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राप्ती तीरे अद्भुत रेत शिल्प रचना ने जीता दिल

Gorakhpur

Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
गोरखपुर। 12-12-12 को दिन के 12 :12 :12 बजे यूनिवर्सिटी के ललित कला एवं संगीत विभाग और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उच्च शिक्षा विभाग, लखनऊ के कलाकारों ने राप्ती तट पर विशाल रेत शिल्प का निर्माण किया। इसके तहत मंगलकारी, संतुलनदायी उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतीक चिन्ह मत्स्य की 30 फीट लंबी और आठ फीट चौड़ी रेत की आकृति तैयार की। उसके समीप यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार की आकृति गढ़ी गई। रेत से बनी ये आकृतियां देखने लायक थीं। निर्धारित समय पर ललित कला एवं संगीत विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार सिंह ने इन्हें फिनिशिंग टच दिया।
प्रो. कुमार ने इस आयोजन के बार में बताया कि ऐसा 12-12-12 को 12:12 :12 बजे अद्भुत संयोग पर रेत शिल्प रचना गढ़ने के पीछे उद्देश्य यूनिवर्सिटी को पूर्णतया आवासीय और केंद्रीय दर्जा दिलाना था। इसके लिए इससे बेहतर दिन और घड़ी नहीं हो सकती थी। उन्होंने बताया कि मानव संसाधन मंत्रालय के पहल पर बीते माह योजना आयोग की हुई बैठक में यूनिवर्सिटी को कें द्रीय दर्जा देने के बाबत आंशिक वैचारिक सहमति बनी है। योजना आयोग ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया है कि यूनिवर्सिटी के उत्थान में जो आवश्यक हो उससे संबंधित कार्रवाई पूर्ण कर राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजें। उस पर विचार किया जाएगा। इसकी जानकारी होने के बाद ही इस महत्वपूर्ण दिन इस रचनाधर्मिता का दिन तय किया गया था।
इससे पूर्व राप्ती तट पर रचनाधर्मिता के लिए ललित कला एवं संगीत विभाग और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उच्च शिक्षा विभाग की टीम को पूर्व मंत्री शिवप्रताप शुक्ल एवं अन्य गणमान्य नागरिकों ने रवाना किया। रचना तैयार करते समय युनिवर्सिटी राष्ट्रीय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण मिश्र, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय आदि मौजूद थे। मंगलकारी, संतुलनदायी उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतीक चिन्ह मत्स्य की 30 फीट लंबी और आठ फीट चौड़ी रेत की आकृति तैयार करने वालों में प्रवीण कुमार पांडेय, भाष्कर विश्वकर्मा, विवेक चौधरी, संत किशोर चौहान, नंद किशोर गौड़, प्रमोद कुमार मिश्र, सुनील कुमार, दीपक पांडेय, अमित, रवि, डॉ. विजय प्रताप यादव, डॉ. राजीव केतन आदि प्रमुख थे।
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