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बाढ़ आई तो क्या करेंगे जनाब!

Hardoi

Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
बाढ़ आई तो फिर मचेगी कटियारी क्षेत्र में तबाही
वर्ष 10 की बाढ़ की भयावता से सिहर जाते लोग
एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसलें हुईं थी नष्ट
सौ से ज्यादा सड़कों को पहुंचा था भारी नुकसान
सैकड़ों मकान, झुग्गी झोपड़ियां समा गई थी बाढ़ में
लगभग एक अरब की संपत्ति का हुआ था नुकसान
‘लगभग हर साल पंच नदियों गंगा, रामगंगा (कुंडा), गंभीरी, नीलम व गर्रा से घिरा सवायजपुर तहसील का अधिकांश हिस्सा बाढ़ की चपेट में आता है, जिससे करीब 1100 गांवों व मजरों मेें रहने वाली 3 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित होती है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 10 में आई भयावह बाढ़ में कुल 78,105 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल में 62,840 बोई गई फसलों मेें 49,987 हेक्टेयर फसलें चौपट हो गई थीं और 12,178 मकान धराशायी हो गए थे। दो दर्जन डामर की सड़कें कटने के साथ 6 अरब रुपए का नुकसान हुआ था और 14 लोगों की मौत तथा 13 पशु भी बाढ़ की चपेट में आकर मर गए थे। इसके एवज में प्रशासन ने 13 करोड़ रुपए की मदद बाढ़ पीड़ितों को दी गई थी।’
हरदोई/हरपालपुर। जिले में अभी बाढ़ के हालात नहीं हैं और न ही लोग इस ओर अभी सोच रहे हैं, फिर भी अगर यहां बाढ़ आती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान पांच नदियों से घिरे पंचनद कटियारी क्षेत्र को होगा। वैसे तो पिछले साल बाढ़ में भी इस क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा था, पर वर्ष 10 में आई बाढ़ काफी भयावह थी।
एक पखवाड़े से ज्यादा समय तक रही बाढ़ से एक अरब से ज्यादा संपत्तियों का नुकसान हुआ था तथा सैकड़ों लोग बेघर होकर खाने को दाने-दाने का मोहताज हुए थे। बाढ़ के मंजर को याद कर आज भी लोग सिहर उठते हैं, मगर इस बाढ़ के बाद प्रशासन ने कोई खास सबक नहीं लिया है। खासतौर से संसाधनों को जुटाने के मामले में प्रशासन के हाथ खाली हैं और वही एक स्टीमर, नावों और डोगा के सहारे इस साल की संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियां हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने पिछली बाढ़ के अनुभवों के मद्देनजर सबसे ज्यादा तैयारियां सतर्कता बरतने एवं बचाव कार्यों के लिए सेना एवं पीएसी के मदद पर केंद्रित किया है, ताकि किसी प्रकार के कठिन से कठिन हालात बनने पर उनसे निपटा जा सके।
इस लिहाज से प्रशासन की सतर्कता काफी तेज है, मगर संसाधन जुटाने के नाम पर कोई खास चीज नजर नहीं आ रही है। ज्ञात हो कि भीषण बाढ़ आने पर सबसे ज्यादा सवायजपुर और बिलग्राम तहसील क्षेत्र के गांव प्रभावित होते हैं और हरदोई सदर तहसील तथा शाहाबाद तहसील क्षेत्र आंशिक रूप से प्रभावित होते हैं। चार सौ से ज्यादा गांव व मजरें और चार लाख से ज्यादा आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है। इनमें भी सबसे ज्यादा गांव सांडी, हरपालपुर, बिलग्राम, मल्लावां, माधौगंज ब्लाक क्षेत्र के प्रभावित होते हैं। कटियारी क्षेत्र में गर्रा, गंगा, गंभीरी, रामगंगा, नीलम नदियों से प्रभावित होता है।
इस बार भी अगर भीषण बाढ़ आती है, तो प्रशासन के सामने बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले गांवों एवं मजरों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती होगी। वर्ष 10 की बाढ़ इतनी भयावह थी कि सेना को भी बुलाना पड़ा था। उधर, हरपालपुर क्षेत्र में रामगंगा नदी तकरीबन हर वर्ष कहर बरपाते हुए सैकड़ों मकानों को अपनी धारा में समां ले जाती है। नदी की हर साल धारा बदलने से हजारों हेक्टेयर जमीन भी कटकर नदी के आगोश मेें समां जाती है, जिससे बड़ी संख्या मेें किसान भूमिहीन हो रहे हैं।
इंसेट---
सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
बारामऊ, ढकपुरा, मुरवा शहाबुद्दीनपुर, आलमपुर, अरबल, चंद्रमपुर, दहेलिया, कटरी छोछपुर, नोनखारा, बेडीजोर, बेहथर, बेहटालाखी, बेहटा मुडिया आदि गांव।
रामगंगा नदी की धारा के निशाने पर
गोरिया, बड़ागांव, मलिकापुर, बारी, बरान, सुरजनापुर, बाराम, बेहथर, मलिकापुर, नंदना आदि समेत एक दर्जन से ज्यादा गांव।
इंसेट---
दावे भी दावों तक सीमित रहे
हरपालपुर। शासन प्रशासन के अलावा जनप्रतिनिधियों ने सिर्फ हवाई व कागजी वादे तो किए, पर हकीकत मेें कुछ नहीं किया। वर्ष 98 में आई प्रलंयकारी बाढ़ के बाद तत्कालीन एसडीएम ने कई प्रस्ताव भेजे थे, जिनमें क्षेत्र के हरपालपुर पलिया व खसौरा में बाढ़ शरणालय, एक स्टीमर, 50 जीवन रक्षक जैकेट की मांग की गई थी, जो आज तक मुहैया नहीं कराए गए। बीते वर्ष की बाढ़ के दौरान बसपा एमएलसी अब्दुल हन्नान ने स्टीमर खरीदने को एक लाख रुपए अपनी निधि से देने से की घोषणा की थी। क्षेत्रीय विधायक रजनी तिवारी, शाहाबाद के विधायक बाबू खां, सांसद ऊषा वर्मा ने भी स्टीमर खरीदने को अपनी निधि से धन देने की घोषणा की थी, पर यह घोषणाएं सिर्फ कोरी साबित हुईं।
इंसेट---
‘हर स्तर पर होगा सजगता से कार्य’
‘एडीएम राकेश मिश्र ने कहा कि बैठक कर आवश्यक तैयारियां की जा चुकी है। बाढ़ आने पर पूरी सजगता के साथ कार्य किया जाएगा और हर स्तर पर लोगों की मदद की जाएगी। बाढ़ चौकियों की स्थापना के साथ ही कर्मियों की तैनाती से लेकर जरूरी व्यवस्थाएं हैं।’
इंसेट---
प्रशासन की बाढ़ से निपटने की तैयारियां---
40 बाढ़ चौकियों का गठन कर कर्मचारियों की तैनाती
बाढ़ चौकियों तक पहुंचने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं
उपलब्ध नाव और एवं डोगा आदि का दुरस्तीकरण कार्य
नाविकों की सूची तैयार करने के साथ कंट्रोल रूम बना
सभी तहसीलों के अधिकारियों को भी सजग किया गया
बाढ़ संबंधी सूचनाओं को पल-पल पर अपडेट करना
राहत शिविरों एवं केंद्रों के लिए सुरक्षित स्थानों का चयन
जरूरत पड़ने पर पीएसी एवं सेना को बुलाने की तैयारियां
खाद्यान्न सामग्री सहित आवश्यक चीजों की उपलब्धता
पशुओं आदि के लिए चारे सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाएं
---
कटियारी में बाढ़ की तबाही का संकट
हरपालपुर। लगभग हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलने वाले कटियारी क्षेत्र के बाशिंदों पर एक बार फिर बाढ़ की तबाही के बादल छाने लगे हैं। बाढ़ से बचाव व रामगंगा नदी से होने कटान को स्थायी रूप से रोकने को विस चुनावोें में नेताओं ने लंबे चौड़े वादे तो किए, पर सारे वादे हवाई साबित हुए। बाढ़ से निपटने को की गई सारी तैयारियां कागजों तक सिमट कर रह गई। यदि अबकी बाढ़ आई तो फिर हजारों लोग बेघर होने को मजबूर होंगे। वहीं वर्ष 11 में 40 हजार हेक्टेयर फसले ंचौपट हुई थीं और 3500 मकान बाढ़ मेें समां गए थे। पांच जनहानि के साथ आधा दर्जन पशुओं की मौतेें हुई थी। प्रशासन के मुताबिक सवा करोड़ की नुकसान का आकलन किया गया था, जबकि हकीकत मेें नुकसान का आंकड़ा इससे तीन गुना ज्यादा था। प्रशासन की ओर से 5.80 करोड़ रुपए बाढ़ राहत के नाम पर बांटा गया। इनमेें सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों की चेकाें का अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है। हजारों लोग बाढ़ में सब कुछ गवांने के बाद भी बाढ़ राहत पाने को तरस रहे हैं। बड़ी संख्या में चेकें आई भी तो वह तहसील के दैवीय आपदा विभाग मेें धूल चाट रही हैं।
इंसेट---
विगत वर्षों में आई बाढ़ की स्थिति
वर्ष जलस्तर (मीटर में) कितने दिन बाढ़ रही
1998 137.06 15
2000 137.00 15
2003 135.00 07
2008 137.00 07
2009 137.00 04
2010 138.00 45
2011 137.50 10
--------
उच्च बाढ़ स्तर
गंगा-136.60, खतरनाक-137.60, रामगंगा-136.60 और खतरनाक-137.60।
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