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जैसी मालियत वैसा शुल्क, सबसे होता ‘पैसा वसूल’

Hardoi

Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
‘रजिस्ट्री कार्यालय बिचौलियों एवं चंद चर्चित चेहरों के इशारों पर चल रहा और रजिस्ट्री कराने के लिए कदम-कदम पर खेल हो रहा है। कृषि भूमि हो या फिर भूखंड, भवन हो या व्यवसायिक प्लाट जिसकी जैसी मालियत निकलती है, उससे उसी हिसाब से सुविधा शुल्क वसूल किया जाता है। जमीन आदि खरीदने वाले लाभार्थी को ही स्टांप शुल्क से लेकर तमाम शुल्क चुकता करने पड़ते हैं, जो लोग यह शुल्क चुकाने से आना कानी करते हैं, उन्हें रजिस्ट्री कराने को घंटोें इंतजार के साथ कई कठिनाइयों से रूबरू होना पड़ता है। सुविधा शुल्क का लगातार खेल चलने से कहीं न कही विभाग की कमजोरी या फिर जानकारी न मिलना भी रहता है, जिससे कर्मियों पर सवाल उठते रहते हैं। जो सुविधा शुल्क देते हैं, उनका रजिस्ट्री कराने का नंबर सबसे पहले आता है, जिससे पूरी व्यवस्था सवालों के कठघरे में खड़ी हो जाती है। ’
हरदोई। रजिस्ट्री कार्यालय में सुविधा शुल्क दे दिया, तो मालियत कम कराकर स्टांप शुल्क की चोरी भी करने की सुविधा है और अगर सुविधा शुल्क नहीं दिया तो सर्किल रेट के चक्रव्यूह में क्रेता को इतना फंसा दिया जाता है कि वो खूद कहता है कि ‘कुछ जुगाड़ बनाकर मालियत और सर्किल रेट कम करा स्टांप शुल्क कम करा दो हम मालियत का आधा प्रतिशत नहीं, एक प्रतिशत सुविधा शुल्क दे देंगे।’
नियमानुसार हर रजिस्ट्री का स्थलीय मौका मुआयना होना चाहिए कि जिस जमीन आदि को बेंचा गया है उसकी मालियत सर्किल रेट के अनुसार सही लगी है और स्टांप शुल्क पूरा दिया गया है, पर ऐसा नहीं किया जाता है। जिनका मौका मुआयना होता है या फिर ऐसे केस जिनकी शिकायतें हो जाती है, उनमें भी खेल हो जाता है, क्योंकि रजिस्ट्री के दौरान किए गए सुविधा शुल्क के खेल को सही साबित करने एवं आगे जारी रखने को ऊपर तक पैठ बना ली जाती है। ज्ञात हो कि शहर स्थित रजिस्ट्री कार्यालय के अलावा तहसील संडीला, शाहाबाद, बिलग्राम एवं सवायजपुर में रजिस्ट्री कार्यालय कार्य कर रहे हैं।
कमोवेश सभी रजिस्ट्री दफ्तरों में बिचौलियों एवं चंद चर्चित चेहरों का दबदबा है, जिससे सुविधा शुल्क का खेल खूब हो रहा है। शहर स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में प्रतिदिन 30 से 40 रजिस्ट्री होने का औसत रहता है। इस लिहाज से यहां क्रेता-विक्रेता सहित गवाहों आदि की भीड़ लगी रहती है। सोमवार को भी प्रात: 11 बजे इसी तरह की भीड़ यहां दिखाई पड़ी और हर रोज की तरह खेल के साथ काम धाम हुआ, जबकि कार्यालय के उपनिबंधक एसपी त्रिपाठी मौजूद नहीं थे। बताया गया कि वे किसी मामले में निरीक्षण पर गए हैं।
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ऐसे होता है सुविधा शुल्क का खेल
हरदोई। जब कोई क्रेता किसी विक्रेता से जमीन भूखंड आदि की खरीद की रजिस्ट्री कराने को कार्यालय आता है, जहां विक्रेता के भूखंड आदि की लोकेशन स्वामित्व एवं मालियत आदि के साथ नक्शा तैयार किया जाता है। अगर मालियत ज्यादा है, तो स्टांप शुल्क ज्यादा देना पड़ता है, ऐसे में मालियत को कम कराने को सुविधा शुल्क का खेल शुरू होता है। मालियत कम करने को भूखंड की कभी-कभी तो लोकेशन ही बदल देते हैं। इसके अलावा अगर भवन हैं, तो उसमें निर्माण स्पेस को कम कर देते हैं और कामर्शियल होने पर उसे दर्शाते नहीं है, जिससे मालियत कम हो जाती है और स्टांप शुल्क कम अदा करना पड़ता है।
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नहीं होती रजिस्ट्रार के समक्ष उपस्थिति
हरदोई। नियमानुसार सभी रजिस्ट्री में क्रेता एवं विक्रेता की रजिस्टार के रूप में कार्य करने वाले उपनिबंधक के सामने उपस्थित होने के साथ लिखे गए बैनामे को पढ़कर सुनाने के बाद दोनों पक्षों के हस्ताक्षर आदि होने चाहिए और विक्रेता से खरीद का पैसा आदि मिलने की पुष्टि के साथ ही रजिस्ट्री सही हाथों से होने की पुष्टि की जानी चाहिए, पर ऐसा नहीं किया जाता और कर्मचारी दोनों पक्षों के आईडी प्रूफ लेकर अफसरों का काम खुद ही निपटाते रहते हैं।
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इन जिम्मेदारों की सुनो---
‘एडीएम राकेश मिश्रा का कहना है कि उनके पास अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है, अगर कोई गड़बड़ी होती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना कार्य एवं सूचना अंकित किए कार्यालय समय में कार्यालय में मौजूद नहीं मिलेगा, तो कार्रवाई होगी।’
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‘सहायक निरीक्षक स्टांप एसके मिश्रा ने कहा कि मालियत कम कराके स्टांप शुल्क कम अदा करने के मामलों की जानकारी होने पर कार्रवाई की जाती है। गत वित्तीय वर्ष में 20 से ज्यादा मामलोें में जुर्माना किया गया था। रजिस्ट्री के बाद मुआयना कराया जाता है और खामियां मिलने पर कार्रवाई होती है।’
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