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चार मंजिला इमारत फिर भी अधिवक्ता बाहर

Gorakhpur

Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। पांच वर्ष पूर्व ही चार मंजिला अधिवक्ता भवन बनकर तैयार हो गया। इसके बावजूद कमिश्नरी के अधिवक्ताओं को टिनशेड या फिर पेड़ के नीचे बैठना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि अधिवक्ता अपने में वरिष्ठ और कनिष्ठ का निर्धारण नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से अधिवक्ता कक्षों का आवंटन नहीं हो पा रहा है। जबकि अधिवक्ता, इन कक्ष का आवंटन नहीं हो पाने के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
बताते चलें कि सपा की पिछली सरकार में दीवानी, कलेक्ट्रेट कचहरी एवं तहसीलों में अधिवक्ताओं के लिए भवन बनवाया गया था। वर्ष 2006 में कमिश्नरी में भी भवन का निर्माण शुरू हुआ। करीब एक करोड़ की लागत से बने 50 कक्ष वाले इस चार मंजिला भवन का निर्माण वर्ष 2007 में ही पूरा हो गया था। भवन की रंगाई-पुताई के साथ ही सभी कक्षों में बल्ब और पंखे भी लगा दिए गए और तत्कालीन कमिश्नर मूलचंद यादव ने इसका उद्घाटन भी कर दिया। लेकिन आज तक अधिवक्ताओं को कक्ष आवंटित नहीं हो सका।
अधिवक्ताओं का कहना है कि कमिश्नरी में करीब 100 पंजीकृत अधिवक्ता हैं। एक कक्ष, एक वरिष्ठ और एक कनिष्ठ को आवंटित करने का निर्देश है। अगर आवंटन हुआ तो सभी को कक्ष मिल जाएंगे और सभी की समस्या दूर हो जाएगी।

जब देना नहीं था तो बनाया क्यों?
गोरखपुर। द कमिश्नर्स कोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद त्रिपाठी का सवाल है कि जब अधिवक्ताओं को कक्ष आवंटित ही नहीं करना था तो शासन-प्रशासन ने इसका निर्माण ही क्यों कराया? भवन होने के बावजूद अधिवक्ताओं को खुले में बैठना पड़ता है। ठंड हो या बरसात हर मौसम में उन्हें कठिनाई उठानी पड़ती है। काफी प्रयास के बाद प्रशासन कक्ष आवंटित करने को किसी तरह से तैयार हुआ। कमिश्नर के निर्देश पर एसोसिएशन ने तत्कालीन अपर आयुक्त शीतला प्रसाद को वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची सौंपी थी। कार्यवाही आगे बढ़ती की उनका तबादला हो गया। उनके बाद अपर आयुक्त बीएल अग्रवाल को भी यह सूची उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कक्ष आवंटन की प्रक्रिया शुरू की लेकिन उनका भी तबादला हो गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

सूची नहीं दे पा रहे अधिवक्ता
गोरखपुर। कमिश्नर के. रविंद्र नायक का कहना है कि भवन में बने कक्षों को आवंटित करने के लिए कई बार प्रयास किए गए। तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति ने भी प्रयास किया था और मैने भी। जब भी एसोसिएशन से वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची मांगी गई, किसी न किसी विवाद के कारण उन्होंने सूची नहीं उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि भवन अधिवक्ताओं के लिए ही बना है। उन्हीं को आवंटित होगा लेकिन पहले वे सूची तो उपलब्ध कराएं।
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