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आंकड़ों को गुमराह कर रहीं 2.5 लाख कुदालें

Hardoi

Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
‘जिले में मनरेगा के तहत साढ़े चार लाख से ज्यादा जॉब कार्डधारक हैं। यह बात सिर्फ सरकारी डायरी में सही मानी जा सकती है, पर जानकर हैरानी भले ही हो, लेकिन जिले के ही ढाई लाख से ज्यादा मजदूर जॉब कार्ड बनवाकर जिले को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। पिछले तीन सालों में इन ढाई लाख से ज्यादा मजदूरों ने फावड़ा कभी चलाया ही नहीं। एक अदद पहचान पाने की खातिर सक्षम लोग भी मनरेगा मजदूराें में शामिल हो गए और ढाई लाख से ज्यादा जॉब कार्ड शोपीस बनकर रह गए। जिले में अब तक जॉब कार्डधारकों की संख्या लगभग साढ़े चार लाख से कहीं ज्यादा पहुंच गई है, पर इस साल का ही नहीं पिछले दो साल का रिकार्ड रहा कि पूरे वर्ष दो लाख मजदूरों से ज्यादा किसी ने काम ही नहीं किया। तो शेष ढाई लाख मजदूर गायब हो गए या उनके द्वारा मनरेगा के काम को नकार दिया गया। वित्तीय वर्ष 12-13 की बात करें तो सरकारी आंकड़े ही बताते हैं कि इस वित्तीय वर्ष कार्ड धारकों की संख्या जहां चार लाख 66 हजार से ज्यादा पहुंच गई है, वहीं अब तक काम मांगने वालों की संख्या 10 हजार के ऊपर तक नहीं गई है। अभी तक 90,065 जाब कार्डधारकों ने काम मांगा है। जिनको प्रशासन द्वारा काम मुहैया करवाया गया है।’
हरदोई। जिले में मनरेगा के तहत जॉब कार्डधारकों को काम शायद चाहिए ही नहीं। इस वित्तीय वर्ष ही नहीं वर्ष 11-12 के मध्य भी जहां जिले में जॉब कार्डधारकों की संख्या चार लाख 69 हजार 864 थी और पूरे वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक सिर्फ दो लाख तीन हजार 721 मनरेगा मजदूरों ने ही इसके तहत काम करने की इच्छा जाहिर की और काम मांगा। शेष दो लाख 66 हजार 143 ने मनरेगा से मुंह ही मोड़ लिया।
अब यह कहा जाने लगा कि मनरेगा मेें या तो काम नहीं मिल रहा या फिर मजदूरों को मनरेगा का काम करने में कोई रुचि नहीं है। अब यह भी देखिए कि वर्ष 10-11 में भी मनरेगा में काम करने वालों की जहां कोई कमी नहीं थी, वहीं इसको नकारने वालों की भी कोई कमी नहीं थी। इस वित्तीय वर्ष में भी दो लाख 43 हजार 84 ने मनरेगा के काम को ठुकरा दिया। इस वित्तीय वर्ष में चार लाख 58 हजार 731 का जॉब कार्ड बनवाया जा चुका था, जबकि इनमें से पूरे वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक मात्र दो लाख 15 हजार 647 ने ही काम करने की इच्छा जाहिर की।
पिछले वित्तीय वर्ष जहां 460 विकलांगों के लिए मनरेगा सहारा बनी, वहीं इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ 178 विकलांगों का ही मनरेगा सहारा बन पाई। 178 विकलांगों ने ही इस ओर काम मांग पाया, जबकि वर्ष 11-12 में पूरे 19 ब्लाक में 460 विकलांगों को काम मिला था। इस ओर काम करने में मजदूरों को समस्याएं आ रही हैं। वित्तीय वर्ष को शुरू हुए 150 दिनों से ज्यादा का समय हो गया, पर अब तक मात्र 150 परिवारों ने ही 100 दिन का रोजगार पूरा कर पाए हैं। बावन व बिलग्राम ऐसे ब्लाक हैं, जहां अब तक एक भी परिवार अपने 100 दिन का रोजगार को पूरा नहीं कर सके हैं।
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40 फीसदी सीमा पर मांगा शासन ने स्पष्टीकरण
हरदोई। केंद्र सरकार का पत्र आने के बाद शासन की तरफ से संयुक्त सचिव गिरजा शंकर त्रिवेदी ने सभी डीएम को पत्र जारी कर मनरेगा में पंचायत स्तर पर सामग्री मद में 40 प्रतिशत की सीमा के बाबत स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में कहा गया कि हर ग्राम पंचायत के स्तर पर सामग्री मद में व्यय की जाने वाली धनराशि के संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित कराए। निर्देश मिलने के बाद जिला स्तर से लेकर खंड स्तर के अधिकारी इस ओर अपनी अपनी सूचनाओं को तैयार करने मेें जुट गए हैं।
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अब सभी जॉब कार्ड बनवाने की दौड़ में शामिल
हरदोई। कई ग्राम पंचायत अफसरों का कहना है कि मनरेगा में जाब कार्ड बनाने को शासन की ओर से ऐसी कोई गाइड लाइन नहीं दी गई, जिसमें कहा गया हो कि संपन्न व्यक्ति के जॉब कार्ड नहीं बनाए जाने हैं, पर गांव आदि से जुड़े संपन्न व्यक्तियों के भी जाब कार्ड बने हैं। उनके द्वारा आवेदन किया जाता है, तो कार्ड बना दिए जाते हैं। इसके बाद वह उन पर काम करते हैं या उन्हें सिर्फ शोपीस बनाकर ही रखते हैं यह कार्डधारक जाने।
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औरतों को घरों से बाहर निकालने में अक्षम अफसर
हरदोई। शासन जहां एक ओर मनरेगा में महिला मजदूरों को बढ़ावा देने को जोर लगा रहा है, तो दूसरी ओर जिले में कोई सार्थक कदम न उठाने से पुरुष व महिला मजदूर मनरेगा से दूर होते जा रहे हैं। वर्ष 12-13 में अब तक महिला के नाम एक लाख कार्य दिवसों को ही सृजित किया जा सका है।
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वर्ष 12-13 के बीच अहिरोरी ब्लाक में 34,289 के कार्ड बने और 5,233 ने काम किया, बावन में 27,704-4158, बेहंदर में 23,278-4175, भरावन में 26,677-4937, भरखनी में 36,004-6495, बिलग्राम में 25,559-5392, हरियावां में 22,239-4283, हरपालपुर में 25,852-5256, कछौना में 18,375-2432, कोथावां में 25,676-5462, माधौगंज में 22,315-2719, मल्लावां में 12,853-2348, पिहानी में 24,937-6314, सांडी में 19,290-5234, संडीला में 24,028-5009, शाहाबाद में 20,354-5940, सुरसा में 29,548-4512, टड़ियावां में 23,037-4539 और टोडरपुर में 24,220 के कार्ड बने और 5607 ने काम किया।
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मजदूर करते रहे मनरेगा से किनारा
वर्ष 09-10 में
जॉब कार्डधारकों की संख्या- 4,23,064
काम मांगने वालों की संख्या-1,80,911
काम से विरत रहने वालों की संख्या-2,42,153
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वर्ष 10-11 में
जॉब कार्डधारकों की संख्या-4,58,731
काम मांगने वालों की संख्या-2,15,647
काम से विरत रहने वालों की संख्या-2,43,084
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वर्ष 11-12 में
जॉब कार्डधारकों की संख्या-4,69,864
काम मांगने वालों की संख्या-2,03,721
काम से विरत रहने वालों की संख्या-2,66,143
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वर्ष 12-13 में
जॉब कार्डधारकों की संख्या-4,66,295
काम मांगने वालों की संख्या-90,065
काम से विरत रहने वालों की संख्या-3,76,230
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बोले, सीडीओ
‘सीडीओ एके द्विवेदी का कहना है कि ऐसा नहीं है कि मजदूर गायब हो रहे हैं, पर जो गायब हैं वह काम ही नहीं करना चाहते, इसलिए काम करने वालों की संख्या कम आ रही है। फिर भी वह तेजी के प्रयास करेगें।’
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