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माडर्न स्टेशन कागजों पर तैयार

Hardoi

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
‘रेलवे को करोड़ों की कमाई करके देने वाला हरदोई का रेलवे स्टेशन अब जिम्मेदारों की उदासीनता का शिकार होता जा रहा है। स्टेशन को भले ही माडर्न स्टेशनों की श्रेणी में दर्ज कर दिया गया है, पर इस श्रेणी के मानकों के आधार पर स्टेशन पर एक भी सुविधाएं लोगों को नहीं मिली है। माडर्न स्टेशन की श्रेणी में आने के दौरान इस रेल मार्ग का इलेक्ट्रिफाइड पर कर दिया गया, पर सालों गुजरने के बाद भी आज तक इस रेल मार्ग पर बिजली से चलने वाली ट्रेन नहीं गुजर सकी, जबकि अफसरों ने तो कइयों वादे कर डाले हों, जबकि रही बात मेमू ट्रेन की तो वह अब सपना बनकर रह गई हैं। वहीं दूसरी ओर हरदोई का माल गोदाम भी है। माल गोदाम से प्रतिवर्ष 20 से 22 करोड़ रुपए की आमदनी रेलवे को होती है, पर यदि माल गोदाम के एरिया परिसर पर गौर करें तो वहां बरसात के दिनों में लोगों का निकलना दूभर होता है। स्टेशन के टिकट काउंटर में यात्रियों की लाइन के साथ जानवर भी लाइन में लगे रहते हैं, जबकि टिकट काउंटरों की संख्या को लेकर भी खेेल हो रहा है। स्टेशन पर इसके अलावा और भी कई अव्यवस्थाएं हैं, जबकि जिले के जिम्मेदारों ने व्यवस्थाओं को बनाए रखने के कर्तव्य को भुला दिया है। स्टेशन पर न तो लोगों के बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही वाहनों को खड़े करने की।’
हरदोई। रेलवे स्टेशन को जब माडर्न स्टेशन की श्रेणी में दर्ज कराया गया था, तो स्टेशन परिसर को सर्कुलेटिंग एरिया के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई। सर्कुलेटिंग एरिया में दो और चौपहिया वाहनोें के अस्थाई रूप से खड़ा करने को पार्किंग बनाने के निर्देश भी दिए गए थे। जिले में इस बाबत मंडल कार्यालय से निर्देश भी आए थे, पर जब काम शुरू हुआ, तो मात्र सर्कुलेटिेंग एरिया को पक्का कर दिया गया, जबकि पार्किंग के लिए कोई स्थान नियत नहीं किया गया है, जिससे लोग अपने वाहनों को गेट के सामने ही खड़ा कर देते हैं।
जिले से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री आते-जाते हैं, ऐसे में टिकट घर पर हर वक्त यात्रियों की काफी भीड़ लगी रहती है। यात्रियों की लंबी लाइन होने के बावजूद जिम्मेदार टिकट खिड़की बढ़ाने की ओर प्रयास नहीं कर रहे हैं। स्टेशन पर दो टिकट काउंटर और एक मैनुअली टिकट काउंटर व एक ही रिजर्वेशन काउंटर है, जबकि विभाग के आंकड़ों की माने तो स्टेशन पर हर वक्त तीन खिड़कियों का संचालन होता है, जबकि दो आरक्षण काउंटर सुबह आठ बजे से शाम के आठ बजे तक संचालित होते हैं, पर यदि स्टेशन पर जाकर देखा जाए तो टिकट घरों के संचालन के आंकड़े में भी हो खेल हो रहा है।
स्टेशन पर मात्र दो खिड़की का संचालन होता है, जिसमें एक खिड़की अकसर बंद रहती है, जबकि आरक्षण काउंटर भी एक ही है, जिस पर हर वक्त भीड़ रहती है। टिकट खिड़कियों के संचालन में खेल हो रहा है, वहीं टिकट खिड़की का परिसर पशुओं की आरामगाह भी बन गया हैै। उधर, रेलवे ने वैसे तो विकलांगों को ट्रेन से लेकर स्टेशन पर तमाम सुविधाएं दे रखी हैं, पर जिम्मेदारों की लापरवाही से लोगों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। रेलवे की ओर से विकलांगों के लिए व्हील चेयर की व्यवस्था की गई है, जबकि रेलवे ने बड़े स्टेशनों पर तो अंडरग्राउंड मार्ग बनवाए हैं, जबकि प्लेटफार्मों के आखिरी छोर पर इंटरलाकिंग की गई है।
ताकि विकलांगों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक जाने में परेशानी न उठानी पड़े, पर स्टेशन पर तो इसका उल्टा ही है। स्टेशन पर एक तो व्हील चेयर टूटने की कगार पर पहुंच गई है, वहीं प्लेटफार्म नंबर एक के अंतिम छोर पर बनाया गया इंटरलाकिंग भी टूट गई है। ऐसे में विकलांगों को प्लेटफार्म पार करने को सिर्फ अपनों का ही सहारा लेना पड़ता है।
इंसेट---
दुर्दशा का नाम खदरा का माल गोदाम
हरदोई। रेलवे को जिले से प्रतिवर्ष करोड़ों की कमाई होती है। व्यापारियों का बाहरी प्रदेशों से आने वाली सामग्री और यहां से बाहरी प्रदेशों में भेजे जाने वाले माल से करोड़ों प्राप्त होते हैं, जो सीधे रेलवे के खजाने में जमा होता है। जिले मेें प्रतिवर्ष माल गोदाम से 20 से 22 करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं। इसके बावजूद माल गोदाम काफी दयनीय स्थिति में है। अफसरों की उदासीनता से रेलवे का खदरा स्थित माल गोदाम परिसर दुर्दशा का दूसरा नाम साबित हो रहा है। माल गोदाम की बारिश के दिनों में यह हालत हो जाती है कि पैदल निकलना तो दूर बाइक और साइकिलों से भी आना जाना हादसे को दावत देना है। कई बार मंडलीय अफसरों ने दौरा भी किया, पर कार्रवाई कागजों के बाहर कभी निकल कर ही नहीं आ सकी।
इंसेट---
मेमू को साल दर साल बस होता है इंतजार
हरदोई। सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी योजना लखनऊ से हरदोई के बीच में इलेक्ट्रिक ट्रेन का संचालन है। मेमू ट्रेन के चलने का सपना जिले के लोग वर्ष 07 से संजोये हैं, पर मेमू ट्रेन को लेकर कोई प्रस्ताव ही नहीं किया गया है। ऐसे में इलेक्ट्रिक लाइन पर मेमू कब दौड़ेगी किसी को पता नहीं है। अभी कुछ दिन पूर्व मुख्य संरक्षा आयुक्त और रेलवे के तमाम अफसरों ने लखनऊ के बाद हरदोई और हरदोई के बेहटा गोकुल से रोजा तक इलेक्ट्रिक लाइन का निरीक्षण किया। ऐसे में लोग फिर उम्मीद लगाए हुए हैं कि मेमू का संचालन हो जाए, पर अफसरों की माने तो अभी भी मेमू के चलने में समय है। रही बात इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाने की तो उससे पहले माल गाड़ी में इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाया जाएगा। जिसके बाद ही यात्री गाड़ी में इलेक्ट्रिक इंजन लगाया जाएगा।
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‘रेलवे स्टेशन के अधीक्षक राम नारायण मिश्रा का कहना है कि स्टेशन पर व्यवस्थाओं को चुस्त दुरुस्त बनाने को हर समय तत्पर रहा जाता है, पर यदि कोई कमी सामने आती है, तो मंडल अफसरों को बताया जाता है और वहीं से आदेश आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाती है। जब तक मंडल के अधिकारी कोई आदेश नहीं देंगे, तब तक बात बननी मुश्किल है।’
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