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गैस एजेंसियों की मनमानी में फंसे उपभोक्ता

Hathras

Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
हाथरस। रसोई गैस की किल्लत उपभोक्ताओं को खूब रुला रही है। एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की लाइन लंबी होती जा रही है। एक-एक रीफिल के लिए मारामारी मच रही है। सोमवार को भी शहर की गैस एजेंसियों पर कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। लंबी-लंबी लाइनों में लगे उपभोक्ताओं में एजेंसियों की मनमानी को लेकर गुस्सा था।
इनमें कई उपभोक्ता ऐसे थे, जिन्हें कई दिनों से इस लाइन में लगना पड़ रहा है, फिर भी रीफिल नहीं मिल पा रही। होम डिलीवरी बुक कराने के बावजूद उन्हें गोदाम और एजेंसियों के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि उनके सामने दलाल हाथों-हाथ मनमाफिक रीफिल लेकर जा रहे हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि एजेंसियों पर चल रही इस मनमानी को रोकने वाला कोई नहीं है। उपभोक्ताओं के हक की गैस सहालगों में कालाबाजारी में खप रही है। एजेंसी स्टाफ और ब्लैकियों का गठजोड़ उपभोक्ताओं के हक के सिलेंडरों को मुंहमांगी कीमत पर ब्लैक मार्केट में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा है, लेकिन उनका यह धंधा आम उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रहा है। एजेंसियों की मनमानी से कई उपभोक्ताओं के घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। एजेंसी पर घंटों लाइन में लगने के बाद जब उपभोक्ताओं से रीफिल के लिए इंकार कर दिया जाता है तो उनके गुस्से का ठिकाना नहीं रहता, लेकिन करें तो करें क्या। एजेंसियों की मनमानी के आगे उपभोक्ता बेबस हैं। उन्हें किसी भी तरह रीफिल चाहिए, इसलिए वह कोई पंगा भी नहीं करना चाहते। अफसोस तो यह है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन के स्तर से एजेंसियों पर हालात सुधारने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। हर बार केवल चेतावनी देकर ही इतिश्री कर ली जाती है। यही वजह है कि एजेंसी स्टाफ और ब्लैकिए मिलकर दिल खोलकर उपभोक्ताओं का हक लूट रहे हैं। शहर में साढ़े तीन हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं की रीफिल तो केवाईसी सत्यापन की वजह से अटकी पड़ी है। यह सभी उपभोक्ता भारत गैस की दोनों एजेंसियों के हैं। अभी तक इनका सत्यापन पूरा नहीं हो पाया है, जिससे इनकी रीफिल भी नहीं उठ पा रही है। यह उपभोक्ता पिछले एक महीने से एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि एजेंसी वाले कहते हैं कि यह उपभोक्ता ही केवाईसी भरने नहीं आ रहे।
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