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रेत में बन रहीं स्कूल की इमारतें!

Hardoi

Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
हरदोई। बेसिक शिक्षा विभाग में रेत के टीलों पर स्कूलों की इमारतें बनवाई जा रही हैं! यह हम नहीं, निर्माण कार्य के हालात कह रहे हैं। स्कूलों के निर्माण कार्य वर्ष 09 के स्टीमेट पर करवाए जा रहे हैं। निर्माण सामग्री की कीमत दो गुनी हो गई, पर भवन निर्माण की लागत तीन वर्ष पुरानी ही है और ऊपर से कमीनशनबाजी अलग। ऐसे हालात में स्कूलों की इमारतों की गुणवत्ता कैसी होगी, समझ सकते हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में हर साल सैकड़ों निर्माण कार्य करवाए जाते हैं। विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की लागत में वर्ष 06 में संशोधन कर प्राथमिक स्कूल की लागत दो लाख 64 हजार, उच्च प्राथमिक स्कूल की पांच लाख 15 हजार व अतिरिक्त कक्षा-कक्ष की लागत एक लाख 40 हजार कर दी गई थी। वर्ष 09 में शासनादेश में संशोधन किया गया था, जिसमें प्राथमिक स्कूल की लागत तीन लाख 87 हजार, उच्च प्राथमिक की 7 लाख 49 हजार व अतिरिक्त कक्षा-कक्ष की लागत दो लाख एक हजार कर दी गई और इसी पर वर्ष 10, 11 और अब वर्तमान में स्कूलों में निर्माण कार्य करवाए जा रहे हैं।
जिले में वर्तमान में हो रहे निर्माण कार्यों में अगर देखें, तो 1600 अतिरिक्त कक्षा-कक्ष और 330 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों का निर्माण कार्य चल रहा है। वर्ष 09 अब तक तीन वर्ष में निर्माण सामग्री की कीमत जमीन से आसमान पर पहुंच गई है, पर लागत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। प्रधान व प्रधानाध्यापक के संयुक्त खातों से करवाए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता कैसी होगी यह कीमतों में अंतर ही बता रहा है। बची कसर निर्माण कार्य में हो रही कमीशनबाजी खोल रही है। जानकारों का कहना है कि निर्माण कार्य में हो रहे खेल में रेत के टीलों पर स्कूलों की इमारतें बनवाई जा रही है! और इन्हीं स्कूलों की इमारतों के नीचेे बच्चों को बैठना है।
उधर, स्कूलों की निर्माण कार्य की लागत में जमीन आसमान का अंतर तो है ही। गुणवत्ता परखने को जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनका भी शोषण किया जाता है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत निर्माण कार्य के परीक्षण की जिम्मेदारी के लिए जेई को तैनात किया गया है। विकास खंडों पर संविदा पर तैनात जेई को भी सात हजार रुपए प्रति माह मानदेय दिया जाता है।
उधर, तीन साल में निर्माण सामग्री की कीमतों में वर्ष 09 में ईंट की कीमत 2000-2500 थी, जो वर्ष 12 में 4000-4500 पहुंच गई, जबकि सीमेंट 175 से 305 रुपए प्रति बोरी, मौरंग 2000 प्रति ट्राली से 6000, बालू 400-500 रुपए प्रति ट्रॉली से 2000 रुपए, सरिया 28 रुपए प्रति किलो से 50 रुपए, मजदूरी 50 से 150 रुपए प्रतिदिन और राज मिस्त्री की मजदूरी 100 रुपए से 300 रुपए प्रतिदिन हो गई है।
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