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स्कूलों के निर्माण कार्य में खेल

Hardoi

Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
हरदोई। गांवों में बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत करने को स्कूलों की स्थापना कराई जा रही है, पर जिले में जिम्मेदारों की लापरवाही से दर्जनों स्कूलों की ही नींव नहीं रखी जा सकी है। इन स्कूलों की कब इमारत बनेगी और उनमें कब शिक्षण कार्य होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत बेसिक शिक्षा विभाग में हर वर्ष स्कूलों की इमारतें और अतिरिक्त कक्षा कक्ष आते हैं। इस वर्ष जिले में 303 प्राथमिक व 30 उच्च प्राथमिक स्कूलों के साथ ही 1600 अतिरिक्त कक्षा कक्ष बनाए जाने थे। जिसके लिए शासन स्तर से काफी पहले धनराशि जारी कर दी गई और 31 मार्च तक हर हालत में निर्माण कार्य पूरा करने का फरमान दिया था। मंशा थी जुलाई से इन स्कूलों में शिक्षण कार्य शुरू कर बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत की जाएगी, पर ऐसा नहीं हो सका। जिम्मेदारों की लापरवाही और मनमानी से निर्माण कार्य तो दूर 31 प्राथमिक स्कूलों व एक उच्च प्राथमिक स्कूल को भूमि का चिह्नीकरण तक नहीं हो सका।
15 स्कूलों की पहली किस्त करीब तीन लाख रुपए जारी की गई, पर दूसरी किस्त ही नहीं जारी की गई, जिससे निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। 50 अतिरिक्त कक्षा कक्षों के लिए पहली किस्त एक लाख पांच हजार रुपए जारी कर दिए गए, पर दूसरी किस्त नहीं जारी की गई, जिससे करीब 1100 अतिरिक्त कक्षों का ही निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। शेष का अधर में लटका है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे खेल है, उसी से कार्य लटके हुए हैं। फिलहाल जिले के जिम्मेदारों की लापरवाही से बच्चों की नींव मजबूत होना तो दूर स्कूलों की नींव ही नहीं रखी जा सकी है। उधर, बीएसए मसीहुज्जमा सिद्कीकी का कहना है कि निर्माण कार्य चल रहे हैं। जहां-जहां गड़बड़ी होगी, शीघ्र ही दुरुस्त कराया जाएगा।
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टीचरें पांच, छात्राएं आठ सौ, कैसे पढ़ें
पाली। जीजीआईसी में टीचरों की कमी से छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पढ़ाई बाधित होने से भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कालेज में करीब 800 छात्राएं पढ़ती हैं, पर वर्तमान में टीचरों की संख्या काफी कम है। 800 छात्राओं को शिक्षण कार्य की जिम्मेदारी अब पांच टीचरों के कंधे पर है। विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित आदि विषयाें की कोई प्रवक्ता न होने से छात्राओं को शिक्षण कार्य में परेशानी होती है। छात्रा अनामिका, जूली, पूजा, पूर्णिमा आदि ने बताया कि टीचरों की कमी से एक कक्षा में 100 से 150 छात्राएं एक साथ बैठकर पढ़ती है। छात्रा आरती, सोनी, शोभा, कौशकी आदि ने बताया कि टीचरों की कमी से कोर्स पूरा नहीं हो पाता, जिससे कोर्स पूरा करने को अलग से कोचिंग करनी पड़ती है। प्रधानाचार्या मंजूराव ने बताया कि टीचरों की तैनाती को अफसरों को बता दिया गया है।
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