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आठ घंटे उबल गए लोग

Gorakhpur

Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST

गोरखपुर। मंगलवार को बिन बिजली गर्मी से गोरखपुरिए आठ घंटे उबल गए। दोपहर बाद एक बजे गई बिजली रात नौ बजे आई। बिजली आने के साथ ही लोकल फाल्ट का सिलसिला चल पड़ा। देर रात तक हर इलाके से लोकल फाल्ट की खबरें आती रहीं।
दोपहर बाद एक बजे बिजली गई तो लोगों ने इसे शेड्यूल की कटौती माना। शाम पांच बजे बिजली आने के पुराने शेड्यूल का टाइम भी जब बीतने लगा तो लोगों को लगा कि उनके इलाके में लोकल फाल्ट है। इसके बाद उपकेंद्रों की घंटियां बजने लगीं। तब पता चला कि ग्रिड फेल होने के कारण पूरे देश में बिजली का संकट है। कोई भी अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं था कि बिजली कब आएगी।
धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगा। इसी के साथ घरों में इन्वर्टर बैठने लगे। अंधेरे में मोबाइल की रोशनी के सहारे लालटेन और मोमबत्तियां जलाने की शुरुआत हो गई। ‘अब आएगी, अब आएगी’ के बीच गर्मी से बेहाल लोग छतों पर टहलते देखे गए।

बूंद-बूंद पानी को तरसे
दोपहर बाद एक बजे गई बिजली के शाम पांच बजे आने के इंतजार में लोगों ने घरों का पानी खत्म कर दिया। जब बिजली आने में देर हुई तो पानी की जरूरत महसूस होने लगी। स्थिति यह रही कि बाथरूम में भी पानी खत्म हो गया।

मिनरल वाटर बेचने वालों की चांदी
मंगलवार को मिनरल वाटर बेचने वालों की चांदी रही। शाम को रोजेदारों ने पानी न मिलने पर मिनरल वाटर मंगाना शुरू किया। रुस्तमपुर के सलीम कहते हैं कि कुछ घंटों में पांच गत्ता मिनरल वाटर का बोतल बिक गया। इतना बोतल पांच दिन में ही बिकता था।

रोजेदारों को पानी मुश्किल से मिला
बिजली गुल होने से रोजेदारों को दो बूंद ठंडा पानी मुश्किल से नसीब हुआ। मगरिग, इशा और तरावीह की नमाज भी अंधेरे में पढ़ी गई। शाम 6.53 मिनट पर इफ्तारी का वक्त था। रोजेदारों को लगा कि इफ्तार के वक्त तक बिजली आ जाएगी। बक्शीपुर, नखास, रेती, ऊचवां, जाफरा बाजार, रसूलपुर एवं गोरखनाथ जैसे मुसलिम बहुल क्षेत्राें में बिजली न आने से रोजेदारों में गुस्सा दिखा। जिन मसजिदों में इनवर्टर व जनरेटर की व्यवस्था नहीं था वहां मोमबत्ती जलाकर नमाज अदा की गई।

जिला अस्पताल के डाक्टर अंधेरे में
जिला अस्पताल की ओपीडी के बगल में डाक्टरों के आवास में अंधेरा छाया रहा। यहां कई डाक्टर रहते हैं। चूंकि आवासों को भी 24 घंटे बिजली सप्लाई मिलती है इसलिए डाक्टरों ने इन्वर्टर भी नहीं लगवाया है। मंगलवार को जब बिजली गई तो डाक्टरों के आवासों में भी अंधेरा छा गया। गर्मी से डाक्टर काफी परेशान रहे।

मेडिकल कालेज में अंधेरा
बीआरडी मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल, जिला महिला चिकित्सालय और दीवानी कचहरी को 24 घंटे बिजली देने की व्यवस्था है। लेकिन ग्रिड फेल होने की वजह से बिजली कट गई। जिला अस्पताल और जिला महिला चिकित्सालय में जनरेटर से काम चलाया गया पर बीआरडी मेडिकल कालेज के वार्डों में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार लोगों को घंटों अंधेरे में गुजारना पड़ा। मंगलवार को मेडिकल कालेज में आईसीयू, इमरजेंसी, बाल रोग विभाग को छोड़कर हर ओर अंधेरा छाया रहा। स्त्री रोग विभाग में मां और बच्चों का बुरा हाल रहा। परिवार वाले मोमबत्ती और मोबाइल से रोशन करते रहे। अंधेरा और बंद पंखे मरीजों की परेशानी और बढ़ा रहे थे।

रुपया जनता का, कष्ट भी जनता को
गोरखपुर। भाई साहब! अब हद हो चुकी है। सरकार को सिर्फ टैक्स बढ़ाने और जरूरी सामानों की कीमत बढ़ाने की चिंता है। कीमतें धड़ाधड़ बढ़ती जा रही हैं लेकिन सुविधा के नाम पर ठेंगा दिखा दिया जा रहा है। बिजली की कीमत भी लगातार बढ़ाई जा रही है लेकिन बिजली कब आएगी कब जाएगी कोई ठिकाना नहीं है।
यह कहना है तुर्कमानपुर के सूरज का। घर में बिजली नहीं थी तो मोटर साइकिल से शहर घूमने निकले सूरज ने बताया कि घर में गर्मी के कारण बच्चा रोने लगा तो हम लोग शहर में निकल पड़े। बिजली ने परेशान कर दिया है।
जिला अस्पताल के नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डा. प्रभुनारायण के सरकारी आवास में बिजली नहीं थी। जिला अस्पताल परिसर में बने आवास में रहने वाले डा. प्रभु नारायण कहते हैं कि जिला अस्पताल को 24 घंटे सप्लाई मिलती है लेकिन ग्रिड फेल होने की वजह से यह दिक्कत आ गई है।
रेती चौराहा पर रबड़ी-मलाई बेचकर जीवन यापन करने वाले नरसिंहपुर के रामनाथ यादव कहते हैं कि सोडियम लाइट की रोशनी में अब तक कारोबार करते रहे हैं। कभी-कभार मोमबत्ती की जरूरत पड़ती थी लेकिन इस बार तो हद हो गई। लालटेन और मिट्टी का तेल खरीदना पड़ा है।
रेती चौक पर गर्मी से बेहाल व्यापारी अशोक कुमार रात में सड़क के किनारे बैठे थे। लगातार रो रहे पोते को पंखा झलकर चुप करा रहे अशोक कहते हैं कि सब कुछ जनता को ही सहना पड़ता है। रुपया भी जनता देती है और कष्ट भी जनता ही सहती है।
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