आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

गम-ए-जिंदगी नाराज न हो, मुझे आदत है मुस्कुराने की

Hathras

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
हाथरस। आपने कभी ऐसे किसी शख्स से बारे में सुना है, जो अपनी वसीयत में यह लिखकर जाए कि उसकी मौत पर सब जमकर हंसे, कोई रोए नहीं। जी हां ऐसे ही थे हमारे काका हाथरसी। वह इस दुनिया में आए ही लोगों को हंसाने के लिए थे। उनकी वसीयत के मुताबिक हुआ भी यही। आज से 17 साल पहले एक तरफ काका का शरीर पंचतत्व में विलीन हो रहा था और दूसरी तरफ शमशान में हास्य कवि सम्मेलन हो रहा था। आधी रात को सब लोग ठहाके मार-मार कर हंस रहे थे। उनकी शवयात्रा भी उनकी इच्छा के मुताबिक ऊंट गाड़ी पर गई। वास्तव में काका ने हिंदी साहित्य में हास्य को एक अहम स्थान दिलाया। बात यदि काका के जीवन की करें तो 18 सितंबर 1906 में काका का जन्म शहर में जैन गली में एक अग्रवाल परिवार में हुआ। काका का बचपन काफी गरीबी में बीता। पिता की जल्दी मौत हो गई और वह अपने मामा के पास इगलास में जाकर रहने लगे। काका ने बचपन में चाट-पकौड़ी तक बेची। हालांकि कविता का शौक उन्हें बचपन से भी शुरू हो गया। उन्होंने अपने मामा के पड़ोस में रहने वाले एक वकील साहब पर कविता लिखी।
एक पुलिंदा बांधकर कर दी उस पर सील
खोला तो निकले वहां लखमी चंद वकील
लखमी चंद वकील, वजन में इतने भारी
शक्ल देखकर पंचर हो जाती है लारी
होकर के मजबूर, ऊंट गाड़ी में जाएं
पहिए चूं-चूं करें, ऊंट को मिरगी आए
किसी प्रकार यह कविता वकील साहब के हाथ पड़ गई और काका को पुरस्कार में पिटाई मिली। काका का असली नाम तो प्रभूलाल गर्ग था, लेकिन उन्हें बचपन में नाटक आदि में भी काम करने का शौक था। एक नाटक में उन्होंने एक काका का किरदार किया और बस तभी से प्रभूलाल गर्ग काका हो गए। 14 साल की आयु में काका फिर अपने परिवार सहित हाथरस आ गए। उन्होंने एक जगह मुनीम की नौकरी की। इसी बीच महज 16 साल की अवस्था में काका की शादी रतन देवी से हो गई। काका की कविताओं में यही रतन देवी हमेशा काकी बनी रही। कुछ दिनों बाद फिर काका की नौकरी छूट गई। काका ने फिर काफी दिन मुफिलिसी में गुजारे।
काका संगीत प्रेमी भी थे और उन्हें चित्रकारी का भी शौक था। उन्होंने कुछ दिनों चित्रशाला भी चलाई, लेकिन वह भी नहीं चली तो उसके बाद अपने एक मित्र के सहयोग से संगीत कार्यालय की नींव रखी। इसी कार्यालय से संगीत पर संगीत पत्रिका प्रकाशित हुई। उसका प्रकाशन आज भी अनवरत जारी है। काका की पहली यह कविता इलाहाबाद से छपने वाली पत्रिका गुलदस्ता में छपी।
घुटा करती हैं मेरी हसरतें दिन रात सीने में
मेरा दिल घुटते-घुटते सख्त होकर सिल न बन जाए।
उसके बाद काका की कविताओं का लगातार प्रकाशन होता रहा।
काका का मंचीय कवियों में एक विशिष्ट स्थान था। सैकड़ों कवि सम्मेलनों में काका ने काव्य पाठ किया और अपनी छाप छोड़ दी। काक ा को 1957 में लाल किला दिल्ली पर होने वाले कवि सम्मेलन का बुलावा आया तो उन्होंने अपनी शैली में काव्यपाठ किया और अपनी पहचान छोड़ दी। काका को कई पुरस्कार भी मिले। 1966 में बृजकला केंद्र के कार्यक्रम में काका को सम्मानित किया गया। काका हाथरसी को कला रत्न ने नवाजा गया। 1985 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति जैल सिंह ने पद्मश्री की उपाधि से नवाजा। काका कई बार विदेश में काव्य पाठ करने गए। 1989 में काका को अमेरिका के वाल्टीमौर में आनरेरी सिटीजन के सम्मान से सम्मानित किया गया। दर्जनों सम्मान और उपाधियां काका को मिली। यही नहीं काका ने फिल्म जमुना किनारे में अभिनय भी किया।
काका हास्य को टानिक बताते थे। उनका कहना था कि
डाक्टर-वैद्य बतला रहे कुदरत का कानून
जितना हंसता आदमी, उतना बढ़ता खून
उतना बढ़ता खून, की जो हास्य में कंजूसी
सुंदर से चेहरे पर देखो छायी मनहूसी।
यही नहीं काका ने जीवन पर लोगों को हंसाने का काम किया। वह कहते थे कि गम-ए-जिंदगी नाराज न हो, मुझे आदत है मुस्कुराने की। जिन दिन काका इस दुनिया में आए, उसी दिन 18 सितंबर 1995 को उनका देहावसान हुआ।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

सालों बाद मिला आमिर का ये को-स्टार, फिल्में छोड़ इस बड़ी कंपनी में बन गया मैनेजर

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

इस मानसून इन हीरोइनों से सीखें कैसा हो आपका 'ड्रेसिंग सेंस'

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

जब शूट के दौरान श्रीदेवी ने रजनीकांत के साथ कर दी थी ये हरकत

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

50 वर्षों बाद बना है इतना बड़ा संयोग, आज खरीदी गई हर चीज देगी फायदा

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

हिट फिल्म के बावजूद फ्लॉप हो गई थी ये हीरोइन, अब इस फील्ड में कमा रही है नाम

  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

Most Read

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

J&K: आर्मी के जवानों ने थाने में घुसकर पुलिस को पीटा, अब्दुल्ला बोले- कार्रवाई हो

soldier beat policemen in jammu six injured
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

अलगाववादियों को भारत सरकार से भी मिल चुके हैं पैसे: फारूक अब्दुल्ला

GOI too gave funds to separatists says farook abdullah
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

5 साल की बेटी को नहला रही थी मां, दोनों को मिली खौफनाक मौत

5 year old and mother died after electrocuting
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

आम्रपाली पर शिकंजा, सीईओ और डायरेक्टर गिरफ्तार

Big Action on Amrapali Builder, Head office seal
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

DSP अयूब पंडित हत्याकांडः 20 आरोपी गिरफ्तार, एक का हुआ एनकाउंटर

Deputy SP Ayub Pandit lynching case ig muneer khan says 20 arrested and one killed in encounter
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!