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फिर दिखेगी दमिश्क-ए-अवध की शान

Hardoi

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
पिहानी (हरदोई)। बाबे सदर जहां रौजा अब अपने पुराने वकार को हासिल करने जा रहा है। पुरातत्व विभाग मुख्य गुंबद का दोबारा निर्माण करा रहा है। मुख्य गेट से रौजे की इमारत तक पक्की सड़क बनाई जा रही है, जिसके आसपास फुलवारी भी लगाने की तैयारी है। पुरातत्व विभाग की इस पहल से ‘दमिश्क-ए-अवध’ पिहानी के पुराने दिन अब वापस आने वाले हैं।
सन् 1540 ई. में हुमायूं और शेरशाह सूरी के बीच हुई जंग में हुमायूं बादशाह की शिकस्त गई थी। उनके साथी शिकस्त के बाद दुश्मन फौजों से बचने को उनका लश्कर इधर-उधर छिपने लगा था। तब हुमायूं के एक वरिष्ठ मंत्री मुफ्ती सदर जहां यहां जंगल में छुप गए थे। बाद में हुमायूं जब दोबारा तख्तनशीन हुए तो यह जमीन मुफ्ती सदर जहां को उन्होंने जागीर स्वरूप दे दी थी। इसके बाद सदर जहां ने यहां के जंगल साफ करा कर एक बस्ती बसाई, जिसे ‘पिन्हानी’ नाम दिया जिसके अर्थ ‘छिपने की जगह’ होते हैं। धीरे धीरे बस्ती बढ़ती गई और इसका नाम पिन्हानी से पिहानी होता गया। बताया जाता है कि नवाब सदर जहां के समय इस बस्ती की खूबसूरती देखने के लिए यूरोपियन पर्यटक बड़ी संख्या में यहां आते थे। उन्होेंने इसे ‘दमिश्के अवध’ का नाम दिया था।
नवाब सदर जहां के निधन के बाद उनके पुत्र ने रौजे का निर्माण करवाया था। इसके बाद से एक लंबे अरसे तक रौजे की इमारत बदहाली का शिकार रही और धीरे धीरे इसका मुख्य गेट, रौजे का मुख्य गुंबद तथा बरामदा खंडहर बनता गया। तब पुरातत्व विभाग ने इस की सुध लेते हुए रौजे का जीर्णोद्धार कराने का निर्णय लिया। कई वर्षों से जारी रौजे की तामीरे नौ में ताजमहल और लखनऊ की भूलभुलैया की रिपेयरिंग कर चुके राजस्थान के कारीगरों को यहां बुलवाया गया और तब से काम लगातार जारी है। पहले रौजे के आधे टूट चुके गुंबद को बनाया गया और फिर बरामदा सही किया गया। इसके बाद मुख्य गेट जो कभी भी धराशायी हो सकता था, उसे बनाया गया और अब रौजे के मुख्य गुंबद को बनाया जा रहा है। गुंबद के निर्माण के साथ ही मुख्य गेट से रौजे की इमारत तक लगभग पचास मीटर पक्की सड़क बनाई जा रही है, जिसके पास फुलवारी लगाई जाएगी। यहां के बुजुर्गों के अनुसार रौजे की इमारत दूसरा गुंबद भी बन जाने से अपनी पुरानी खूबसूरती को हासिल कर लेगी। कारीगरों के मुताबिक अभी और कितना काम होना है, यह विभागीय अधिकारी ही बता सकेंगे।
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