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भाइयों की कलाई पर बहनों ने बांधा प्यार

Gorakhpur

Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। रक्षाबंधन का पारंपरिक त्योहार जोशोखरोश के साथ वृहस्पतिवार को संपन्न हो गया, भाइयों की कलाई पर बहनों ने पवित्र रक्षासूत्र बांधा, भाइयों ने उनकी रक्षा का वचन दिया वहीं बहनों ने उनके दीर्घायु होने की कामना की। इस त्योहार में बच्चे, किशोर, युवा, वयस्क तथा बुजुर्गों तक ने सहभागिता निभाई। जिला जेल में कुछ कैदियों को उनकी बहनों, अस्पतालों में अस्वस्थ भाइयों की कलाई पर राखी बांधे जाने की खबर है। आज मौसम ने भरपूर साथ दिया, कहीं रिमझिम तो कहीं तेज बारिश हुई, इससे मौसम खुशनुमा बना रहा। बड़ी आबादी वाले इस महानगर में अधिकांश घरों में सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 5.25 से 8.28 का खयाल रखा गया वहीं वृहत्तर घरों में सुविधा अनुसार पूरे दिन यहां तक कि देर शाम तक राखी बांधने का कार्यक्रम चला। घरों में पकवानों एवं मिठाई की धूम रही। कार्यालय, शिक्षण संस्थानों में छुट्टियां थीं, नए परिधान में आवृत्त अधिकांश लोगों ने एक दूसरे को शुभाशीष देते, मिलते जुलते पूरे उत्साह में दिन व्यतीत किया। महानगर में वित्त व्यवसाय अथवा नौकरीपेशा वाले बाहरी लोगों की कलाई पर डांक अथवा कूरियर से आई राखियां शोभायमान हुईं। इस बार मुहूर्त को लेकर कोई संशय नहीं रहा। पिछले साल राखी के दिन ही भद्रा पड़ने के कारण भाई के साथ बहनों को दोपहर बारह बजे तक का इंतजार करना पड़ा था।
वृक्षों को बांधा रक्षासूत्र
रक्षाबंधन के दिन को लेकर लंबे समय से चली आ रही परंपरा के मुताबिक खजनी क्षेत्र के नगवां जैतपुर में बच्चों ने वृक्षों को रक्षासूत्र बांधकर रक्षा का संकल्प लिया। जय हिंद एकेडमी के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर वृक्ष को रक्षा बांधने के बाद ही घरों में भाइयों को राखी बांधी।

जेल के बाहर लगी भाई और बहनों की लंबी लाइन
गोरखपुर। जिंदगी में हुई कुछ गलतियों की सजा काट रहे लोगों की आंखें में बृहस्पतिवार को पश्चाताप के आंसू बहते रहे। जेल की सलाखों के पार खड़ी बहनों के हाथ में राखी देखकर कैदियों और बंदियों की आंखें भर आईं। बारिश में भीगकर दूर दराज के इलाकों से पहुंची सैकड़ों महिलाओं ने जेल में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। वहीं जिला कारागार के बाहर घंटों लाइन में लगकर भाइयों ने भी जेल में बंद बहनों से राखी बंधवाई।
रक्षाबंधन पर सुबह नौ बजे से जेल के बाहर महिलाओं और पुरुषों की लाइन लगनी शुरू हो गई। जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने के लिये देहात क्षेत्र से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची। दोपहर 12 बजे से जेल प्रशासन राखी बांधने का अनुमति दी जिसके बाद बहनों ने अंदर जाकर भाइयों को राखी बांधी। इस दौरान बहनें घर से मिठाई और खाना भी बनाकर लाई थीं, जिसे खुद चखने के बाद भाइयों को खिलाने की इजाजत दी गई। इसके अलावा कारागार में बंद महिलाओं से राखी बंधवाने के लिये बड़ी संख्या में पुरुष भी पहुंचे। जेल प्रशासन में दर्ज आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार को 459 महिलाएं, 117 पुरुष और 65 बच्चे जेल में रक्षाबंधन का पर्व मनाने पहुंचे। कारागार के दरवाजे से लेकर बाहर तक सैकड़ों महिला पुरुष की लाइन लगी रही। अपराह्न तीन बजे तक राखी बांधने की इजाजत दी गई थी। हालांकि सूत्रों की मानें तो शाम चार बजे तक बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती रही। आम मुलाकाती दिनों के बजाय जेल प्रशासन की तरफ से भी बंदियों और मुलाकातियों को सहूलियत दी गई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसके शर्मा ने बताया कि जेल में 11 सौ बंदी है। उनको राखी बांधने के लिए सुबह से काफी गहमागहमी रही। जेल प्रशासन ने सभी की मदद करते हुए मुलाकात का मुकम्मल इंतजाम रखा।

सूनी रह गई कई की कलाई
रक्षाबंधन पर कई ऐसे बंदी और कैदी भी रहे जो बहनाें का इंतजार करते रह गये। बैरक में बंद सैकड़ों बंदियों के हाथ रक्षाबंधन पर भी सूने रहे। अंदर से राखी बांधकर बाहर आई महिलाओं को उनके भाइयों ने बताया कि कुछ की बहन ही नहीं हैं, जबकि कुछ के कृत्यों के चलते परिवार ने उन्हें छोड़ दिया है।

दोस्त की बहन ने बांधी राखी
जेल में सजा काटने के दौरान दोस्त बने कुछ बंदियों को उनके दोस्त की बहनों ने भी राखी बांधी। कई ऐसे भी बंदी थे जिनके परिवार से कोई नहीं आया। ऐसे में कुछ बंदियों की बहनों ने ही उनके दोस्तों को भी राखी बांधी।

इंसेफेलाइटिस पीड़ितों को बांधी राखी
गोरखपुर। प्रजापति ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की गोरखपुर शाखा की सदस्यों ने बीआरडी मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती बच्चों को राखी बांधकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इस दौरान ब्रह्मकुमारी प्रीती, दुर्गा, पारुल के साथ तेज बहादुर, लाल बहादुर आदि मौजूद रहे।
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