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बिजली देहात की, बिल टीटीजेड के रेट पर

Hathras

Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
हाथरस। पूर्व ऊर्जा मंत्री के कार्यकाल में ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के फीडरों से जोड़े गए इलाके के करीब 125 गांवों के उपभोक्ता टीटीजेड के जाल में बुरी तरह फंस गए हैं। करीब ढाई साल तक टीटीजेड के फीडरों से निर्बाध बिजली का सुख भोगने वाले इन उपभोक्ताओं को अब यह सुविधा भारी पड़ रही है। सत्ता परिवर्तन के बाद टीटीजेड एरिया से बाहर के इन गांवों को बिजली तो देहात के हिसाब से मिल रही है, लेकिन बिजली का बिल आज भी टीटीजेड के हिसाब से ही आ रहा है। महीनों से यह उपभोक्ता अपने बिजली बिल नॉन टीटीजेड के रेट के हिसाब से संशोधित कराने के लिए बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। खुद बिजली अफसर कन्फ्यूज हैं कि आखिर टीटीजेड का एरिया कहां तक है। महकमे के पास टीटीजेड का जो नक्शा था, उसका भी कोई अता-पता नहीं है। लिहाजा अपनी करनी की सजा महकमा इन निर्दोष नलकूप उपभोक्ताओं को दे रहा है। सवाल यह है कि जब उन्हें टीटीजेड के हिसाब से 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही तो वह इसके रेट पर नलकूपों के बिल क्यों चुकाएं। इसी वजह से इन उपभोक्ताओं के बिलों का पेमेंट अटका पड़ा है और बिजली महकमा उधारी पर उनके कनेक्शन काटकर उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। दरअसल, बीते तीन सालों तक जब इन गांवों को 24 घंटे बिजली मिल रही थी, तब तो इनके बिल नॉन टीटीजेड के रेट पर ही आ रहे थे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद एकाएक इनके पास जब भारी-भरकम रकम के बिजली बिल पहुंचे तो किसान सकते में आ गए। बिजली दफ्तर से पता चला कि उनके बिल टीटीजेड की बिजली दरों के हिसाब से भेजे गए हैं। यह सुनकर उपभोक्ता हैरान रह गए। सवाल था कि जब टीटीजेड की बिजली थी, तब तो इतना बिल आया नहीं। जब 24 घंटे बिजली नहीं रही तो टीटीजेड का बिल भेजा जा रहा है।
जानकारों की मानें तो सत्ता बदलने के बाद डीवीवीएनएल आगरा के अफसरों ने यह खेल उस नुकसान की भरपाई के लिए किया, जोकि उन्हें पिछले तीन साल में इन गांवों को नॉन टीटीजेड के रेट पर टीटीजेड की बिजली देकर भुगतना पड़ा। गुपचुप तरीके से हुए इस खेल में किसान बुरी तरह फंस गए हैं और बिजली अफसर उन्हें राहत देकर अपनी गर्दन नहीं फंसाना चाहते। उन्हें भी उच्चाधिकारियों को दिखाना है कि अगर इन गांवों को बिजली टीटीजेड की दी गई है तो बिल भी उसी हिसाब से लगाया गया है। किसान इस बोझ से राहत पाने के लिए पिछले 7 महीने से लड़ रहे हैं। उनकी शिकायत पर विभाग के एसडीओ ने उस समय कई खत अधिशासी अभियंता दफ्तर को भी भिजवाए, लेकिन इन खतों का कोई अता-पता नहीं है। एक्सईएन दफ्तर में तो इन खतों की रिसीविंग तक दर्ज नहीं की गई, जबकि एसडीओ के यहां इनकी डिस्पेचिंग का पूरा रिकार्ड है। मतलब, बड़े अधिकारी खुद बताना नहीं चाहते थे कि इनमें से कौन से गांव टीटीजेड में है और कौन से टीटीजेड में। जिन गांवों के उपभोक्ता इस गड़बड़ी के शिकार बने हैं, उनमें गारवगढ़ी, रहना, अमरपुर घना, रूहेड़ी, गढ़ी नंदा, लहरा, अहवरनपुर, रघनियां, नगला उम्मेद, दयानतपुर, सुमरतगढ़ी, नगला कस, बरसै, लालगढ़ी, अजरोई समेत 100 से ज्यादा गांव शामिल हैं। बताते हैं कि किसानों की शिकायत पर एसडीओ ने 7 महीने पहले एक पत्र एक्सईएन द्वितीय को भेजा था, जिसमें कहा गया था कि 33 केवी ओढ़पुरा से चलने वाले रहे 11 केवी जोगिया, ऊर्जा और हाथरस जंक्शन फीडर के गांव नॉन टीटीजेड में हैं, जबकि टाउन वन और मुरसान फीडर का क्षेत्र ही टीटीजेड में है। साफ है कि जोगिया, ऊर्जा व जंक्शन फीडर से जुड़े गांवों की बिलिंग गलत ढंग से टीटीजेड के रेट पर की गई है।
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