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पहले एडमिशन की थी मारामारी, अब पसरा ‘सन्नाटा’

Hathras

Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
हाथरस। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय टुकसान में एक माह पहले हुई बालिका की मौत के बाद जिले के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों से अभिभावकों का भरोसा उठ रहा है। हालात यह हैं कि अब अभिभावक एक-एक कर अपनी बच्चियों को घर ले जाने लगे हैं। यही नहीं, इसके बाद ये बालिकाएं लौटकर विद्यालय नहीं आ रही हैं, जिससे छात्राओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है। पहले जिले में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के संचालन का जिम्मा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के पास था। इस दौरान यहां कि छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का खूब लोहा मनवाया था। कुछ समय पहले अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर निर्माता कंपनी इंटेल ने प्रदेश भर के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं की कंप्यूटर ज्ञान परीक्षा कराई थी। इसमें जिले की छह में से पांच विद्यालयों की बच्चियों की मानसिक योग्यता ग्रुप कंप्यूटर ऑपरेट करने लायक थी। इसके बाद कंपनी ने हाथरस में अपने पैसे से पर्सनल कंप्यूटर लगवाई थीं। कंपनी के आधा दर्जन इंजीनियरों ने हाथरस में रुककर ग्रुप डिस्कसन के लिए शिक्षिकाओं एवं बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया था। वहीं, सहपऊ कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय एनजीओ द्वारा संचालित था। इस विद्यालय की बच्चियों प्रतियोगिता में पिछड़ गई थी। बालिकाओं की इस योग्यता को देखते हुए अभिभावकों ने अपनी-अपनी बेटियों के एडमिशन के लिए जुगाड़ भी लगाने लगे थे। इतना ही नहीं, एडमिशन की वेटिंग लिस्ट भी तैयार की जाती थी। मगर दो साल में जब से इन विद्यालयों का संचालन बेसिक शिक्षा विभाग के हाथों में पहुंचा है। इन विद्यालयों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। विगत दिनों कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टुकसान में लापरवाही से बालिका की मौत के बाद तो अब इन विद्यालयों से अभिभावक अपनी बच्चियों को अपने घर ले जा रहे हैं। जो स्कूल खुलने के बाद भी अपनी बेटियों को वापस विद्यालय छोड़ने नहीं आ रहे हैं।
इस संबंध में डीसी बालिका शिक्षा केपी सिंह सिरोही ने कहा कि एक माह से बार-बार छुट्टियां भी हो रही हैं। हालांकि टुकसान कस्तूरबा में बालिका की मौत के बाद भी विद्यालयों की साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इससे विद्यालयों में छात्राओं की संख्या कम हो रही है। संख्या पूरी करने के लिए दीपावली के बाद फिर से अभिभावकों को समझाया जाएगा, ताकि उनका भरोसा कायम हो सके।
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