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ईदगाहों, मस्जिदों में अदा की गई बकरीद की नमाज

Gorakhpur

Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी का त्यौहार बकरीद (ईद-उल-अजहा) शनिवार को मनाया गया। शहर के ईदगाहों, मस्जिदों में बकरीद की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद घर पहुंचकर लोगों ने बकरों की कुर्बानी दी। इस मौके पर लोगों ने मुल्क के लिए अमन, चैन, खुशहाली की कामना की।
शहर के छह ईदगाहों और 80 से ज्यादा मसजिदों में शनिवार को सुबह 6.30 बजे से शुरू होकर रात साढ़े दस बजे तक नमाज पढ़ने का सिलसिला चलता रहा। ईदगाह बाले मियां के मैदान, ईदगाह मुबारक खां शहीद, ईदगाह चिलमापुर, ईदगाह पुलिस लाइन, ईदगाह बेनीगंज एवं जामा मसजिद उर्दू बाजार, जामा मसजिद रसूलपुर, जामा मसजिद पुराना गोरखपुर, मदीना मस्जिद रेती, मदरसा दारुल उलूम, हकीम साहब की मस्जिद शाहमारूफ, मसजिद मुस्लिम मुसाफिरखाना और मस्जिद बाबर अली शाह में बकरीद की नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। बच्चों ने तो ईदगाहों, मस्जिदों में जाकर पहले से ही नमाज के लिए जगह ले रखी थी।
शहर के ईदगाहों, मस्जिदों पर मेले लगे रहे। नमाज अदा करने के साथ ही बच्चों ने मेले में जमकर खरीदारी भी की। इसके बाद एक दूसरे के घरों पर जाकर लोगों ने बकरीद की मुबारकबाद दी। घर आए मेहमानों को भोजन कराने के साथ ही सेवई खिलाकर मुंह मीठा कराया गया। मुस्लिम बाहुल क्षेत्रों में देर रात तक रौनक रही। उलेमाओं ने लोगों को सामाजिक बुराईयों से दूर रहने के साथ ही कुर्बानी के बारे में विस्तार से बताया।
त्यौहार के मकसद को समझें
कुर्बानी को एक परंपरा समझकर न निभाइये बल्कि इसके पीछे छिपे मकसद को समझने की कोशिश करें। कुर्बानी अल्लाह तआला को बहुत पसंद है, लिहाजा दिखावे के लिए नहीं बल्कि अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करें।
-मौलाना अब्दुल जलील, पेशइमाम, जामा मस्जिद, उर्दू बाजार
दिखावे का काम नहीं करें
ईद-उल-अजहा का त्योहार महज जानवरों की कुर्बानी नहीं है। बल्कि इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत के लिए खुदा की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान कर देने की पवित्र भावना का प्रतीक है। इसलिए कोई काम दिखावे के लिए न करें।
-मुफ्ती मौलाना वलीउल्लाह, इमाम, अस्करगंज मस्जिद
जज्बे के साथ करें कुर्बानी
जज्बे के साथ कुर्बानी करें, क्योंकि जज्बा न होने की वजह से त्योहारों का असल मकसद खत्म हो रहा है। समाज में बुराई तेजी से फैल रही है और यह बुराई इंसान के स्वार्थी बनने की वजह से है। जहां स्वार्थ है वहीं हवस है और वहीं से बुराई की शुरुआत होती है।
-मौलाना जुनैद आलम, इमाम, ईदगाह बेनीगंज
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