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भत्ता के लिए भूला बेटा, पति को बनाया मजदूर

Gorakhpur

Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। बेरोजगारी भत्ता मिलने का ख्वाब पाले सुबह से शाम तक लाइन में खड़े होने के बाद क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण कराया। संयोगवश उनकी उम्मीद के अनुरूप ही प्रदेश में सपा की सरकार भी बनी। अब जबकि शासन की नई गाइड लाइन से बेरोजगारी भत्ता की राह कठिन होती नजर आई तो बहुत से ऐसे बेरोजगारों की बेचैनी बढ़ गई है, जिनको शासन बेरोजगारी भत्ते के लिए वास्तविक गरीब नहीं मान रहा। ऐसे में अब इन बेरोजगारों को हाथ से बेरोजगारी भत्ता का निकलना हजम नहीं हो पा रहा।
ये बेरोजगार अब गरीब बनने को तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कम आय का प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कुछ बेरोजगार अपनी शादी की तिथि, पति और बेटा भूल नाम के पहले कुमारी लगाने क ो तैयार हैं तो कुछ अपने पति को मजदूर बनाने में भी गुरेज नहीं खा रहीं। कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित खूनीपुर की एक महिला के प्रमाणपत्र में उसके पति की आय जोड़ ली गई तो उसने तहसीलदार से सिफारिश कर डाली कि उसके नाम के पूर्व कुमारी लगा दिया जाए और सिर्फ उसकी आय जोड़ी जाए। जबकि इस महिला की शादी हुए 12 साल हो गए हैं और उसका आठ साल का एक बेटा भी है। इसी तरह आय प्रमाणपत्र में 60 हजार की जगह 36 हजार आय करने के लिए शुक्रवार को मानबेला की एक महिला ने अपने पति को मजदूर बता दिया जबकि उसके कान और गले में सोने के मंहगे आभूषण लटक रहे थे।
शासन द्वारा जारी गाइड लाइन के मुताबिक बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदन करते समय बेरोजगार के परिवार की वार्षिक आय 36 हजार या फिर उससे कम होने का आय प्रमाणपत्र भी जमा करना जरूरी है। आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करते समय ये बेरोजगार अपने परिवार की वार्षिक आय इतनी ही भर रहे हैं लेकिन जब हल्का लेखपाल जांच कर रिपोर्ट लगा रहा है तो उसमें आय बढ़ जा रही है। ऐसे में तहसील प्रशासन के पास रोजाना इस बात की शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं कि प्रमाण पत्र में आवेदनकर्ता के परिवार की आय बढ़ा कर दर्ज कर दी गई। उधर रिपोर्ट लगाने वाले लेखपालों का कहना है कि प्रमाणपत्र में दर्ज आय ही आवेदक के परिवार की वास्तविक आय है। इस पर खेल बिगड़ता देख ही आवेदक इस तरह के बहाने बना रहे हैं।

रोजाना आ रही ऐसी सिफारिशें : तहसीलदार
गोरखपुर। तहसीलदार सदर इंदू प्रकाश सिंह का कहना है कि हल्का लेखपाल मौके पर जाकर संबंधित के आय का आकलन कर रहे दूसरे ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी होने के कारण उसमें गड़बड़ी कर कोई भी लेखपाल अपनी गर्दन फंसाने का साहस नहीं कर सकता। यही कारण है कि लोग आय कम कराने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे। बताया कि पखवारे भर से रोजाना तीन-चार ऐसी सिफारिशें आ रही हैं।
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