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बजट का टोटा, भूखे पेट लौट सकते हैं नौनिहाल

Hardoi

Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
हरदोई। शासन की उदासीनता एक बार फिर आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को भूखे पेट लौटने पर मजबूर कर सकती है। शासन से बजट आहरण की अनुमति न मिलने से आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब अगले माह के लिए हाटकुक्ड बनाने को धनराशि ही नहीं बची है। इससे जिले के करीब तीन लाख नौनिहालों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर गरमा गरम भोजन करा पाना संभव नहीं हो सकेगा। हालांकि चालू माह में हाटकुक्ड भोजन बनाने को पैसा भेज दिया गया है लेकिन अगले माह बच्चों को फांके करने पड़ सकते हैं।
बच्चों को पोषित कराने के लिए बाल विकास विभाग से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन होता है। जिन पर नवजात से लेकर छह वर्ष तक के बच्चों को पोषण देने के लिए स्वास्थ्य वर्धक पोषाहार व प्राथमिक शिक्षा भी दी जाती है। इसी क्रम में आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह साल तक के बच्चों को हाटकुक्ड भोजन योजना के तहत गरमा गरम खाना भी दिया जाता है। लेकिन अब इसे जिले के बच्चों का दुर्र्भाग्य ही कहा जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को नियमित ढंग से हाटकुक्ड ही नहीं मिल पा रहा है ऐसा नहीं है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन नहीं बनाया जाता है। बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर शासन से नियमित रूप से धनराशि ही नहीं दी जा रही है।
गौरतलब हो एक बच्चे पर वैसे तो मात्र दो रूपए ही प्रतिदिन खर्च होते हैं लेकिन संख्या अधिक होने के कारण धनराशि करोड़ोें में पहुंच जाती है। ऐसे में अब शासन ने इस ओर उदासीनता बरतना शुरू कर दिया है। बीते अप्रैल, मई और जून माह में तो बच्चों को हाटकुक्ड धनराशि के अभाव में नहीं मिल पाया था। इसके बाद शासन ने राशि भेजी थी, वहीं अब एक बार फिर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाटकुक्ड के लिए धनराशि का अभाव नजर आने लगा है। जिले की कुल 20 परियोजना कार्यालयों के अंतर्गत 3930 आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष के 293588 बच्चे पंजीकृत हैं। इनको हाटकुक्ड भोजन के लिए चालू वित्तीय वर्ष में कुल तीन करोड़ 91 लाख 50 हजार रूपया आवंटित किया गया। इसको अगस्त और सितंबर 2012 के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्री और मातृ समिति अध्यक्षा के संयुक्त खाते में भेज दिया गया।
खातों से धनराशि अहारण कर ली गई, जिससे अक्तूबर माह तक के लिए तो सामग्री उपलब्ध है लेकिन अगले महिन में हाटकुक्ड बनाने के लिए न तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर सामग्री है और न ही विभाग के पास बजट। जबकि बाल विकास विभाग से सितंबर 2012 तक का समायोजन भी लेखाकार को भेजा जा चुका है लेकिन अभी धनराशि का आवंटन नहीं हुआ। इसको लेकर अधिकारी भी परेशान नजर आ रहे हैं।
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