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समय से आवासों का निर्माण संभव नहीं

Hamirpur

Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
मौदहा (हमीरपुर)। कसबे के प्रथम चरण में दो स्थानों पर बने कांशीराम आवासीय कालोनी के आवंटन में हुई मारामारी के बाद अब तीसरे चरण में छिमौली मार्ग में नई कालोनी का मौजूदा समय में निर्माण कार्य मंद है। जबकि 31 मार्च तक यहां के 19 ब्लाकों में 248 आवास पूरे कर देने की जिम्मेदारी आवास विकास विभाग को दी गई है।
मौजूदा समय में छिमौली मार्ग में भी कांशीराम आवासीय कालोनी का निर्माण कराया जा रहा है। इन भवनों के निर्माण का बजट मायावती सरकार ने पहले ही आंवटित कर दिया और निर्माण कार्य शुरू होते ही इसके लिए आवेदन भी लेना प्रारंभ कर दिए थे। तब करीब 100 लोग आवास के लिए आवेदन चुके थे। जो सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। इन नए आवासों का निर्माण मार्च 2013 तक पूरा होना है। निर्माण स्थल की स्थिति यह है कि 19 ब्लाकों में अभी भी किसी आवास में छपाई, दरवाजे, खिड़की व सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
यहां तक कि निर्माण कार्य भी इतनी मंद गति से चल रहा है कि 31 मार्च तक इनका पूरा हो पाना बेहद कठिन लग रहा है। मौका-मुआयना करने भी अवर अभियंता कम ही पहुंचते हैं। यहां पर सबसे बड़ी खामी यह है कि किसी भी स्थान पर निर्माण का कोई सूचनात्मक बोर्ड ही नहीं लगा है। जिससे इनकी लागत सहित निर्माण एजेंसी का नाम आदि देखा व जाना जा सके।
अवर अभियंता से फोन पर जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि मार्च तक कार्य पूरा होना है। लेकिन इनसे जब जानकारी मांगी की कितनी धनराशि से बन रहे हैं और इनकी गुणवत्ता कैसे होगी। तब उन्होेंने कहा कि यह जानकारी आफिस से प्राप्त करें।
आवास के लिए करेगा प्रयास
मौदहा। ब्लाक के पीछे की नईबस्ती निवासी लाला प्रजापति व उसका भाई रमेश एक साथ रहते है। इनका परिवार बड़ा है। सिर छिपाने को सिर्फ एक झोपड़ी है। लाला कहते हैं कि तृतीय चरण में बन रहे आवासोें पर एक आशियाना पाने का उसका सपना है। साथ ही कहता है कि वह गरीबी के चलते जुगाड़ नहीं भिड़ा सकता है। फिर भी प्रयास में कसर नहीं छोड़ेगा।
छोटे से घर में ठीक से नहीं रह पा रहे
कसबे के ही उपरौस निवासी लईक पुत्र लतीफ के छह बच्चे है। एक की शादी भी हो चुकी है। पिता के छोटे से मकान पर इनका गुजारा नहीं होता उसने बीते वर्ष आवास पाने को आवेदन करने के साथ भागदौड़ की। करीब 500 रुपए भी बर्बाद हुए लेकिन नतीजा शून्य रहा।
ईमानदारी बरती गई तो मिलेगा आवास
उपरौस फत्तूबाबा निवासी पल्लेदार वकील अहमद बोले कि 4 बच्चों की शादी कर चुके हैं। घर कच्चा है, छत के नाम पर मोमिया पड़ी है। बेटे शकील के नाम पर आवास पाने की उम्मीद है। कहा कि अगर आवास आवंटन में ईमानदारी बरती गई तो उसे आवास मिल जाएगा। राजनैतिक दबाव व पैसे के बल पर आवंटन हुुआ तो आवास का सपना टूट जाएगा।
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