आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

80 साल पुराने दाल उद्योग संकट में

Hathras

Updated Mon, 21 May 2012 12:00 PM IST
हाथरस। शहर में 80 साल पुराना दाल उद्योग अपना अस्तित्व बचाने को जूझ रहा है। बीते एक दशक में आलू का क्रेज बढ़ने से दलहन की पैदावार क्या गिरी, दाल मिल मालिकों के लिए यह कारोबार घाटे का सौदा बन गया। नतीजा, अब तक आधे से ज्यादा दाल मिलों का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है, जबकि बाकी मिलों के कारोबार पर भी बुनियादी सुविधाओं की कमी और करों के बोझ का ग्रहण लगा हुआ है। 80 साल पहले शहर में जब दाल उद्योग की शुरुआत हुई तो उस समय यह क्षेत्र दलहन की पैदावार के मामले में काफी संपन्न था, मगर बीते डेढ़ दशक में दलहनी खेती पर जैसे-जैसे आलू की पैदावार हावी हुई, मिलों के सामने कच्चे माल का संकट खड़ा होने लगा। बीते 11 सालों में तो मिलें कच्चे माल यानी दलहन के लिए पूरी तरह दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों पर निर्भर होकर रह गई हैं। यहां से 25 फीसदी ही दलहन का इंतजाम हो पाता है। ट्रेन की सुविधा के अभाव में सड़क मार्ग से दलहन मंगाने में तीन गुना से भी ज्यादा भाड़ा खर्च करना पड़ता है यानी जो माल 60 रुपये प्रति क्विंटल के भाड़े पर ट्रेन से यहां आ सकता है, उसके लिए 200 रुपये क्विंटल का भाड़ा देना पड़ता है। इस पर ढाई फीसदी मंडी शुल्क का बोझ और है, जबकि दूसरे राज्यों में दाल मंडी शुल्क से मुक्त है। हाथरस की दाल अन्य राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा महंगी हो गई है, जिससे दूसरे राज्यों में हाथरसी दाल की मांग भी बमुश्किल 15 से 20 फीसदी तक ही सिमट गई है। हाथरस से पूरे उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली को भी बड़े पैमाने पर दाल की आपूर्ति होती थी, लेकिन सुविधा न होने के कारण दिल्ली ने पिछले कुछ समय में इस कारोबार पर अपना प्रभुत्व जमा लिया है।
शुरअआत में मिलों में हाथ की चक्कियों से दलहन से दाल तैयार होती थी। एक-एक मिल में 100-100 महिला और पुरुष इस काम में जुटते थे, लेकिन कुछ सालों बाद यहां की मिलों में पूरा उत्पादन मशीनरी से होने लगा, जिससे उन लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी कम हो गए, जोकि इस उद्योग के भरोसे अपनी जीविका चलाते थे।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डेढ़ दशक पूर्व ही इस शहर में दाल मिलों की संख्या 120 तक थी, लेकिन इनमें से 60 मिलें बदहाली की भेंट चढ़ चुकी हैं, जबकि बाकी 60 में से भी कुछ और बंद होने के कगार पर हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

lentil industry crisis

स्पॉटलाइट

वर्ल्ड चैंपियन ने कहा, 35 सालों में पहली बार हुआ पति होने का एहसास

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में चमके आमिर और 'दंगल', झटके 4 अवॉर्ड

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

सैमसंग ने लॉन्च किया सस्ता और शानदार 4G स्मार्टफोन J2 Ace

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

फिल्मफेयर अवार्ड 2017 में इन हीरोइनों ने जमकर उड़वाई खिल्ली, ये रहीं बेस्ट

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

बाल काटने का नायाब तरीका, आग लगा कर बनाता है हेयरस्टाइल

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

Most Read

सपा में दो राष्ट्रीय अध्यक्ष! मुलायम की नेमप्लेट के नीचे लगा अखिलेश का बोर्ड

akhilesh yadav name plate in sp office as sp chief
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

पार्टी और साइक‌िल पर कब्जा म‌िलने के बाद मुलायम से म‌िलने पहुंचे अख‌िलेश

after getting cycle akhilesh yadav meets mulayam singh
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

खाते में आ गए 49 हजार, निकालने पहुंची तो मैनेजर ने भगाया

49000 come in account without permission of account hoder
  • शनिवार, 14 जनवरी 2017
  • +

यूपी चुनाव से पहले अमर सिंह ने छोड़ा देश, जानें- कहां गए

 amar singh goes to singapore for treatment.
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

चुनाव आयोग ने अखिलेश की 'स्मार्ट योजना' पर लगाई रोक

Election commission restricted smart fone registration process.
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

पटना हादसे में मरने वालों की संख्या 24 पहुंची

Boat capsize in Patna, 20 killed
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top