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31 मार्च तक के बिल टीटीजैड के हिसाब से ही देने होंगे

Hathras

Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
हाथरस। ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजैड) की दरों पर भेजे गए बिजली बिलों को लेकर ग्रामीणों और बिजली अफसरों के बीच चल रहा गतिरोध अब खत्म हो सकता है। बिजली अफसर 31 मार्च 2011 के बाद के बिजली बिलों को नॉन टीटीजैड के रेटों के हिसाब से संशोधित करने पर सहमत हो गए हैं। ग्रामीणों से कहा गया है कि चूंकि 31 मार्च तक उन्हें 24 घंटे बिजली मिली है, इसलिए इस तारीख तक का बिल तो उन्हें टीटीजैड के हिसाब से ही देना होगा। इसके बाद के बिलों को जरूर माफ किया जा सकता है। अधिकारियों की मानें तो उनके इस प्रस्ताव पर ग्रामीण सहमत हो गए हैं और अब कोई गतिरोध नहीं रहा। अधिकारियों की मानें तो उन्होंने इस बारे में डीवीवीएनएल से भी निर्देश मांगे थे, लेकिन वहां से भी साफ कह दिया गया कि अगर इन गांव वालों ने 24 घंटे बिजली ली है तो इन्हें टीटीजैड के रेट के हिसाब से ही अपने बिल चुकाने होंगे। दरअसल, पूर्व ऊर्जा मंत्री के आदेश पर क्षेत्र के उन गांवों को भी 24 घंटे बिजली मिल रही थी, जोकि टीटीजैड से बाहर हैं। इनमें हाथरस जंक्शन, ऊर्जा व जोगिया फीडरों से जुड़े गांव शामिल हैं।
इन ग्रामीणों के पास 31 मार्च के बाद जब बिजली के बिल आए तो वह इनमें लगी भारी-भरकम राशि देखकर दंग रह गए। इन ग्रामीणों ने बिजली दफतर पहुंचकर इस पर ऐतराज किया तो पता चला कि उन्हें यह बिल टीटीजैड के रेटों पर भेजे गए हैं। ग्रामीणों का कहना था कि जब 24 घंटे बिजली उन्हें ऊर्जा मंत्री के आदेश पर मिल रही थी तो इसमें उनका क्या कुसूर। आज तक उन्होंने कभी टीटीजैड के हिसाब से बिल नहीं मिला है तो फिर अब क्यों उन्हें इस रेट पर बिल भेजे जा रहे हैं। पहले तो इसी बात पर गतिरोध बना रहा कि उनके गांव टीटीजैड में आते हैं। जब यह साबित हो गया कि यह गांव टीटीजैड में नहीं तो फिर बिजली वालों ने यह कह दिया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश हैं कि चूंकि 31 मार्च तक उन्हें 24 घंटे बिजली मिली है तो उन्हें उसी हिसाब से बिल देना पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया कि 31 मार्च तक तो सिकंदराराऊ और हसायन वालों को भी 24 घंटे बिजली मिली थी तो फिर उनसे क्यों टीटीजैड के हिसाब से बिल नहीं लिया जा रहा। सूत्र बताते हैं कि अभी तक बिजली महकमा इन बिलों को नॉन टीटीजैड के हिसाब से संशोधित करने पर राजी नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह गतिरोध इतनी आसानी से खत्म हो जाएगा। क्या वाकई इन ग्रामीणों को टीटीजैड में न होने के बावजूद टीटीजैड के रेटों पर बिल चुकाना होगा।
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