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40 हजार ‘दिल’ जिले में ‘सुलग’ रहे

Hardoi

Updated Wed, 25 Jul 2012 12:00 PM IST
‘जिले में प्रति वर्ष आठ करोड़ रुपए के ‘धुएं’ से 40 हजार ‘दिल’ सुलग रहे हैं, तो गलत न होगा। डॉक्टरों का कहना है कि सिगरेट पीने वालों को हृदय रोग होने का खतरा होने की काफी संभावना रहती है। धूम्रपान का असर न केवल हृदय में होता है, बल्कि मस्तिष्क की धमनियों एवं अन्य धमनियों में भी दिखाई देता है, जिससे केवल हृदय रोग ही नहीं, बल्कि स्ट्रोक एवं अन्य रोगों का भी खतरा बढ़ जाता है। जिले में सर्वे के मुताबिक सिर्फ सिगरेट का ही धंधा एक वर्ष में आठ करोड़ के ऊपर पहुंच रहा है। निकोटीन जैसे पदार्थ का मुख्य असर शरीर में दो हारमोन एड्रीनेलीन एवं नार एड्रीनेलीन को बढ़ावा देना है, जिससे हृदय की गति बढ़ जाती है और रक्तचाप भी बढ़ता है।’
हरदोई। जिला अस्पताल का हृदय रोग विभाग इन दिनों चर्चा में हैं। अपनी कमियों से नहीं, बल्कि लगातार बढ़ रहे रोगियों के संख्या से। डॉक्टरों की माने तो यहां पहुंचने वाले रोगियों में धूम्रपान से हृदय रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। जिले में जिस तरह धूम्रपान का धंधा पनप रहा है, उसी तरह हृदय रोगियों की संख्या भी बढ़ी है।
डॉक्टरों का कहना है कि सिगरेट पीने वालों को हृदय रोग होने का खतरा होने की काफी संभावना रहती है। जिले में एक सर्वे के मुताबिक सिर्फ सिगरेट का ही धंधा एक वर्ष में आठ करोड़ के ऊपर पहुंच रहा है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. विष्णु कुमार का कहना है कि आने वाले हृदय रोगियों में 30 फीसदी रोगी धूम्रपान से ही बनते हैं। अस्पताल में रोजाना 130 से 150 रोगी पहुंच रहे हैं। अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों में भी हृदय रोगियों का आना जाना लगा रहता है। जिले में हृदय रोगियों की संख्या 40 हजार से ज्यादा निकल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि सिगरेट से निकलने वाले धुएं में करीब 4000 पदार्थ होेते हैं।
जिनमें निकोटीन, कार्बन मोनोआक्साइड, अमोनिया, बेंजीन, नाइट्रोबेंजीन, फिनाल, हाइड्रोजन साइनाइड, टूलीन जैसे जहरीले पदार्थ होते हैं। निकोटीन का असर रक्त में संचारित प्लेटलेट कोशिकाओं पर भी होता है, जो शरीर में क्लाट बनाती हैं, जिससे रक्त के बहाव में अवरोध होने से हार्ट अटैक हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि सिगरेट न पीने वाले पर धुएं के संपर्क में लगातार रहने से भी हृदय रोग का खतरा बना रहता है। जितनी लंबी अवधि से व्यक्ति सिगरेट पीता चला आ रहा है, उतनी ही हृदय घात होने की संभावनाएं ज्यादा रहती है। जैसे-जैसे व्यक्ति सिगरेट छोड़ देता है, हृदय रोग होने का खतरा कम होने लगता है।
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‘युवा वर्ग होता जा रहा रोगी’
‘चिकित्सक कमलजीत अजवानी का कहना है कि तंबाकू से होने वाले सेवन में देखने में आया कि युवा वर्ग काफी आकर्षित हो रहा है। इससे गले व मुंह का कैंसर तीव्र गति से हो रहा है। मुंह में छाले पड़ रहे हैं। तंबाकू के ज्यादा सेवन के बाद रोगों के लक्षणों में यह भी देखा जाता कि मुंह में छाले पड़ जाते है या फिर मुंह सिकुड़ जाता है। इसे ओरल फाइब्रोसिस कहते हैं।’
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पैसिव स्मोकिंग से महिलाएं भी ‘शिकार’
‘तंबाकू और धुएं के छल्ले पर डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लोगों को जो रोग हो रहा, उसे पैसिव स्मोकिंग का नाम दिया गया है। इन लोगों में वह लोग आते हैं, जिनके आस पास सिगरेट आदि निरंतर पी जा रही है और विवश होकर उनको भी इसका धुआं अपने अंदर ले जाना पड़ रहा है। अधिकांश घरेलू महिलाएं या फिर खुद तंबाकू व सिगरेट आदि की बिक्री करने वाले हो जाया करते हैं। बिना धूम्रपान किए ही महिलाओं का इसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है।’
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जीन से होता धूम्रपान करने का मन
‘डॉक्टरों के मुताबिक वाईपी 2 ए 6 नामक जीन व्यक्ति को धूम्रपान करने को प्रेरित करता है। तीन प्रकार के जीन में डेल नामक जीन सबसे कम सक्रिय होता है। इसको छोड़ना भी मुश्किल होता है और यही जीन खून में निकोटीन का स्तर उच्च बना रहा है। एक सिगरेट पीने वाले व्यक्ति की उम्र पांच मिनट कम हो जाती है।’
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‘81 करोड़ के नशे भी हैं जिले में मौजूद’
‘एक माह में औसतन जिले के पियक्कड़ इन्हीं दुकानों से दो लाख 50 हजार 910 लीटर देसी, 27 हजार 362 अंग्रेजी व 57 हजार 448 बोतले बियर की 30 दिनों में गटक जाते हैं। यानी माह में करोड़ों की शराब की पी जाती है। आबकारी विभाग इसी नशे से शहर से सालाना 81 करोड़ का राजस्व हर साल तो वसूलता है।’
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यह तत्व हैं, जो बना रहे रोगी---
निकोटिन-कैंसर, उक्त रक्तचाप, कार्बन मोनोक्साइड-हार्ट, दमा व अंधापन, मार्श गैस-शक्तिहीनता व नपुंसकता, अमोनिया-पाचन शक्तिमंद, पित्ताशय विकृत, कोलोडान-स्नायु दुर्बलता, सिरदर्द, पापरीडिन-आंखों में खुश्की, अजीर्ण, कोबोलिक-एसिड अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, परफेरोल-पीले, कमजोर व मैले दांत, फास्फोरस प्रोटिक अम्ल-टीवी व थकान।
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कुछ ऐसे हो रहा कारोबार---
सिगरेट का औसतन कारोबार-3-4 करोड़ रुपए, गुटखा की हो रही खरीद फरोख्त-2-2.5 करोड़, अफीम, चरस, कोकीन, गांजा-1-1.5 करोड़, नशीले इंजेक्शन, डाइजापाम आदि।
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30 फीसदी धूम्रपान के शौकीन रोगी--
युवा वर्ग-13-15 फीसदी, महिलाएं-5-7 फीसदी, 30 वर्ष से ऊपर-10 फीसदी।
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