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बिजली कटौती से निजात को चाहिए हाईवोल्टेज झटका

Hathras

Updated Tue, 04 Sep 2012 12:00 PM IST
हाथरस। बेशक हाथरस बिजली के मामले में कुछ समय पहले तक तक वीवीआईपी रह चुका है, लेकिन यहां के बिजली सिस्टम में सुधार के लिए हाई वोल्टेज झटका यानी बड़ा बदलाव चाहिए। शहर और ग्रामीण इलाकों में अब भी जर्जर खंभे, बिजली के तार, घटिया ट्रांसफार्मर और पुराने उपकरण न केवल बेहतर बिजली सप्लाई में रोड़ा हैं, बल्कि आए-दिन दुर्घटनाओं का भी सबब बन जाते हैं। सच कहें तो जिले में बेलगाम बिजली चोरी के लिए जर्जर बिजली सिस्टम भी पूरी तरह जिम्मेदार है। अगर हाईटेक सुविधाओं से बिजली सिस्टम का कायाकल्प हो जाए तो न केवल पब्लिक को फाल्ट और ब्रेक डाउन से होने वाली कटौती से छुटकारा मिलेगा, बल्कि बिजली चोरी को काबू करने में भी काफी मदद मिलेगी। हालांकि इस सच्चाई से बिजली अफसर भी इंकार नहीं करते, लेकिन जिले से सिस्टम सुधार के लिए बनकर गईं योजनाएं सरकारी लेटलतीफी में जकड़कर रह गई हैं। अगर यह योजनाएं मंजूर हो गईं और इन पर ईमानदारी से काम किया गया तो बिजली के मामले में इस जिले की बात ही कुछ और होगी।
क्या हैं हालात
47 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर, पर शंका कायम
दो साल पहले हाथरस, सादाबाद और सिकंदराराऊ के नगरीय क्षेत्रों में बिजली सिस्टम को सेफ और हाईटेक बनाने के लिए रिवाइज अरबन पावर डवलपमेंट एंड रिफार्म प्रोजेक्ट से करीब 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर प्रदेश सरकार के माध्यम से भारत सरकार को भेजा गया था, लेकिन अब आकर इस प्रोजेक्ट को केंद्र की हरी झंडी मिली है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए बिजली अधिकारी कतई आश्वस्त नहीं हैं कि इस प्रोजेक्ट में मंजूर हुआ पैसा और सामान उन्हें आसानी से मिल पाएगा। पिछली दफा मंजूर हुए आरएडीआरपी प्रोजेक्ट का पूरा सामान आज तक महकमे को नहीं मिल सका। अगर उसी वक्त प्रस्ताव के हिसाब से सामान मिल जाता तो कम से कम हाथरस शहर का बिजली सिस्टम तो दुरुस्त हो ही चुका होता।
यह काम होने हैं आरएडीआरपी प्रोजेक्ट से
आरएआरपी प्रोजेक्ट में जिले में बिजली लाइनों पर पुराने डाग व रैक्यून कंडक्टरों की जगह एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) लगने हैं। एबीसी रबर के खोल में लिपटा खास तरह का कंडक्टर, जिस पर न तो कटिया डाली जा सकती है और न ही कट लगाया जा सकता है। जरूरत के हिसाब से नए ट्रंासफार्मर लगने हैं। पुराने ट्रंासफार्मरों की क्षमतावृद्धि होनी है। नए 33 केवी और 11 केवी सब स्टेशन स्थापित होने हैं। ट्रंासफार्मरों पर मीटर लगाए जाने हैं। हर गली-मुह्ल्ले में टेलीकाम की तर्ज पर पिलर बाक्स लगाकर उनमें उपभोक्ताओं के मीटर एक ही जगह लगाए जाने हैं।
हसायन और सहपऊ में कब बनेंगे 132 केवी बिजलीघर
जिले में 132 केवीए के तीन नए पारेषण केंद्र तत्कालीन ऊर्जा मंत्री के कार्यकाल में मंजूर हुए थे, जिनमें से एक पारेषण केंद्र पूर्व ऊर्जा मंत्री के पैतृक गांव बामौली में बन चुका है, जबकि एक सहपऊ और एक हसायन में बनना था मगर यह दोनों ही प्रोजेक्ट जमीन न मिलने से लटके हैं। अगर यह दोनों पारेषण केंद्र बन जाते तो सिकंदराराऊ व सादाबाद के पारेषण केंद्रों का लोड हल्का होता और इन क्षेत्रों की बिजली स्थिति और बेहतर होती।
33 केवी के 15 बिजलीघरों के प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में
सत्ता परिवर्तन से पहले जिले के लिए 33 केवी के करीब 15 नए बिजलीघरों की मंजूरी मिली थी, जिनमें से 4 सब स्टेशन तो पुरानी सरकार में ही पूरे हो गए, जबकि बाकी लटक गए। इनमें से कुछ पर तो आधा काम हो चुका है, जबकि कुछ पर जमीन उपलब्ध होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पा रहा है। नई सरकार ने इन प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, जबकि जिन क्षेत्रों में यह बिजलीघर प्रस्तावित हैं, वहां ओवरलोडिंग और बिजली में व्यवधान को देखते हुए इनकी सख्त जरूरत है।
100 गांवों के विद्युतीकरण का काम अटका
सत्ता परिवर्तन के बाद जिले में सिकंदराराऊ, हसायन, सासनी क्षेत्र के करीब 100 गांवों में विद्युतीकरण का काम भी अधर में लटक गया है। कुछ गांवों में काम अधूरा है तो कुछ में शुरू ही नहीं हो पाया। हालांकि अधिकारियों ने इनके लिए सामान की डिमांड भी भेज रखी है मगर उनकी डिमांड को ऊपर से कोई तवज्जो नहीं मिल रही।

450 मजरों के विद्युतीकरण की योजना अधर में
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में 450 मजरों के विद्युतीकरण का प्रस्ताव भी एक साल से शासन में लंबित है। यह सभी ऐसे गांव हैं, जहां आजादी से लेकर अब तक बिजली नहीं पहुंची हैं। बिना बिजली के इन गांव वालों की जिंदगी में भी अंधेरा ही है।
क्या कहते हैं लोग
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शहर में हालांकि बिजली के लिए बहुत काम हुए हैं, फिर भी जो काम बाकी रह गए हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर पूरा कराया जाना चाहिए। अगर बिजली सुविधाएं बेहतर होंगी तो यहां उद्योगों की बसावट भी बढे़ंगी।
अभय अग्रवाल, उद्यमी
बिजली सिस्टम हाईटेक होने का फायदा बिजली विभाग और आम उपभोक्ता दोनों को है। इससे बिजली चोरी रुकेगी तो फाल्ट और ब्रेक डाउन भी कम होंगे। इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
कपिल अग्रवाल, व्यापारी
शहर और क्षेत्र में अब भी कई लाइनें जर्जर हालत में हैं। पोलों की स्थिति खराब है। उपभोक्ताओं के मीटरों में गड़बड़ियां हैं। स्थिति सुधारने के लिए यहां अभी बहुत काम होने बाकी हैं। इन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में रोकना नहीं चाहिए।
योगा पंडित, व्यापारी नेता
बिजली किसी भी शहर के विकास का मुख्य आधार है। बिजली महकमा जितना ध्यान राजस्व बटोरने पर देता है, उतना ही उसे सिस्टम सुधारने पर भी देना चाहिए। इन कामों में अनावश्यक लेटलतीफी नहीं होनी चाहिए।
राधेश्याम अग्रवाल, उद्यमी
अधिकारियों की राय
आरएडीआरपी का प्रस्ताव मंजूर होने से शहर में विद्युत सुधार के कामों में तेजी आएगी। नगरीय क्षेत्रों में जल्द ही जर्जर लाइनें बदलने, ट्रंासफार्मर बदलने और अन्य काम भी शुरू होंगे। ग्रामीण विद्युतीकरण का प्रस्ताव भी मुख्यालय में विचाराधीन है।
एससी गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, हाथरस
क्या चाहिए--
-जर्जर लाइनों को बदलकर हैवी तार लगाए जाएं
-जरूरत के हिसाब से ट्रंासफार्मरों की क्षमतावृद्धि हो
-33 केवी बिजलीघरों के लटके प्रोजेक्ट पूरे कराए जाएं
-हसायन में 132 केवी बिजलीघर की भी है सख्त जरूरत
-बिजली चोरी रोकने को आबादी की लाइनों पर एबीसी कंडक्टर लगवाए जाएं
-टीटीजैड एरिया को बिजली कटौती से पूरी तरह मुक्त करें
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