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आयोग के डंडे के आगे प्रचार ‘ठंडा’

Hardoi

Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
हरदोई। अब वह दिन लद गए या गुजरे जमाने की फेहरिस्त मेें शामिल हो गए, जिसमें चुनाव आते ही गलियां तो गलियां चौबारे तक नेताओं के बैनरों व पोस्टरों से पटे नजर आते थे। दीवारें वाल पेंटिंग से पटी रहती थी, तो दरवाजे पोस्टरों से ही आने जाने वालों को दावेदारों के दावों से परिचित कराते रहते थे , पर अब समय बदल चुका है। आयोग के नियमों के डंडे के आगे निकाय चुनाव का प्रचार बेबस है तो वहीं प्रचार सामग्री का बाजार फिलहाल ठंडा ही पड़ा है।
निकाय चुनाव के तहत नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। नामांकन पत्रों की जांच भी हो चुकी है। अब नाम वापसी बची है। बहरहाल नामांकन के बाद अब प्रत्याशी अपने क्षेत्रों के वोटरों की कुंडी को खटखटाने के बाद रामजुहार करने लगे हैं और हाथ पैर जोड़कर अपने आप को जिताने को लोगों की राय अपने पक्ष में करने का पूरा जतन करने लगे हैं, पर इसके बाद भी प्रत्याशी विस चुनाव की भांति ही वोटरों के बीच जाकर भी न तो प्रचार सामग्री का वितरण कर पा रहे हैं और न ही गलियों और दीवारों को ही अपने बैनरों व पोस्टरों से पाट पा रहे हैं। दावेदारों का कहना है कि प्रचार में एक दो दर्जन कार्यकर्ताओं को यही जिम्मेदारी दी जाती थी।
प्रचार में एक-दो दर्जन कार्यकर्ता हाथ में स्टीकर या पेपर, हैंडबिल व विजिटिंग कार्ड देक र दरवाजे पर दस्तक देते थे। उनका कहना है कि अब तो घर-घर जाकर अपना नाम बताना भी बड़ी बात है। आयोग के कड़े नियमों के आगे वह क्या सारे प्रत्याशी बेबस हैं। पहले जहां दावेदार व उनके समर्थक घरों में जाकर गलियों व मोहल्लों को बैनर व पोस्टरों से पाट देते थे, पर अब ऐसा नहीं है। पोस्टर बैनर के अलावा कोई भी प्रचार वाली सामग्री का प्रयोग कर पाना मुश्किल हो गया है। इधर, प्रचार सामग्री के व्यापार से जुड़े कारोबारी भी इस चिंता में हैं कि अगर सख्ती कुछ और बढ़ी तो यह व्यापार बंद हो जाएगा।
उनका कहना है कि आयोग द्वारा व्यय की निगरानी व बिना अनुमति झंडे पोस्टर लगाने पर प्रतिबंध लगानेे से आय कम हो गई है। उनका कहना है कि इस बार भी उन्हें संभावना ही नहीं यकीन है कि प्रचार सामग्री का काम ठंडे बस्ते में चला गया है। उनका कहना है कि कांग्रेस व भाजपा को छोड़ कोई अन्य दल प्रत्याशी नहीं उतार रहा है। चूंकि, व्यय को लेकर टीमें गठित कर दी गई है, इसलिए छोटी-छोटी सामग्रियों पर ही नजर रखी जाएगी, इसलिए दावेदार भी डर रहे हैं।
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