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सरहद पर तड़पें सपूत, बहनों पर हाथ डालें कपूत

Hardoi

Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
‘इससे शर्मनाक आखिर जिले के लिए और क्या हो सकता कि एक ओर अपने घर परिवार को छोड़ देश की रक्षा को एक जवान सीने पर गोलियां खाने तक से नहीं हिचकता, तो ओर उन्हीं सपूतों के परिवारों की बहू बेटियों की अस्मत पर बेखौफ होकर हाथ डाला जाता है। पीड़ित परिवार को थाने से भी भगा दिया जाता है। सैन्य परिवार एक साल से नहीं, बल्कि दो से लेकर तीन सालों से न्याय को भटक रहे हैं और उपेक्षा की गोलियों से छलनी हो रहे हैं, पर जिले में उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। ऐसे ही दुखों का पहाड़ अपने ऊपर लेकर जीने वाले एक आधे नहीं, बल्कि 33 से ज्यादा परिवार पिछले कई सालों से खून के आंसू बहा रहे हैं।’
हरदोई। जिले में अब तक छह दर्जन से ज्यादा जवान देश की सीमा पर अपने प्राणों की आहुति देकर अपना नाम देश पर मर मिटने वाले शहीदों में दर्ज करा चुके हैं और आज भी दो हजार से ज्यादा जवान देश की सेवा कर रहे हैं, पर उनके परिवार अपने ही देश में किस कदर बेगाने हैं और देश की खाकी से ही न्याय की भीख मांग रहे हैं, इसको देखकर तो हैरानी होना लाजमी है।
ज्ञात हो कि सैनिकों व उनके परिवारों की समस्याओं को सुनने को हर जिले में सैनिक कल्याण पुनर्वास कार्यालय स्थापित होता है। इस जिले में भी है। सेना के जवानों के परिवारों से आनेवाली शिकायतों को उन विभागों में निस्तारण को भेज देता है। जिले से अब तक सैकड़ों शिकायतें इन सैन्य परिवारों द्वारा की गई, पर अभी तक 37 शिकायतें ऐसी हैं जो एक दो साल से लेकर तीन साल तक से लंबित हैं। कहीं किसी जवान के बूढ़े मां बाप देखकर जमीनों पर कब्जा किया जा रहा, तो कहीं अकेेली बहन को देखकर घर में शोहदे घुस रहे हैं, पर परिजनों की शिकायतों के बाद भी उनका पुरसाहाल नहीं लिया जा रहा है।
इंसेट---
केस एक
हवलदार की बहन की अस्मत पर डाला हाथ
हरदोई। मल्लावां के पोस्ट बाबटमऊ के रहने वाले हवलदार का नाम तो हम नहीं बता सकते, पर सैनिक कल्याण बोर्ड व पुलिस विभाग को फरवरी 11 में भेजी गई शिकायत में उसके द्वारा बताया गया कि घर में बूढ़े माता-पिता को देखकर पड़ोस के ही कुछ दबंगों ने बहन की अस्मत पर हाथ डाला, लेकिन शोर मचने के बाद भाग गए। कोतवाली पहुंचे तो बूढ़े मां बाप को भगा दिया गया। उसके बाद वह ड्यूटी छोड़ कर यहां आया। एसपी से मिला, दबाव में रिपोर्ट तो लिखी, पर कार्रवाई नहीं हुई। अब उसके मां बाप को जान से मारने की धमकी मिलने लगी है।
इंसेट
केस दो
भूमि पर कब्जे को मां-बाप पर तानी गई बंदूक
हरदोई। सांडी क्षेत्र के ग्राम कुंदरौली निवासी सुबेदार राजकुमार के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। दिसंबर 11 को पुलिस की मेज से गुजरी उसकी कई शिकायतों का आज तक कोई पुरसाहाल नहीं लिया गया। गांव के कई लोग उसके घर के पास कुआं व जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। मना किया गया तो उस दौरान उसके बूढ़े मां बाप पर बंदूक तान दी गई और गोलियां बरसाने की धमकी दी गई। तब से लेकर आज तक उनका परिवार जान से मारने की धमकी खाता आ रहा है और पुलिस अफसरों की चौखट पर आंसू बहा रहा, पर अपने देश व जिले की ही पुलिस मौन है।
इंसेट
ईसीएचएस सेंटर संचालित, पर दावे फिसड्डी
हरदोई। सैनिकों की चिकित्सा को लेकर ईसीएचएस सेंटर को जिले में स्थापित तो एक बिल्डिंग में अस्थाई रूप से करवा दिया गया, पर पूर्व में किए गए दावे कि एक फोन पर एक एंबुलेंस उनके घर पहुंचेगी और वहां से इस सेंटर में इलाज होगा, लेकिन सेंटर कहां है और कैसा चल रहा है, इसका अंदाजा सैनिक परिवार ही बखूबी दे सकते हैं। सैनिक कल्याण पुनर्वास कार्यालय में किस तरह से संचालित हो रहा कौन-कौन वहां है इस ओर कोई जानकारी नहीं दी है। इससे जिले के चार हजार से ज्यादा भूतपूर्व सैनिक व उनके परिवार ज्यादा ही अपने आप को रोगी महसूस कर रहे हैं।
इंसेट
कैंटीन को लेकर अभी कोई उठा पटक नहीं
हरदोई। सैन्य कैंटीन को लेकर अभी तक जिले में कोई निर्णय निदेशालय नहीं ले सका है। न ही कोई इस ओर जिले के अफसरों को कोई आश्वासन ही दिया जा रहा है। इसको लेकर भी इस जिले के सेना के परिवार उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इस कैंटीन में इन परिवारों को दैनिक उपभोग की वस्तुएं कम दामों में मिल जाती हैं, पर मांग के बाद भी इन परिवारों को कैंटीन का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इंसेट
जनप्रतिनिधियों को नहीं है कोई सरोकार
हरदोई। ऐसा नहीं है कि जिले के माननीयों व विधायकों को सेना के परिवारों पर हो रहे अत्याचारों की भनक तक नहीं है, पर उनसे कोई सरोकार नहीं है। शायद तभी जिले में आठ विधायक, तीन सांसद होने के बाद भी किसी द्वारा इनको न्याय दिलाने का दम नहीं भरा गया। यह बात और है कि जनता के दिलों में पैठ बनाने को शहीद व विजय दिवसों पर दो फूल अर्पित करने पहुंच जाएं।
इंसेट
वर्ष 10 से भटक रहे सैन्य परिवार---
भैलामऊ, लोनार के हवलदार आशीष पाल सिंह का परिवार, बीकापुर, मल्लावां के हवलदार सुनील कुमार, कोतवाली देहात के ग्राम कौढ़ा निवासी सीएफएन ज्ञान प्रकाश वर्मा, आजाद नगर के नायक सुनील कुमार, पुरवा बाजीराव बेनीगंज के राज किशोर, अकबरपुर, मल्लावां के केवी यादव, तेरवा, बघौली के नायब सुबेदार तेजा राम, सुहागपुर, शाहाबाद के स्वर्गीय कप्तान सिंह क ा परिवार, ग्राम दौलतपुर लोनार के सिपाही कौशल किशोर, ग्राम बरौली बघौली के पूर्व सैनिक ओम प्रकाश, ग्राम अंटवा कोतवाली देहात के देवेश अवस्थी, ग्राम शेखपुर, थाना अरवल के लांस नायक संजीव कुमार पाठक, ग्राम कुंदपुरा दहेलिया अरवल निवासी हवलदार राजेंद्र सिंह, ग्राम इटोरिया लोनार के लांस नायक गुरू प्रसाद, ग्राम बूढांगांव पिहानी के कप्तान सिंह, ग्राम कन्हारी अमिरता निवासी धीरेंद्र प्रताप सिंह, ग्राम आटदानपुर बेहटागोकुल के हवलदार संतोष कुमार, टंडवा चतुरपुर मंझिला निवासी हवलदार राकेश कुमार पांडे, सरायनायक मझिला के हवलदार क्लर्क मिथलेश कुमार का परिवार।
इंसेट---
वर्ष 2011 से पीड़ित सैन्य परिवार---
लुकमान खेड़ा संडीला के लांस नायक आदित्य प्रकाश का परिवार, बड़ा गांव हरपालपुर निवासी हवलदार जय प्रकाश, सुमई कुरसेली हरियावां के सिपाही उमेश चंद्र, महोलिया शिवपार कोतवाली शहर के सिपाही रामबली, बेहटा हरी हरपालपुर के गनर कलाकांत दीक्षित, रामरूपअधिकन लोनार के सिपाही अमित कुमार सिंह, कोढ़वा बघौली के सीएफएन आशीष, बूढागांव पिहानी के बृजपाल, शिवराजपुर लोनार के सूबेदार श्योवीर सिंह, सांडी के कुंदरौली के सुबेदार राजकुमार, तेजीपुर मल्लावां के सिपाही संदीप कुमार का परिवार।
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‘अफसरानों के सामने भी उठाते हैं मामला’
‘जिला सैनिक कल्याण पुनर्वास कल्याण अधिकारी कर्नल एचल कौशल का कहना है कि वह इन शिकायतों को एसपी दफ्तर भिजवाते हैं। सैनिक बंधु की बैठक में भी उठाया जाता है, पर इसके बाद भी मामले दो से तीन साल पुराने पड़े हैं, तो वह एक बार फिर से डीएम को अवगत कराएंगे।’
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