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पुल की आस में ‘बुढ़ा’ रही ‘जवानी’

Hardoi

Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
‘आजादी के 65 साल बाद भी नदियों पर पुल न बनने से दर्जनों गांवों का संपर्क बाढ़ के दौरान कट जाता है। हल्की बारिश मेें उफनाई नदी को पार करने को ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। मल्लावां क्षेत्र से निकली कल्याणी नदी से जुड़े करीब चार दर्जन गांवों के बाशिंदों को हर बार ऐसी की कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे अकसर हादसे भी होते, पर जिम्मेदार बेखबर है। इधर, रामगंगा नदी के उफनाने पर कटियारी के बाशिंदों को फर्रुखाबाद से होकर गांव तक जाना पड़ता है, क्योंकि अर्जुनपुर में बनने वाला पुल आज तक नहीं बना, जिससे इससे जुड़े करीब डेढ़ सैकड़ा गांव और मजरे विकास से वंचित है। बाढ़ के दौरान बच्चों की जहां पढ़ाई बाधित होती है, वहीं बीमारी में क्षेत्र के मरीज फर्रुखाबाद स्थित अस्पताल में उपचार कराते है। करीब सात माह पहले हुए विस चुनाव के दौरान सपा नेता शिवपाल सिंह ने घोषणा की थी कि वह कटियारी क्षेत्र को गोद लेकर यहां विकास की गंगा बहाएंगे, पर सरकार बनने के बाद वादे हवाई होते नजर आ रहे है। लोगों को उम्मीद है कि 1 अक्तूबर को सूबे की सरकार के हरदोई आने पर उनके क्षेत्र पर भी नजरें इनायत हो सकती है। दोनों ही क्षेत्रों की करीब डेढ़ लाख की आबादी पुल न होने से प्रभावित होती है।’
हरदोई। जिले में विकास के दावे भले ही किए जाते रहे हों, पर हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदेे मूलभूत समस्याओें से जूझ रहे हैं। चुनाव में हर बार विकास के सपने दिखाए जाते हैं, पर बाद में उन्हें पूरा कोई नहीं करता। सवायजपुर तहसील क्षेत्र के करीब डेढ़ सैकड़ा और मजरोें का बाढ़ के दौरान जिले से संपर्क कट जाता है। रामगंगा नदी के उफनाने से लोगों को फर्रुखाबाद होकर इन गांवों में जाना पड़ता है।
मल्लावां क्षेत्र की कल्याणी नदी पर पुल न होने से लोगों को नाव पर सवार होकर नदी पार करना पड़ रहा है। नदी के पार करीब चार दर्जन गांव हैं, जिनमें 50 हजार की आबादी प्रभावित होती है। इन गांवों के 50 फीसदी मजरे हैं, जिनमें अभी तक विद्युतीकरण नहीं हुआ। गांव के स्कूली छात्रों को नाव से नदी पार कर मल्लावां स्थित स्कूलों में पढ़ने को जाना पड़ता है। कई बार नाव पलटने के हादसे हुए, पर जिम्मेदार बेखबर रहे। क्षेत्र के मरीजों को भी सीएचसी तक आने को सात किमी की जगह 24 किमी का फासला सड़क मार्ग से तय करना पड़ता है, जिससे लोगों में खासा रोष है।
करवां के पास से गुजरने वाली कल्याणी नदी से बेरिया, कुतुबापुर, हजरतपुर, लोनारी, हरिगंज, मरिया, सिरसैथा, सामपुर, पूरनमऊ, दुर्गापुरवा समेत करीब 50 गांव और मजरे जुड़े हैं। बीते दो वर्षों में आई बाढ़ के दौरान क्षेत्र की सड़कें कट चुकी है, जिनकी मरम्मत न होने से पैदल चलना भी दूभर है। बेरिया गांव के प्रधान देवी प्रसाद का कहना है कि हर बार चुनाव में उन्हें पुल बनवाने का वादा कर छला जाता है, पर आज तक कि सी ने पुल की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उधर, सवायजपुर क्षेत्र में रामगंगा नदी के उफनाते ही दूसरी ओर बसें करीब डेढ़ सैकड़ा गांवों का जिले से संपर्क कट जाता है और फर्रुखाबाद होकर जाना पड़ता। 10 ग्राम सभाओं में अर्जुनपुर, दहेलिया, बारामऊ, मुरबा, शहाबुद्दीनपुर, कटरी छोछपुर आदि में करीब एक लाख की आबादी इससे प्रभावित होती।
बाढ़ के दौरान क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई बाधित रहती है और मरीजों को भी उपचार को फर्रुखाबाद जाना पड़ता है। करीब सात माह पहले विस चुनाव के दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जहां कटियारी क्षेत्र में अर्जुनपुर स्थित नदी का पुल बनवाने समेत विकास के वादे किए थे, वहीं शिवपाल यादव ने कटियारी क्षेत्र को गोद लेकर सैफई की तर्ज पर विकास कराने का वादा किया था। सरकार बनने के छह माह बीतने के बाद भी क्षेत्र में कोई भी विकास कार्य नहीं कराया गया।
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कल्याणी पार करने में फिर पलटी नाव
मल्लावां। कल्याणी नदी पर करवां गांव में शनिवार को नाव से नदी पार कर स्कूल जाने के दौरान नाव अचानक पलट गई, जिससे मधू, वंदना, सत्यम, आकांक्षा, आकाश, मान सिंह, राधा, स्नेहा, समीक्षा, शुभम् समेत करीब 2 दर्जन बच्चे नदी में गिर गए। ग्रामीणों ने उन्हें जैसे तैसे निकाला, पर बच्चों की किताबें पानी में बह गई। बच्चों ने बताया कि वह खैरूद्दीनपुर स्थित चंद्रा देवी उच्चतर माध्यमिक स्कूल में पढ़ते हैं। हादसे के बाद पुल बनवाने की मांग को लेकर प्यारेलाल, रामकुमार, रामकिशोर, गोपालदास, गोकरन, दीपू, रेशमा, पूनम देवी आदि ने नारेबाजी की। ज्ञात हो कि 19 सितंबर की दोपहर भी छात्रों से भरी एक नाव नदी में पलटी थी।
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पीपे के पुल से भी हो चुके कई हादसे
हरपालपुर। रामगंगा नदी को पार करने को पीडब्ल्यूडी से 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक पीपे के पुल का निर्माण कराया जाता है, पर नदी में पानी ज्यादा होने से यह पुल दिसंबर तक बन पाता है, जो 15 जून तक हटा लिया जाता है। पीपे के पुल से कई बार हादसे हुए, इसके बाद भी महकमे के अधिकारी नहीं चेत रहे हैं।
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‘कटियारी क्षेत्र के लोगों के लिए रामगंगा नदी पर पुल बेहद जरूरी है। अर्जुनपुर पुल के लिए शासन को प्रस्ताव दिया है और उम्मीद है कि सीएम यहां आकर पुल निर्माण की घोषणा करेंगे।’-ऊषा वर्मा, सपा संासद
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‘विस सत्र में अर्जुनपुर-बड़ागांव के मध्य रामगंगा नदी पर पुल निर्माण की मंाग उठाई थी। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री क्षेत्र की समस्या को प्रमुखता से लेकर पुल निर्माण की घोषणा करेंगे।’-रजनी तिवारी, बसपा विधायक
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