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घुंघरूओं की छन-छन की आवाज पड़ी ‘फीकी’

Hathras

Updated Sun, 27 May 2012 12:00 PM IST
सादाबाद। घुंघरूओं की छन-छन की आवाज कभी कस्बा बिसावर की पहचान हुआ करती थी। लोगों की जुबां पर घुंघरूओं की बात आते ही बिसावर का नाम निकल आता था, लेकिन आज वही आवाज शासन और प्रशासन की उपेक्षा के कारण धीमी पड़ने लगी है। देश भर में अपनी धाक जमाने वाला यहां का घुंघरू उद्योग अब किसी के सहारे की जरूरत महसूस कर रहा है। यहां के कारोबार के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा की है। रोजाना चांदी व्यवसायियों के साथ लूटपाट जैसी वारदात होती हैं, जिससे यहां के व्यापारी भयभीत हैं। सादाबाद तहसील का वैसे तो उद्योग धंधों के मामले में इतिहास दुर्भाग्यपूर्ण रहा है, लेकिन जिस उद्योग-धंधे या कुटीर उद्योग को लोगों ने अपनी मेहनत के बलबूते खड़ा किया, उसे भी शासन और प्रशासन की ओर से संरक्षण नहीं मिला। क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत बिसावर और उसके आसपास की दर्जनभर ग्राम पंचायत के लगभग 100 गांवों में चांदी और गिलहट के घुंघरू बनाने का कार्य लगभग 10 दशक से हो रहा है। आज फर्क सिर्फ इतना है कि पहले जहां पूरी तरह से चांदी के घुंघरू बनते थे, आज उसकी जगह अधिकांश गिलहट ने ले ली है। चांदी और गिलहट के घुंघरू के चलते हजारों लोगों की मजदूरी कई पुश्तों से चली आ रही हैं। इस काम में पुरुषों के साथ महिलाएं और वयस्क भी लगे हैं। घुंघरू उद्योग सही मायने में दर्जन भर ग्राम पंचायतोें में खेती के बाद कुटीर उद्योग के रूप में स्थापित हो गया। घुंघरू उद्योग में अहम भूमिका कुछ कारखाना मालिकों से लेकर ठेकेदारों की है। यहां तैयार होने वाले घुंघरूओं को मथुरा, आगरा, जयपुर आदि स्थानों पर ले जाकर विक्रय किया जाता है। जहां से आभूषण निर्माता इन्हेें खरीदकर पैरों की पायल से लेकर आभूषण तैयार करते हैं। कच्चे माल के रूप में चांदी और गिलहट लोगों द्वारा आगरा, मथुरा आदि स्थानों से खरीदकर लाई जाती है। यदि शासन-प्रशासन और क्षेत्रीय प्रतिनिधि इस घुंघरू उद्योग की ओर ध्यान दे और कच्चे माल की उपलब्धता व तैयार माल के विक्रय की सही व्यवस्था कराए तो निश्चित रूप से यह उद्योग और भी वृहद रूप धारण कर सकता है। इससे सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति हो सकती है। मगर इन सभी की उपेक्षा के कारण यह कुटीर उद्योग अपना वजूद बचाने को संघर्ष कर रहा है। उद्यमियों और कारीगरों को सुरक्षा न मिल पाने से अब तक करोड़ों की चांदी लुट चुकी है। कई लोगाें को अपनी जान तक गवांनी पड़ी है, लेकिन किसी भी लूट का आज तक खुलासा नहीं हो सका है। इस व्यवसाय से जुडे़ लोगों में काफी भय है। विसाबर, मई और बल्देव थाना क्षेत्र की सीमा के गांव झरौठा के आसपास पुलिस सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए।
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