement shock pakistan
  • सोमवार, 27 फरवरी 2017
  • +

ड‌िम्पल ने मोदी को बताया झूठ का प‌िटारा, कसाब को द‌‌िया नया फुलफॉर्म

dimple yadav rally in gonda
  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

झारखंड: महिला कर्मचारियों को मिलेगी दो विशेष छुट्टी

Jharkhand:women will get 2 special leave under sarva shiksha abhiyan
  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top