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गर्रा में समाए 28 मकान, खेत

Hardoi

Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
‘कुदरत के कहर से कटियारी क्षेत्र के बाशिंदों की फिर नींद उड़ने लगी है। पंच नदियों से इस क्षेत्र में गंगा के बाद रामगंगा, गर्रा, गंभीरी, कुंडा का जलस्तर फिर बढ़ने लगा। लगातार गुर्रा रहे गर्रा में रविवार को शाहाबाद और बिलग्राम तहसील क्षेत्र मेें करीब 28 घर और 23 बीघा खेत समां गए, जबकि नदी किनारे बसे लोगों ने अपने पक्के मकान तोड़ने शुरू कर दिए। पाली क्षेत्र के कहारकोला गांव को नदी ने चारों ओर से घेर लिया है। नतीजतन गांव की स्थिति एक टापू की तरह बन गई है। उधर, शाहाबाद में बाढ़ से घिरे बूटामऊ गांव को बचाने मेें प्रशासन ने मशक्कत शुरू कर दी। एसडीएम ने मनरेगा से गांव के चारों ओर बंधा बनाने के लिए 75 मजदूरों को लगा दिया। प्रशासन की ओर से अब तक बाढ़ पीड़ितों को गांव के प्राइमरी स्कूल में ठहराया जा रहा है। वहीं कई क्षेत्रों में लोगों ने पलायन करना भी शुरू कर दिया। बाढ़ पीड़ितों को राहत के नाम पर गेंहूं और चावल दिया जा रहा है। इसके चलते उन्हेें खाना बनाने मेें भी मशक्कत करनी पड़ रही है। क्षेत्र की स्वयंसेवी संस्थाओं ने मदद की कोई पहल नहीं की न हीं कोई जनप्रतिनिधि आगे आया।’
शाहाबाद/बिलग्राम/सांडी। गर्रा नदी के उफान से क्षेत्र में तबाही शुरू हो गई। नदी किनारे बसे गांवों में दो दिनों से नदी में लगातार कटान हो रहा है। रविवार को दो तहसील क्षेत्रों में 28 मकान और 23 बीघा खेत नदी मेें समां गए। एसडीएम शाहाबाद ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर बचाव कार्य तेज कराए। इधर, सांडी क्षेत्र में नदी किनारे बसे लोगों ने अपने पक्के मकान तोड़ने शुरू कर दिए।
आलम यह है कि क्षेत्र के गजरी गांव में दूसरे दिन भी कटान हुआ। वहीं गांव के लोग सुरक्षित ठिकाने के तलाश में निकल लिए। शाहाबाद तहसील क्षेत्र के बूटामऊ गांव निवासी चंपा, धनपाल, बहादुर, सुंदरपाल, सालिगराम, रामू समेत 7 घर रविवार को नदी में समां गए। कटान तेज होने की सूचना पर एसडीएम जयपाल सिंह गांव पहुंचे और नदी किनारे बसें लोगों को प्राथमिक विद्यालय में ठहरवाया। नदी का पानी गांव में घुसने से रोकने के लिए एसडीएम ने मनरेगा के मजदूरों को बंधा बनाने के लिए लगा दिया। जिससे गांव मेें पानी न जा सके। इधर, पाली क्षेत्र में नदी किनारे बसें गांवों के लोग घर छोड़कर पलायन करने लगे। पानी में सैकड़ा बीघा फसल जलमगभन हो गई।
बाबरपुर, बंगराजपुर, अतरजी, रनधीरपुरा, किरनपुर, चंद्रमपुर, खजुहाई, दरियापुर, हिरनपुरवा आदि में पानी पहुंच गया है। कहारकोला गांव नदी के पानी से घिर गया है, जिससे लोग चिंतित है। यहां के बाशिदे प्रेमनारायण मिश्रा, जगदीश प्रसाद, ज्ञानेश्वर प्रसाद, देव स्वरूप, भुवनेश्वर मिश्रा, हरीकांत, व कल्लू का पक्का घर नदी में समां गया। वहीं गांव के कल्लू मिश्रा का 4 बीघा, हरीकांत का 6 बीघा, उमेश चंद्र का 2 बीघा, रामकिशन का 8 बीघा, बालकराम बाजपेयी का 3 बीघा खेत फसल समेत नदी में समां गया। बिलग्राम तहसील क्षेत्र के मक्कूपुरवा के आस पास की जमीन नदी में तेजी से कट रही है। वहीं कई खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई।
नरेश, हरदयाल आदि ने बताया कि रामपुर गांव के निकट गर्रा का पानी पहुंच गया है। निहालपुरवा, शेखनपुरवा, महानंदी पुरवा, घांसीराम पुरवा आदि गांवों के मुहाने पर गंगा नदी का पानी पहुंच गया है। इसके अलावा हसनापुर की डिबरी पर पानी चल रहा है। यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ा तो हालात बिगड़ने के आसार हैं। कटरी क्षेत्र की ग्राम सभा छिबरामऊ, परसोला, बिछुइया, बिलुही के मजरों मेें गत वर्ष भी पानी से खासी तबाही हुई थी। उधर, सांडी क्षेत्र में ग्राम मानीमऊ में गिरींद्र, खुशीराम, रामभजन, रामनिवास, महेंद्र, विजय कुमार, विकट, रमेश, माताराम, रामऔतार आदि के मकान कट गए, जबकि मोहद्दीनपुर में कृपाल, विनोद, अब्दुल, राजेंद्र, जदुवीर अपना पक्का तोड़कर मलबा बचाने की कोशिश कर रहे है।
इधर, गजरी गांव मेें रामपाल, अरविंद ने अपना मकान तोड़ लिया, जबकि मैकू लाल, रामबक्स और वासुदेव के मकान नदी में समां गए। रामगंगा, गंभीरी और नीलम नदीं के उफनाने से खेतों में खड़ी फसल जलमगभन हो गई। मलबा अखवेलपुर के मजरा चुन्नीपुरवा में सुखेता नाला और गर्रा नदी का पानी पहुंच गया है, जिससे गांव की फसल प्रभावित हो रही है। फिलहाल नदियों के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी।
इंसेट
जेसीबी लगाकर तुड़वा रहे ग्रामीण मकान
पाली। गर्रा नदी किनारे बसेें बाबरपुर गांव में पक्के मकान को तोड़ने के लिए जेसीबी का सहारा लिया गया। मकान तोड़ने के दौरान ग्रामीण की आंखें नम थी। बोले बड़ी मुश्किल से घर बनाया था, पर नदी के कटान के कारण आज उन्हें तोड़ना पड़ रहा है।
इंसेट
नदी किनारे पत्थर होते तो नहीं होता कटान
सांडी। मानीमऊ गांव के निकट से गुजरी गर्रा नदी से हो रहे तेज कटान से ग्रामीणों के होश उड़ गए है। बोले, कई बार मांग के बावजूद नदी के किनारे पत्थर नहीं डाले गए। इस बाबत तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक रजनी तिवारी से भी पहल की थी, पर नतीजा सिफर रहा। यहीं वजह है कि हर बार बाढ़ से यहां के बाशिंदों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इंसेट
अधिकारी बढ़ते जलस्तर की कर रहे निगरानी
शाहाबाद/बिलग्राम। एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में दौरा कर बढ़ते जलस्तर पर निगाह रखे हैं। एसडीएम जयपाल सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को 10 किलो गेहूं और चावल दिलाया जा रहा है। इसके अलावा जो भी संभव होगा वह मदद की जाएगी। उधर, तहसीलदार बिलग्राम रामचंद्र यादव ने बताया कि बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षकों व लेखपालोें से प्रति दिन की रिपोर्ट ली जा रही है।
इंसेट
नदी की धारा मुड़ने से हो रहा है कटान
हरदोई। गर्रा नदी की धारा मुड़ने से कटान में तेजी आई है। ग्रामीणों की मानेें तो पश्चिम दिशा में नदी की धारा मुड़ी है, जिससे पक्के मकान भी अब नदी में समां रहे हैं। यदि इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो हालात और भी बिगड़ने की संभावना है।
इंसेट
एक नजर नदियों के जल स्तर पर
नदियां जल स्तर चेतावनी स्तर खतरे का स्तर
गंगा 136.45 136.60 137.10
रामगंगा 135.05 136.60 137.10
गर्रा 147.50 ----- 148.80
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