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सुविधाओं से नहीं, पढ़ाई से बढ़ेगी छात्र संख्या

Jalaun

Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
मुहम्मदाबाद (जालौन)। सरकारी प्राइमरी व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किताबें, ड्रेस, बस्ता, छात्रवृति, मिड डे मील, खेलने का सामान सहित तमाम सुविधाएं सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही हैं, फिर भी प्राइवेट कान्वेंट स्कूलों की तुलना में छात्रों की संख्या आधी से भी कम रहती है। इस बाबत अमर उजाला ने छानबीन करके अभिभावकों से बात की तो कई कारण सामने आए। अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होना, छात्रों की संख्या के हिसाब से शिक्षिकों की नियुक्ति न होना, शिक्षकों को अन्य सरकारी कामों में लगाए रखना, विद्यालयों में जेनरेटर, चौैकीदार, चपरासी, शौचालय, पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था न होने जैसे कई कारण है कि लोगों का सरकारी विद्यालयों से मोह भंग हो रहा है।
ग्राम मुम्मदाबाद के 70 वर्षीय बुजुर्ग साबिर हुसैन ने कहा कि हमने भी सरकारी प्राइमरी स्कूल में शिक्षा ग्रहण की है। उस समय विद्यालय भवन भी नहीं थे। हैडमास्टर, पंडित जी गांव के बाहर बगीचों में पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाते थे। अध्यापक अपने पुत्रों की तरह पूरे अधिकार के साथ पढ़ाते थे। लेकिन अब इन्हीं कारणों की वजह से लोग सरकारी स्कूलों से दूर होते जा रहे हैं।
ग्राम कुसमिलिया के गयाप्रसाद ने कहा कि सरकारी विद्यालयों की अपेक्षा प्राइवेट विद्यालयों में अच्छी शिक्षा मिल रही है। इसलिए सरकारों द्वारा दी जा रही सारी सुख सुविधाओं का लोभ छोड़कर अभिभावक प्राइवेट विद्यालयों को तबज्जो दे रहे हैं।
ग्राम ऐरी के 50 वर्षीय जियालाल का कहना है कि प्राइवेट विद्यालयों में कंप्यूटर, वाहन सुविधा, जेनरेटर, एसी, आधुनिक फर्नीचर, सुंदर विद्यालय भवन आदि की सुविधाओं के चलते अभिभावकों का रुझान प्राइवेट विद्यालयों की ओर बढ़ रहा है। इससे सरकारी विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या में निरंतर कमी आती जा रही है।
अभिभावक कृष्ण स्वरूप त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में जिस तरह से शिक्षकों को वेतन मिल रहा है उसी तरह से उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। प्रत्येक शिक्षक को कम से कम 20 बच्चों का एडमीशन विद्यालय में कराना चाहिए।
अभिभावक इंद्रपाल राजपूत ने कहा कि टीचरों को बच्चों की पढ़ाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। इससे विद्यालयों में शिक्षा के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा और छात्र संख्या बढ़ेगी।
अभिभावक राजेश, साबिर खां, विनोद अतरौलिया, गया राजपूत, पवन शर्मा, सुनीता देवी, रुब्बावानो आदि ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की।
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