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पुल निर्माण प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं

Gonda

Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
गोंडा। जिले में आज भी लोग लकड़ी के जर्जर पुलों से आवागमन को मजबूर हैं। कुछ जगहों पर पुल न होने के चलते नाव ही एक मात्र सहारा है। लकड़ी के जर्जर पुलों की जगह सीमेंटेड पुलों के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन उस पर आज तक कुछ नहीं हुआ। हालत यह है कि जिले से सेतु निगम व पीडब्ल्यूडी ने करीब एक दर्जन से ज्यादा प्रस्ताव शासन को एक साल पहले भेज थे, लेकिन अभी तक किसी भी प्रस्ताव को शासन से हरी झंडी नहीं मिली है। इस कारण लोगों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
जिले में सेतु निगम के 3 पुल, परसपुर में सरयू नदी पर पसका घाट पुल, नवाबगंज में पटपरगंज पुल और करनैलगंज में शाहपुर रोड पर बिचलकाघाट पर पुल निर्माण का प्रस्ताव साल भर पहले शासन को भेजा गया था, लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी पुल को वित्तीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। वहीं, तहसील तरबगंज में ढेमवाघाट पुल बनाए जाने के लिए पिछले कई वर्षों से इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। साथ ही इसी इलाके में टेढ़ी नदी पर घोघराघाट, रानीपुर, बलुआघाट, दुर्जनपुर टिकरी व चमदहीघाट पुल की मांग भी वर्षों से की जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इस कारण लोगों को मजबूरन नाव या फिर लकड़ी के जर्जर पुलों का सहारा लेना पड़ रहा है। गौरा विधानसभा क्षेत्र में लकड़ी के करीब 8 पुल ऐसे हैं, जिन पर से रोजाना करीब ढाई लाख आबादी का आवागमन होता है, जबकि तरबगंज में भी इनकी संख्या 6 के करीब है। वहीं, कटराबाजार जाने वाली रोड पर बना चंदवतपुर घाट पुल, गोंडा-बलरामपुर मार्ग पर इटियाथोक में बना पुल, बालपुर-परसपुर रोड पर बना पुल व गोंडा-बेलसर रोड पर बना गोड़वाघाट का सीमेंटेड पुल भी काफी पुराना हो चुका है। इस पर किस समय आवागमन प्रतिबंधित हो जाए, नहीं कहा जा सकता। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बताते हैं कि सेतु निगम की तरफ से शासन को पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई के निर्देश इन पुलों के संबंध में नहीं मिले हैं। वहीं, लोकनिर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता हरीश सिंह रावत, निर्माण खंड एक के उमाशंकर वर्मा व निर्माण खंड दो के जोगराज सिंह का कहना है कि उन्होंने लकड़ी के जर्जर पुलों की जगह नए सीमेंटेड पुल व क्षतिग्रस्त हो चुके पुलों की मरम्मत का इस्टीमेट शासन को काफी पहले से ही भेजा था। हरी झंडी मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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