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मूकबधिर व नेत्रहीन बच्चों को नहीं दी गई ड्रेस

Hardoi

Updated Thu, 25 Oct 2012 12:00 PM IST
हरदोई। नेत्रहीन व मूक बधिर बच्चों की बदकिस्मती उनका साथ नहीं छोड़ रही है। बच्चों को अच्छा परिवेश देकर शिक्षा की धारा से जोड़ने के लिए शुरू किए गए प्री इंटीग्रेशन कैंप में बच्चों को भी तक ड्रेस नहीं दी गई। अधिकारियों की फाइलों में बच्चों के कपड़े फंसकर रह गए हैं। हालत यह है कि बच्चे जो कपड़े घर से पहनकर आए थे उन्हीं से काम चला रहे हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत विकलांग बच्चों को शिक्षा की धारा से जोड़ने के लिए समेकित शिक्षा के अंतर्गत कार्यक्रम चलाए जाते हैं। नेत्रहीन व मूक बधिर बच्चों को शिक्षा की धारा से जोड़ने के लिए प्री इंट्रीग्रेशन शिविर संचालित किया जाता है जिसमें ऐसे बच्चों को विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। चरौली स्थित विद्यालय में दो शिविर संचालन की हरी झंडी मिली थी। 36-36 मूकबधिर और 24-24 नेत्रहीन बच्चों को दो दो शिविरों की अधिकारियों की फाइलों में बच्चों की व्यवस्था खोई रही। किसी तरह शिविर शुरू हो गया लेकिन व्यवस्थाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। वैसे तो बच्चों के खाना और नाश्ता के इंतजाम के साथ साथ बच्चों को ड्रेेस और कपड़ों में 15 आइटम दिए जाने हैं जिसमें दो जोड़ी ड्रेस, जूता मोजा, नेकर बनियान, स्वेटर आदि हैं। कहने को व्यवस्था तो तमाम हैं लेकिन अभी तक बच्चों को एक रुमाल तक नहीं दिया गया। अक्तूबर समाप्त होने को है, मौसम भी बदल रहा है लेकिन बच्चों को कपड़े नहीं दिए गए हैं जिससे बच्चे घरों से जो कपड़े पहनकर आए थे उन्हीं से काम चला रहा हैं। हालांकि जिला समन्वयक समेकित शिक्षा आशा वर्मा ने बताया कि बच्चों की ड्रेस व अन्य सामान वितरण की प्रक्रिया चल रही है। किन्हीं कारणों से फाइल को अनुमति नहीं मिल सकी। शीघ्र ही बच्चों को उनकी पूरी ड्रेस वितरित करवाई जाएगी।

दोनों शिविरों में 75 बच्चे
हरदोई। दो शिविरों में 36-36 मूक बधिर व 24-24 नेत्रहीन बच्चे होने चाहिए लेकिन अभी तक दोनों शिविरों में 75 बच्चे हैं। इससे न तो शिविर सही चल रहा है और न ही बच्चों को लाभ मिल पा रहा है। डीसी आशा वर्मा का कहना है कि बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उन्हीं समझाने के बाद सहमति पत्र लिए जा चुके हैं लेकिन वह बच्चों को भेज नहीं रहे हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। टीचरों को बच्चों के अभिभावकों को पास भेजा जा रहा है।
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