आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

आजादी की जंग में स्मरणीय हैं राजा महेंद्र प्रताप के 32 साल

Hathras

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
हाथरस। सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है....। देश को आजादी दिलाने का ऐसा ही जज्बा आर्यान पेशवा राजा महेंद्र प्रताप के दिल मे था। उन्होंने 32 साल तक देश से निर्वासित रहकर आजादी के लिए जंग लड़ी। देश भले ही 1947 में आजाद हुआ हो लेकिन राजा महेंद्र प्रताप ने 1915 में ही हिंद सरकार की स्थापना कर दी थी। खेदजनक पहलू तो यह है कि आजादी के इस दीवाने की स्मृति में ऐसा कुछ नही किया गया, जोकि उल्लेखनीय हो। उनकी यादें तक संजोकर नहीं रखी गई।
राजा महेंद्र प्रताप का जन्म मुरसान नरेश बहादुर घनश्याम सिंह के यहां एक दिसंबर 1886 को हुआ था। बाद में उन्हें हाथरस नरेश राजा हरनारायण ने गोद ले लिया था। मात्र 20 साल की अवस्था में पिता का देहांत होने के बाद हाथरस विरासत पर राजा महेंद्र प्रताप की ताजपोशी हुई लेकिन राजा महेंद्र प्रताप के विचार शुरू से ही अंग्रेजी सल्तनत के खिलाफ थे। यही कारण था कि अंग्रेजों ने उन्हें राजा बहादुर की उपाधि नहीं दी। उन्होंने वृंदावन स्थित महाराज दयाराम सिंह के महल में प्रेेम महाविद्यालय की स्थापना कर औद्योगिक शिक्षा पर भी जोर दिया। वर्ष 1914 में जब पूरा यूरोप पहले विश्व युद्ध की आग में जल रहा था, तब उन्होंने योजना बनाई कि क्यों न विदेश जाकर देश के स्वाधीनता आंदोलन को मजबूती प्रदान की जाए। वह इस सिलसिले में देहरादून में पुरुषोत्तम दास टंडन से भी मिले। बस देहरादून से ही राजा महेंद्र प्रताप ने खुद को आजादी के आंदोलन के हवाले कर दिया।
जीवन के 31 साल तक वह देश से निर्वासित रहे और आजादी की लड़ाई लड़ते रहे। पहले विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन में निर्वासित भारतीय राजनेताओं में उनका विशिष्ट स्थान था। 10 फरवरी 1915 को वह मोहम्मद पीर के छद्म नाम से स्विट्जरलैंड होते हुए बर्लिन पहुंचे। वह जर्मनी की मदद से अंग्रेजी सल्तनत को मात देने चाहते थे। यही नहीं जर्मनी पहुंचने पर वहां से अधिपति विल्हैम द्वितीय ने उसका जोशीला स्वागत किया। वह इस दौरान वहां के सम्राट विलियम केसर से भी मिले। दो महीने बाद वह अफगानिस्तान चले गए और काबुल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जर्मन सम्राट का पत्र अफगानिस्तान के शाह अमीर हबीबुल्लाह को थमाया। पूरी योजना के अनुसार उन्होंने 1 दिसंबर 1915 को काबुल में हिंद सरकार की स्थापना कर दी। इस सरकार ने अफगानिस्तान से राजकीय स्तर पर संबंध स्थापित कर लिए। उन्होंने वहीं से पूरा सरकारी ढांचा खड़ा किया। इतिहास बताता है कि राजा साहब के सचिवालय में दो दर्जन से ज्यादा सचिव थे। हालांकि पहले विश्व युद्ध में अंग्रेजोें की जीत के चलते उनके प्रयासों को काफी धक्का लगा। उसके बाद अफगान सरकार ने उन्हें काबुल से हटाकर मजार शरीफ भेज दिया। वहां उन्होंने रूसी सरकार से राजनयिक संबंध स्थापित करने के प्रयास किए। राजा महेंद्र प्रताप जहां भी गए, आजादी के लिए संघर्ष करते रहे। 1925 में वह अमेरिका के केलीफोर्निया आए। वहां कुछ अप्रवासी भारतीयों की मदद से वह जापान पहुंचे। वहां भी उन्होंने विदेश में रहकर आजादी की योजना बनाई। वहां उन्होंने संस्था बनाई, वे स्वयं इसके प्रधान, रास बिहारी बोस उप प्रधान थे। दूसरे विश्वयुद्ध के समय वह जापान में ही मौजूद थे। जब जापान इसमें पराजित हुआ तो वह युद्धबंदी बना लिए गए। 4 फरवरी 1946 को उनकी जेल से रिहाई हुई। उसके बाद जब वह 31 साल 7 महीने निर्वासित रहने के बाद अपने वतन लौटे तो जोरदार स्वागत हुआ। देश में आने के बाद सरदार बल्लभ भाई पटेल उन्हें सेवाग्राम आश्रम ले गए। वहां गांधी जी से भी उनकी मुलाकात हुई। आजादी के इस योद्धा ने 1957 से लेकर 1962 तक मथुरा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1979 में उनका देहांत हो गया। यही उनकी यादोें को संजोकर रखने की बात करें तो भारत सरकार ने उन पर एक डाक टिकट जारी किया है और नगर पालिका यहां उनके नाम से एक मार्के ट बना चुकी है लेकिन आजादी की इतनी बड़ी जंग लड़ने वाले इस योद्धा की स्मृति के लिए यह नाकाफी है। व्यापारी नेता शैलेंद्र सरार्फ ने मांग की है कि राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया जाए। संसद भवन में उनका चित्र लगाया जाए। शहर के किसी मुख्य चौराहे पर उनकी प्रतिमा लगाई जाए। उनके नाम से स्कूल, कॉलेज खोले जाएं। उनकी जयंती सामाजिक और सरकारी संस्थाएं मनाएं। यही नहीं उन्होंने 1 दिसंबर को सरकारी अवकाश घोषित करने की मांग भी की है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

अगर जाना है सासू मां के दिल के करीब तो खुद को कर लें इन चीजों से दूर

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

गूगल लाया नया फीचर, अब फोन में डाउनलोड ही नहीं होंगे वायरस वाले ऐप

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

क्या आपकी उड़ गई है रातों की नींद, ये तरीका ढूंढ़कर लाएगा उसे वापस

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

दुनिया पर राज करने वाले मुकेश अंबानी आज तक अपने इस डर को नहीं जीत पाए

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

एक्टर बनने से पहले स्पोर्ट्समैन थे 'सीआईडी' के दया, कमाई जान रह जाएंगे हैरान

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

Most Read

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

शिक्षामंत्री की कुर्सी पर बैठ FB में शेयर की फोटो, वायरल होते ही हिरासत में युवक

police arrested boy sat on minister's chair after uploading pic on FB
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

रामनाथ कोविंद की तकदीर एक शब्द ने बदल दी, जानें क्या है इसका रहस्य  

one word change life of ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

लखनऊ टीसीएस कर्मचारियों को झटका, सीओओ से नहीं मिले सीएम योगी

up cm denied to meet tcs coo
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

राम मंदिर पर साक्षी महाराज का बड़ा बयान, बोले अब तो राष्ट्रपति भवन में भी 'राम'

sakshi maharaj said in mathura ram mandir construction in moving on
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

जवान बेटे की पत्नी पर है बुरी नजर, मासूम पोती के लिए भी कही गंदी बात

woman in mainpuri alleged her father in law for attempt to rape
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!