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कागजों में शिक्षा पा रहे बाल श्रमिक

Hardoi

Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
हरदोई। छोटू, पप्पू और गुड्डू को शिक्षित करने के लिए शुरू की गई बाल श्रम परियोजना कागजों में ही सिमट कर रह गई है। बाल श्रम विद्यालय कागजों में तो बेहतर ढंग से चल रहे हैं। लेकिन बाल श्रमिकों तक उनका लाभ नहीं पहुंच रहा है। आज भी सड़क किनारे कूड़ा बीनते, मोटर का पहिया बांधते और सरकारी कार्यालयों में चाय पहुंचाते बाल श्रमिक नजर आ जाते हैं। इनको प्राथमिक शिक्षा तो दूर अक्षर ज्ञान तक नहीं हो सका है। जबकि जिले में यह परियोजना छह साल से चल रही है।
बाल श्रमिकों को शिक्षित करने के लिए जिले में वर्ष 2006 में बाल श्रम परियोजना शुरू की गई थी। इसके तहत पचास बच्चों के लिए एक बाल श्रम विद्यालय खोला गया था। परियोजना के आरंभ में जिले में 77 बाल श्रम विद्यालय विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से संचालित किए गए। तीन वर्ष परयिोजना पूर्ण होने के बाद श्रम विभाग की ओर से वर्ष 2008-09 में जिले में सर्वे कराया गया। इसमें बारह सौ बाल श्रमिक मिले, जिनके लिए 24 विद्यालय खोले गए ये जो अभी तक संचालित हैं।
इनका कार्यकाल जनवरी में पूरा होेन जा रहा है। विभाग की ओर से परियोजना को संचालित करने के लिए वर्ष 2012 में दोबारा सर्वे कराया गया। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 3234 और शहरी क्षेत्र के 945 बाल श्रमिकों को चिंहित किया गया। इनको शिक्षित करने के लिए जिले में अब 58 विद्यालय खोले जा चुके है। अन्य के लिए प्रक्रिया चल रही है।
शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारियों की निरीक्षण आख्या में कई बार विद्यालय न मिलने की शिकायत भी दर्ज हुई। जो विद्यालय संचालित है उनकी छात्र संख्या 10 से 15 ही रहती है। मगर उपस्थित शत-प्रतिशत दर्ज करायी जाती है और योजना के तहत बाल श्रमिकों को मिलने वाले भोजन के लिए कनवर्जन कास्ट और अनाज पूरा ही जारी किया जाता है। लेकिन प्राथमिक शिक्षा से महरूम गैराज, होटल और पंचर की दुकान पर काम करने वाले इन बच्चों को जानकारी तक नहीं है।
इनसेट
अधिकारी बोेले
परियोजना प्रभारी जिला अल्प संख्यक अधिकारी ज्ञानेन्द्र तिवारी ने बताया कि नये विद्यालयों का भी संचालन शुरू हो गया। सभी विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण किया जायेगा अगर कोई गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित संस्था के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी।
यह दिया जाता है लाभ
हरदोई। बाल श्रम विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर का पका पकाया भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा उनको नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें और शिक्षण सामग्री दी जाती है। इसके अलावा प्रतिमाह 100 रुपये ही छात्रवृत्ति दी जाती है।
श्रम विभाग के सर्वे में बाल श्रमिक
शहरी - 945
ग्रामीण क्षेत्र- 3234
शिक्षा विभाग के सर्वे में बाल श्रमिक
घरेलू नौकर -1
ईंट भट्टो पर काम करने वाले-00
गैराज में काम करने वाले-00
होटल व ढावा में काम करने वाले-03
कचरा बीनने वाले-00
यह दे रहे शिक्षा
विद्यालय में बाल श्रमिकों को शिक्षा देने के लिए दो अनुदेशक, एक ट्रेनर, एक लेखाकार और चपरासी की व्यवस्था प्रत्येक विद्यालय में की गई है।

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