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शिक्षक न होने से 100 स्कूलों में ताला

Gonda

Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
केस न 1
हकीकत : शहरी क्षेत्र
अकेले एक साथ कैसे पढ़ाएं
नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय राधाकुंड में एक से पांच तक कुल 132 बच्चे पंजीकृत हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षिका सरोजनंदनी त्रिपाठी ही तैनात हैं। वैसे यहां पर एक शिक्षामित्र भी है। इसके बाद भी पठन-पाठन में समस्याएं आ रही हैं। यही हाल प्राथमिक विद्यालय सिविल लाइंस का है। यहां पर 140 पंजीकृत बच्चों को सिर्फ शिक्षिका मधुलता श्रीवास्तव ही संभाल रही हैं। प्राथमिक विद्यालय पटेलनगर में पंजीकृत 104 बच्चों के लिए सिर्फ दो शिक्षिकाएं ही तैनात हैं। नगर शिक्षा अधिकारी प्रीती शुक्ला का कहना है कि गोंडा शहर में कुल 32 परिषदीय विद्यालय हैं, जिसके सापेक्ष सिर्फ 38 शिक्षक ही तैनात है। शिक्षकों की काफी कमी है। किसी तरह से शिक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
केस 2
हकीकत-ग्रामीण क्षेत्र
चौखड़िया के स्कूल में लटका ताला
* प्राथमिक विद्यालय तेंदुवा चौखड़िया में कुल 236 छात्र पंजीकृ त हैं। यहां पर इनको पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षामित्र वीरेंद्र कुमार व अन्नपूर्णा शुक्ला के पास है। यहां पर करीब छह माह से कोई शिक्षक नहीं है, जिससे यह विद्यालय शिक्षामित्रों के सहारे चल रहा है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय तेंदुआ चौखड़िया में ताला लगा है। यहां पर कितने बच्चे पंजीकृत है, उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी किसकी है। यह बताने वाला कोई नहीं है। प्राथमिक विद्यालय कर्मडीह खुर्द के सहायक अध्यापक पवन शुक्ला के पास न्याय पंचायत समन्वयक का भी प्रभार है, जिससे यहां पर पंजीकृत 135 बच्चों की शिक्षा शिक्षामित्र संतोषकुमार व सुशीला देवी के कंधे पर है। प्राथमिक विद्यालय पिपरा भोधर में भी पंजीकृत 108 बच्चों को शिक्षामित्र रेखा शुक्ला व रमाशंकर पढ़ा रही हैं। प्राथमिक विद्यालय परसिया बहोरी में पंजीकृत 85 को
शिक्षामित्र रानी कादरी व फूलचंद्र पढ़ा रहे हैं।

400 स्कूल शिक्षामित्रों के हवाले
गोंडा। जनपद में शिक्षकों की कमी से प्राथमिक स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। पूर्व माध्यमिक स्तर के करीब 100 विद्यालय जिले में शिक्षक न होने से बंद चल रहे हैं, जबकि शिक्षकविहीन होने के कारण करीब 400 प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था शिक्षामित्रों के हवाले है। लड़खड़ा रही परिषदीय शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए अधिकारी कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी उनके सामने चुनौती बनी हुई है। अभी हाल ही में हुए 496 अंतरजनपदीय शिक्षकों के तबादलों ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब अधिकारी समायोजन के सहारे व्यवस्था सुधारने का दावा कर रहे हैं। जिले के 2249 प्राथमिक विद्यालयों में 1883 प्रधानाध्यापकों व 7493 सहायक अध्यापकों के पद सृजित हैं। जिसके सापेक्ष जिले में 655 प्रधानाध्यापक व 1849 सहायक अध्यापकों की ही तैनाती है। ऐसे में 1228 प्रधानाध्यापकों व 5644 सहायक अध्यापकों के पद रिक्त चल रहे हैं। यह स्थिति तब है जब 3300 शिक्षामित्र भी विभिन्न स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। जिले के 895 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। यहां पर प्रधानाध्यापक के 884 पद, सहायक अध्यापकों में विज्ञान/ गणित के 895, सामाजिक अध्ययन के 668, भाषा के 681 शिक्षकों के पद सृजित हैं। जिसके सापेक्ष कुल 532 प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापकों में विज्ञान/ गणित के 246, सामाजिक अध्ययन के 266, भाषा के 286 शिक्षक काम कर रहे हैं। इसके साथ ही जिले में उच्च प्राथमिक स्तर पर 352 प्रधानाध्यापक, 649 सहायक अध्यापक विज्ञान/ गणित, 402 सहायक अध्यापक सामाजिक अध्ययन, 395 सहायक अध्यापक भाषा के पद रिक्त चल रहे हैं। नये सत्र से विद्यालयों में बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए विभाग को अभी 8670 शिक्षकों की और दरकार है। इसी बीच जिले से 496 शिक्षकों का गैर जिलों में तबादला कर दिया गया। जिसने मुश्किल और बढ़ा दी हैं। उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष द्वारिका प्रसाद मिश्रा का कहना है कि करीब 400 प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था या तो एक शिक्षक या सिर्फ शिक्षामित्र संभाल रहे है। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री अशोक कुमार पांडेय का कहना है कि करीब 100 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में ताला बंद है। विभाग को इस ओर प्रयास करना चाहिए।
बोले बीएसए
समायोजन से सुधारी जाएगी व्यवस्था
यह बात सही है कि जिले के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की काफी कमी है, जिसके कारण समस्या आ रही है। इसे देखते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गयी है। जिसके आधार पर शिक्षक विहीन विद्यालयों की सूची तैयार करायी जा रही है। जिस पर शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा, ताकि कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन न हो।
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