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भू-अधिग्रहण बिल के नए मसौदे से किसान गदगद

Hapur

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
हापुड़। भूमि अधिग्रहण बिल के नए मसौदे को लेकर किसान गदगद हैं। इस बिल से पहले जिला प्रशासन के अधिकारी अर्जेन्सी क्लाज लगाकर किसानों की मर्जी के विपरीत उनकी भूमि को अवार्ड घोषित कर अधिग्रहण कर लेते थे। ऐसे में किसानों को घोषित मुआवजा दर से काफी सस्ती दर पर शासन द्वारा भुगतान कराया जाता था, लेकिन अब अधिकारी ऐसा नहीं कर सकेंगे।
नये भूमिं अधिग्रहण का जो मसौदा तैयार किया गया है उसके अनुसार अधिग्रहण से पहले 80 प्रतिशत किसानों की स्वीकृति लेना जरूरी होगा। अगर किसी भी योजना के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना है और 80 प्रतिशत किसान भूमि देने के लिए तैयार नहीं है, तब किसानों की भूमि का अधिग्रहण नहीं हो सके गा।
श्यामनगर के किसान नेता राजवीर सिंह ने केन्द्र द्वारा तैयार किए भूमि अधिग्रहण बिल मसौदे को सराहा है। उनका कहना है कि अब अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। उनका कहना है कि किसानों को सर्किल रेट से कम का मुआवजा किसी हालत में नहीं मिलना चाहिए। इसी के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी करनी आवश्यक है।
रामपुर गांव के विरंजन सिंह त्यागी का कहना है कि उन्हें अपने गांव की जमीन हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण की लैदर सिटी योजना से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। अन्यथा अधिकारी तो अर्जेन्सी क्लाज लगाकर गांव की बेशकीमती भूमि का अधिग्रहण कर ग्रामीणों को बर्बाद कर चुके थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण ही गलत नहीं बताया बल्कि लैदर सिटी योजना भी रद्द कर दी थी। उनका कहना है कि हम लोगों ने जितनी लंबी लड़ाई लड़ी, आम किसान नहीं लड़ पाते और अपनी पैतृक जमीन सरकार के अंधे कानून अर्जेन्सी क्लाज के चक्कर में गंवा बैठते हैं।
दादरी गांव के किसान मंगू सिंह त्यागी का कहना है कि उनकी जानकारी में आया है कि नये भूमि अधिग्रहण बिल के मसौदे में रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, बिजली की लाइनों तथा सेना को इस कानून से प्रभावित नहीं माना है। उनका कहना है कि बेशक ऐसा हो लेकिन मुआवजा राशि तो कम से कम सर्किल रेट पर मिलनी चाहिए, अन्यथा किसान बर्बाद हो जायेंगे।
क्षेत्र के प्रमुख किसान आदेश चौधरी ने कहा कि किसान अपने परिवारों को खेती कर किसी तरह पालन पोषण करते हैं। ऐसे में अगर किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलेगा तो किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि नया भूमि अधिग्रहण बिल मसौदा ने किसानों को भारी राहत दी है क्योंकि अब अधिकारी जबरन किसानों की भूमि नहीं छीन सकेंगे।


भ-अधिग्रहण बिल के नए मसौदे से किसान खुश
गढ़मुक्तेश्वर। भूमि अधिग्रहण बिल के नए मसौदे से किसान खुश हैं। उनका मानना है कि अब मनमाने ढंग में जमीन भाव देने से उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। बदरखा निवासी इंशाअल्लाह का कहना है कि भले ही केन्द्र सरकार ने देरी से कदम उठाया है, लेकिन भूमि अधिग्रहण बिल के नए मसौदे से अब किसानों की बेशकीमती जमीन कौड़ियों के भाव में नहीं छिन पाएगी। पुराने दिल्ली रोड निवासी जुल्फिकार कहते हैं कि राज्य सरकारें मनमानी चलाकर किसानों की कीमती जमीन को बेहद सस्ते रेट पर अधिग्रहण कर लेती थीं, जिसे बाद में निजी कंपनियों को मंहगे दाम पर बेच दिया जाता था। लेकिन अधिग्रहण बिल के नए मसौदे से ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।
ऋषिपाल चौहान का कहना है कि निजी कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण में 80 फीसदी किसानों की सहमति को अनिवार्य करना सराहनीय कदम है, क्योंकि जब तक किसानों को अपनी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक वे अधिग्रहण प्रस्ताव पर मंजूरी ही नहीं देंगे। परमाल सिंह कहते हैं कि जनहित से जुड़े मुद्दों के अलावा जमीनों के अधिग्रहण में होने वाली मनमानी रोकने को किसानों की सहमति लिया जाना बेहद जरूरी हो गया था। केन्द्र सरकार द्वारा मंजूरी देने वाले किसानों का प्रतिशत बढ़ाकर सराहनीय कदम उठाया गया है, क्योंकि अब भूमि अधिग्रहण मामले में गेंद पूरी तरह किसानों के पाले में आ गई है।
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