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नहीं कटी फसल, कैसे डलेंगे पड़ाव

Hapur

Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
गढ़मुक्तेश्वर। उत्तर भारत का प्रसिद्ध कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला आधी अधूरी व्यवस्थाओं के बीच सोमवार (आज) से शुरू हो रहा है। डीएम से वादा करने वाली जिला पंचायत पहली परीक्षा में ही फेल नजर आ रही है। वजह, पंचायत अभी तक न तो अपना डेरा डाल पाई है और न ही मुख्य स्नान घाट का निर्माण कराई पाई। जो मेला करीब 6 किलोमीटर परीधि में लगता रहा है, उसके लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। इस कारण श्रद्धालुओं को पड़ाव डालने में दिक्कत आ सकती है। पांच वर्ष के भीतर गंगा के गढ़ की तरफ करीब दो किलोमीटर आने से भी मेले का क्षेत्रफल पहले से कम हुआ है। यही वजह है कि पशु मेला काकाठेर गांव की आबादी तक पहुंच गया है। मेले में दुकानदार और श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है, मगर स्वास्थ्य विभाग अस्पताल नहीं खोल पाया है। कमिश्नर 19 नवंबर की शाम मेला स्थल पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों की बैठक लेंगे।
गढ़ से मेला मात्र तीन किमी दूर
गढ़ गंगा मेले का स्वरूप भी बदलता जा रहा है। पांच वर्ष के भीतर गंगा कटान करती हुई गढ़ की तरफ करीब दो किलोमीटर आ गई है। गंगा मेला गढ़ से मात्र तीन किलोमीटर दूर रह गया है। मेला स्थल पर खड़ी गन्ने की फसल प्रशासन के लाख दावे के बावजूद नहीं कट पाई है। जगह की कमी के कारण पशु मेला काकाठेर गांव की आबादी तक पहुंच गया है। गंगा दूर होने की वजह से अमरोहा का तिगरी मेला गढ़ की ओर आ गया है।

व्यवस्थाएं पूरी कराने में अधिकारी जुटे
एडीएम सत्यप्रकाश पटेल और एसडीएम केबी सिंह ने मेला स्थल पर मुख्य स्नान घाट का निरीक्षण किया और उसे जीरो प्वाइंट पर समतल कराने के बाद सोमवार की सुबह तक पूरा करने के निर्देश दिए, जबकि डीएम ने स्नान घाट रविवार को पूरा करने के निर्देश दिए थे। एडीएम ने कहा कि व्यवस्थाएं समय से पूरी करा दी जाएंगी। रविवार को पहुंचे जिला पंचायत समिति सदस्य के पति सतपाल यादव ने जिला पंचायतकर्मियों को फटकार लगाते हुए पंचायत का कैंप तत्काल लगवाने एवं मुख्य स्नान घाट का निर्माण कराने को कहा।

पड़ाव डालने में आ सकती है दिक्कत
प्रशासन के लाख दावे के बावजूद मेला प्रारंभ होने तक मात्र 50 प्रतिशत गन्ने की फसल कट पाई है जिसके चलते मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को पड़ाव डालने में दिक्कत आ सकती है। जिला पंचायत सूत्रों के मुताबिक मेला करीब 6 किलोमीटर की परीधि में आयोजित होता है परंतु अभी तक मात्र 50 प्रतिशत गन्ने की फसल कट पाई है और इससे व्यवस्थाओं में दिक्कत आ रही है।
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