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आतंकियों की पनाहगाह तो नहीं बन रहा हाथरस?

Hathras

Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
हाथरस। एक तरफ श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा, दूसरी तरफ ताज नगरी आगरा, तीसरी तरफ संवेदनशील अलीगढ़ और इनके बीच में हाथरस शहर। क्या आतंकी हाथरस शहर को अपनी पनाहगाह तो नहीं बना रहे हैं। क्योंकि मथुरा, अलीगढ़ और आगरा में तो खुफिया तंत्र बेहद सक्रिय रहता है, लेकिन हाथरस जैसे छोटे शहर पर खुफिया एजेंसियां भी ज्यादा ध्यान नहीं देतीं। शायद इसी वजह से आतंकी इस शांत शहर में साजिश रच रहे हों। हाल ही में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी फसीह मोहम्मद के नाम से एआरटीओ कार्यालय से बने डीएल ने इस प्रश्न को और हवा दे दी है। यहीं नहीं पहले भी इस शहर में नकली करेंसी के कई मामले पकड़े जा चुके हैं। वैसे अभी तक अधिकारी इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे कि जिस व्यक्ति का लाइसेंस बना वह आतंकी है। स्थानीय एआरटीओ कार्यालय से कई दिनों पहले यह बात पकड़ में आई कि फसीह मोहम्मद पुत्र फिरोज निवासी लाला का नगला के नाम से जो लर्निंग डीएल बनाया गया है, वह फर्जी है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि इस लाइसेंस को बनवाने में दस्तावेज फर्जी लगाए गए थे। मामले की जांच-पड़ताल के बाद एआरटीओ कार्यालय के एक लिपिक को निलंबित कर दिया गया और आरआई के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई। विभागीय कार्रवाई तो पूरी हो गई लेकिन सवाल अब और भी उठने लगे हैं। यदि यह लाइसेंस किसी और नाम से होता तो मामला महज धोखाधड़ी का होता, लेकिन यह लाइसेंस फसीह मोहम्मद नाम के जिस व्यक्ति के लिए बना है वह एक एक आतंकी है। वह इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा है। इतना ही नहीं उसे कुछ माह पहले सऊदी अरब पुलिस ने पकड़ा था। उस पर बंगलूरू और दिल्ली में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। अब आखिर यहां से फसीह मोहम्मद के नाम से डीएल क्यों बनवाया गया, यह बात समझ से परे है। इस लाइसेंस के इस्तेमाल के लिए हाथरस को चुना गया, इस बात पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। फसीह मोहम्मद के नाम से जब इस शहर का नाम जुड़ गया तो यह भी अंदेशा होने लगा है कि आतंकी इस शहर में भी या तो शरण पाते हैं या फिर इस शहर में उनके गलत काम आसानी से हो जाते हैं। खेदजनक पहलू तो यह है कि खुफिया तंत्र अभी भी इस मामले को हल्के में ही ले रहा है। एआरटीओ कार्यालय में हुए फर्जीवाड़े की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई गई है। वैसे फसीह मोहम्मद के साथ हाथरस का नाम जुड़ने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
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