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यूरिया की किल्लत ने बढ़ाई दुश्वारियां

Hamirpur

Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
भरूआसुमेरपुर (हमीरपुर)। सहकारी समितियों में यूरिया खाद की कमी के चलते किसानों की लंबी लाइनें लग रही हैं। वहीं कुछ समितियां अपने खाताधारकों को खाद देने का बहाना बनाकर नगद खरीद करने वाले किसानों को टरका रहे हैं। खाद की कमी को देखते हुए खुले बाजार में दुकानदार किसानों से अधिक दाम वसूल रहे हैं। जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है। पलेवा व बुआई के बाद अब किसानों को पानी लगाने के साथ यूरिया खाद छिड़काने की जरूरत आ पड़ी है। लेकिन यूरिया खाद की पर्याप्त आपूर्ति न होने से किसान समितियों के चक्कर काट रहा है। कसबे की क्रय विक्रय सहकारी समिति में सिर्फ एक ट्रक व क्षेत्रीय सहकारी समिति में दो ट्रक खाद आई। खाद के आने की सूचना मिलने पर इन समितियों में सुबह से ही किसानों की लंबी लाइनें लग गईं। क्रय विक्रय सहकारी समिति जहां नगद दाम पर किसानों को खाद उपलब्ध करा रही है। आरोप है कि वहीं क्षेत्रीय सहकारी समिति अपने खाते धारकों को देने का बहाना कर चहेते किसानों को ही खाद दे रहे हैं। वहीं खुले बाजार में यूरिया खाद प्रिंट रेट से अधिक दामों पर बेंची जा रही है। समितियों में 304 रुपए की मिलने वाली यूरिया खाद बाजार में 420 से 425 रूपए में बेची जा रही है। कसबे में देखा जाए तो ज्यादातर खाद की दुकानें समितियों के नजदीक खुली हुई है। लेकिन इन दुकानों के लाइसेंस व नाम का अता पता नही है।
420 रुपए की दे रहे यूरिया की बोरी
टेढ़ा निवासी सुरेश मिश्रा बोले कि समितियों में यूरिया खाद 304 रुपए की मिल रही है। जबकि खुले बाजार में दुकानदार यूरिया खाद के 420 रूपए वसूल रहे है। इस तरह किसानों को अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार ने तत्काल खाद भेजने की मांग की।छोटा किसान होने के नाते नहीं दे रहे खाद
चंदपुरवा के किसान बलवंत का कहना है कि उसके पास चार बीघा खेती है। इसके लिए उसे दो बोरी खाद की जरूरत है। लेकिन लंबी लाइनों के चलते उसे खाद नहीं मिल पा रही है। कहा कि क्षेत्रीय सहकारी समिति में छोटे किसानों को खाद नहीं दी जा रही है। जो किसानों के साथ अन्याय है।
छिड़काव करना मजबूरी
पारा रैपुरा गांव के किसान ओमप्रकाश ने बताया कि उसे तीन बोरी खाद की जरूरत है। लेकिन खाद कम आने के चलते यूरिया के लिए मारामारी मची है। किसानों को पानी लगाने के साथ यूरिया छिड़काव करने की जरूरत होती है। लेकिन समय से खाद न मिलने से उसकी फसलो को नुकसान होगा।

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