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भीषण गर्मी ने किया बेहाल, पारा पहुंचा 41 पर

Hapur

Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
हापुड़। चिलचिलाती धूप, भीषण उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। बृहस्पतिवार को पारा 41 तक जा पहुंचा। सुबह से ही धूप कड़ी हो गई और लोग दिनभर पसीने से लथपथ होते रहे।
बृहस्पतिवार को नगर का अधिकतम तापमान 41 और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा। दिन चढ़ते ही गर्मी से लोग बेहाल होने लगे। कूलर और पंखों में भी पसीना सूखने का नाम नहीं ले रहा था। दोपहर होते ही नगर की प्रमुख फ्रीगंज रोड, रेलवे रोड, गढ़ रोड़, दिल्ली रोड आदि पर इक्का-दुक्का राहगीरों की आवाजाही दिखी। उधर, मौसम की इस बेरुखी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखा रहीं हैं। किसान आदेश चौधरी, नरेन्द्र सहवाग, मनोज कुमार का कहना है कि यदि इसी प्रकार गर्मी रही और बारिश नहीं हुई तो धान-चारे की फसल बर्बाद हो जाएगी। उधर सरकारी अस्पताल के फिजिशियन डा. प्रदीप राणा का कहना है कि इस प्रकार का मौसम लोगों को डायरिया, वायरल व चर्म रोग लेकर आता है।


सावन में चला पछुआ किसानों के होश उड़े

गढ़मुक्तेश्वर (ब्यूरो)। मानसून न आने के कारण गंगा खादर किनारे के सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि में धान नहीं लग पा रहा। वहीं सावन आधा बीत गया और बारिश के स्थान पर पछुआ चलने से किसानों के होश उड़ गए हैं। क्योंकि पछुआ हवा के कारण जमीन में दरारें पड़ने लगी हैं। फसल बर्बाद हो रही है।
बांगर के जंगल में किसान महंगा डीजल फूंक कर धान की रोपाई कर रहे हैं लेकिन उसमें खर्चा दोगुना आ रहा है। किसान बबली त्यागी, सतेंद्र त्यागी का कहना है कि मजबूरी में वे डीजल इंजन से सिंचाई कर रहे हैं। बारिश न होने के कारण धरती ज्यादा पानी पी रही है। खेतों से पानी मात्र 24 घंटे में ही सूख जाता है जबकि धान की फसल के लिए लगातार पानी भरा रहना चाहिए। उधर, गंगा खादर में स्थित हजारों एकड़ कृषि भूमि में धान की रोपाई नहीं हो पाई है, क्योंकि गंगा किनारे स्थित चिकनी मिट्टी में बिना बारिश के पानी नहीं रुकता। किसान सरदार सुरेश, निरंजन सिंह का कहना है कि खादर में विद्युत लाइन भी नहीं है जिसके चलते खेत खाली पड़े हुए है। इसके अलावा किसानों के लिए पछुवा हवा भी सिरदर्र्द बन गया है। किसान अनिल चौधरी, मुजाहिद प्रधान, सुभाष प्रधान का कहना है कि महंगा डीजल फूंक कर खेतों में पानी दिया था, लेकिन पछुवा के चलते ही जमीन सूख गई। पर्यावरण विद् डॉ. अब्बास अली का कहना है कि सर्दी में पछुवा चलने से बारिश हो जाती है जबकि सावन में पछुवा चले तो समझो बारिश नहीं होगी।

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