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जब भोले की याद आए, सुनासीरनाथ आएं

Hardoi

Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
मल्लावां। 16वीं शताब्दी में भारतीय संस्कृति को नेस्तनाबूद करने की दिशा में औरंगजेब की बर्बरता का शिकार बना प्रसिद्ध सुनासीर नाथ मंदिर पिछले पांच वर्षों से सुंदरीकरण की ओर अग्रसर है, पर भूमाफियाओं द्वारा मंदिर की जमीन पर कब्जे से 70 बीघे का मंदिर आज 17 बीघे में ही सिमट कर रहा गया।
मल्लावां से कन्नौज मार्ग पर 4 किमी दक्षिण स्थित देवराज इंद्र द्वारा स्थापित सुनासीर नाथ मंदिर आज भी मुगल बादशाह औरंगजेब की बर्बरता की कहानी बयां कर रहा है। 16वीं शताब्दी के अंत में पिता शाहजहां को कैदखाने मेें डालने के बाद बादशाह बना औरंगजेब फौज और तलवार के दम पर तमाम मंदिरों को ध्वस्त करते, लूटते और हिंदुओं को मुसलमान बनाते गंगा की इस तराई में आ पहुंचा। देवराज इंद्र द्वारा स्थापित स्वर्णजणित सुनासीर मंदिर को अपनी धन लोलुपता का शिकार बनाने को बादशाह को उस समय भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। उस समय गौराखेड़ा के शूरवीर औरंगजेब के सेना पर तलवारें ेकर टूट पड़ें थे, जिसमें खूनी संघर्ष हुआ और सैकड़ों लोगों की जानें चली गई।
सीमित संसाधनों से क्षत्रियों को पराजित होना पड़ा। इसके बाद मंदिर के पास पहुंची आक्रांता की फौज का मुकाबला सुनासीर नाथ मढ़ियों के गोस्वामियों ने किया, पर वो भी हार गए। जीत के बाद बादशाह ने पहले मंदिर में स्थापित करीब दो कुंतल वजन का सोने का कलश उतरवाया और फर्श में लगी गिन्नियां व सोने के घंटे लूटकर मंदिर ध्वस्त करा दिया। इसके बाद शिवलिंग को आरे से काटने का प्रयास किया, जिसमें दैवीय प्रकोप से असंख्य बर्र व ततैयों ने फौज पर हमला बोल दिया। इसके बाद आक्रांता भाग निकला। तभी से शुक्लापुर शुक रौला के नाम से जाना जाता है। कटा हुआ शिवलिंग आज भी देखा जा सकता है। कालांतर मेें इस ध्वस्त प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण भगवंतनगर के मिश्र परिवार की श्रद्धालु महिला जशोदादेवी द्वारा शुरू कराया गया था।
बुजुर्गों का कहना है कि पूर्व में 70 बीघा क्षेत्रफल में फैले मंदिर की जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करने से मंदिर अब 17 बीघा में सिमट कर रह गया है। 18 वर्ष पहले सोने के पानी का चढ़ा कलश 11 वर्ष पहले चोर उतार ले गए थे, जिसे पुलिस ने बरामद किया और पुन: चढ़ाया गया, जो बाद में फिर चोरी हो गया। पुनर्निर्माण समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण, उपाध्यक्ष ज्ञान सिंह, कोषाध्यक्ष राधेमोहन गुप्ता, उप कोषाध्यक्ष रामपाल आदि कहते हैं कि दो माह पूर्व मंदिर परिसर में दुर्गा माता की मूूर्ति की स्थापना की गई थी और पहले से बनी हनुमानजी की मूर्ति को बदलकर विशालकाय मूर्ति की स्थापना की जाएगी। इनका कहना है कि इन स्थल को पर्यटन स्थल घोषित किया जाए।
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