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जागरूकता के बाद भी हर साल बढ़ रहे रोगी

Hardoi

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
हरदोई। जिले में एड्स से बचाव के लिए जागरूकता को तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद हर साल नए रोगी सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में एड्स की जांच को बाकायदा एक यूनिट संचालित है। जो अपनी तरह से इस बीमारी से लड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। 2005 में जिले में पांच रोगी मिले थे। वर्ष 2012 में इनकी तादाद बढ़कर 108 हो गई है।
एचआईवी (ह्यूमन इम्यून डिफिंसिएंसी वाइरस), (एक्वायर्ड इम्यून डिफिसिएंसी सिंड्रोम) एड्स का प्रमुख कारण है। एचआईवी पाजिटिव रोगी को एड्स रोगी नहीं कहा जा सकता लेकिन एचआईवी संक्रमण की अंतिम अवस्था एड्स है। एचआईवी वाइरस शरीर में प्रवेश कर सीडी चार सेल्स पर हमला करता है और सेल्स का विनाश करना शुरू कर देता है। आम तौर पर एक स्वस्थ्य व्यक्ति के शरीर में 500 से 100 सीडी चार सेल पाई जाती हैं। वाइरस के हमले से धीरे धीरे सीडी 4 सेल्स की संख्या समाप्त हो जाती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है जिससे पीड़ित साधारण बीमारी का भी सामना नहीं कर पाता और छोटी से छोटी बीमारी के साथ ही डायरिया, बुखार, खांसी, टीबी, निमोनिया आदि एड्स पीड़ित के लिए जानलेवा हो जाती है।
वर्ष 2005 में जिले में पांच एचआईवी पाजिटिव रोगी मिले थे। जिला अस्पताल स्थित एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2005 से नवंबर 2012 तक जिले में एचआईवी पाजिटिव रोगियों की संख्या 108 पर पहुंच गई। वर्ष 2010 में यह संख्या 11 थी जिसमें नौ पुरुष व दो महिलाएं एचआईवी पाजिटिव पाई गईं। वर्ष 2011 में इनकी संख्या 12 रही । वर्ष 2012 में नवंबर तक 32 मरीज एचआईवी पाजिटिव पाए गए हैं जिसमें 22 पुरुष व 12 महिलाएं शामिल हैं। इसी तरह जिला महिला अस्पताल के एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र में वर्ष 2008 में एक गर्भवती महिला एचआईवी पाजिटिव मिली थी। वर्ष 2009 में एक सामान्य महिला पाजिटिव पाई गई लेकिन वर्ष 2010 में रिकार्ड क ई गुना बढ़ गया और संख्या 10 पर पहुंच गई जिसमें सात गर्भवती महिलाएं, एक सामान्य महिला व दो पुरुष शामिल हैं। वर्ष 2011 में आठ एचआईवी पाजिटिव रोगी पाए गए। जिला महिला अस्पताल में कुल 20 एचआईवी पाजिटिव रोगी पाए जा चुके हैं। जिला अस्पताल के परामर्शदाता प्रहलाद सिंह के अनुसार यह आंकड़े उन लोगों के हैं जो जिला अस्पताल में परीक्षण कराने आते हैं। वैसे जिले में ऐसे न जाने कितने रोगी होंगे जिन्होंने अपना परीक्षण नहीं कराया। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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