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साढ़े ग्यारह हजार बच्चों की पढ़ाई पर लगा ग्रहण

Hardoi

Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
हरदोई। सब पढ़ें, सब बढ़ें। सरकार शायद इस नेक इरादे को अमली जामा पहनाने के लिए निजी स्कूलों में भी गरीब बच्चों की पढ़ाई का खाका तैयार किया, लेकिन सरकार की तरफ से कोई गाइड लाइन न आने से निजी स्कूलों में इस सत्र में इन गरीब बच्चों के प्रवेश पर रोक लगा दी। यही नहीं स्कूल प्रबंध तंत्र का साफ कहना है कि बीच सत्र में अब तो प्रवेश करना संभव न हो पाएगा। लचर कार्यप्रणाली ने एक बार फिर प्रदेश में लाखों तो महज इस जिले में ही 11516 गरीब बच्चों का भविष्य बनने में रोड़ा लगा दिया। स्कूल प्रबंध तंत्र का साफ कहना है कि बीच सत्र में अब तो प्रवेश करना संभव न हो पाएगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई में प्रयास काफी सराहनीय था। गरीब बच्चों को अमीर बच्चों के साथ पढ़ने का मौका मिल जाता। शहर के एक भी कान्वेंट व पब्लिक स्कूल में गरीब बच्चों का दाखिला नहीं हो सका है और इस सत्र में होने की उम्मीद भी न के बराबर है। स्कूल संचालक प्रदेश सरकार की गाइड लाइन का इंतजार ही करते रह गए और उसके बाद उनके द्वारा सीटों के सापेक्ष सभी प्रवेश कर लिए गए। जानकारी के मुताबिक अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कान्वेंट व पब्लिक स्कूलों में बच्चों को दाखिले के आदेश दिए थे। पढ़ाई व कापी किताबों का पूरा खर्चा स्कूल प्रशासन को उठाना था। कोर्ट के आदेश से गरीब बच्चों को आस जागी थी कि वह नामचीन स्कूलों में पढ़ सकेगें। बीएसए व डीआईओएस ने इस बाबत स्कूलों व उनके बच्चों की संभावित संख्या को भी मांगा था। जिसके तहत मिली जानकारी के हिसाब से ऐसे स्कूलों की संख्या 1150 बताई गई तथा इनमें प्रवेश के लिए 11516 बच्चे प्रवेश के लिए संभावित बताए गए। लेकिन इस ओर कोई गाइड ला इन जारी नहीं की जा सकी। बताया गया कि इस ओर कोई गाइड लाइन कान्वेंट व प्राइवेट स्कूलों को नहीं भेजे गए और न ही इन विद्यालय प्रबंधन ने कोई इस ओर रुचि दिखाई। जिसके बाद गरीबों के हक की 25 प्रतिशत सीटें भी अमीर अभिभावकों के बच्चों के ही खातों में चली गई। इस बाबत जब स्कूलों के प्रबंध तंत्रों के जिम्मेदारों से बात की गई तो उनका स्पष्ट तौर पर कहना था कि नियमों का पालन करना उनकी प्रथम जिम्मेदारी है। यदि निर्देश दिए गए तो उनका पालन होगा यह नियम सिर्फ उन्हे अब तक सुनने व पढ़ने को ह ी मिले हैं निर्देशों पर अमल करने के लिए उनके विद्यालय में कोई भी निर्देश या गा इड लाइन नहीं दी गई है। जिससे प्रवेश नहीं किया जा सका।
इंसेट
दाखिला न मिले तो करें शिकायत
हरदोई। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता बलवीर शास्त्री का कहना है कि इन निर्देशों से सभी कान्वेंट व निजी स्कूल भली भांति परिचित है। बीपीएल कार्ड धारक अभिभावक संबंधित विद्यालयों में बच्चे का प्रवेश कराने जाए यदि इनके प्रवेश पर विद्यालय प्रबंधन द्वारा आपत्ति की जाए तो बीएसए कार्यालय आकर इसकी शिकायत करें।

इंसेट
बस्ते के बोझ से रो रहे पापा
हरदोई। महंगाई जो न कराए वह सब कम है। नए सत्र में नए नवेले बस्तों के साथ जहां बच्चों का मन काफी उतावला हो रहा है और वह दुकानों पर तरह तरह के बैग लेने के लिए अभिभावकों से जिद कर रहे हैं वहीं अभिभावक इन बैगों का मूल्य पूछकर रोने को मजबूर हो रहे हैं। बस्तों का मूल्य पिछले सत्रों क ी अपेक्षा डेढ़ गुने से दो गुना हो गया है। जिनको खरीदने में अभिभावकों को पसीना आ रहा है।
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