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दुधारू पशुओं को जरूरी है पौष्टिक आहार

Ghazipur

Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कालेज के तत्वावधान में मंगलवार को पशुओं के लिए पौष्टिक एवं संतुलित आहार विषयक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें पशुपालन विभाग के प्रचार-प्रसार के लिए पशुपालकों को पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर पशु चिकित्सक डा. अखिलेश कुमार ने पशु पालकों को जानकारी देते हुए बताया कि पशुधन के उत्पादों में सबसे अधिक महत्वपर्ण और वांछित उत्पाद दूध है। दूध में वे सभी पोषक तत्व विद्यमान हैं, जिनकी स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यकता होती है। शरीर में पोषक तत्वों की उपलब्धता के आधार पर दूध की उत्पादकता निर्भर होती है। उन्होंने बताया कि देश में पशुओं द्वारा उत्पादन का प्रमुख कारण कुपोषण है। उन्होंने बताया कि कुपोषण की समस्या में सुधार के लिए न केवल चारा एवं दाना की बेहतर व्यवस्था द्वारा किया जा सकता है, बल्कि कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिए सबसे पहले पशुओं की पोषण आवश्यकताओं को भी जानना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने बताया कि पशुओं को छह प्रकार की पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जैसे पानी, कार्बोहाईड्रेड, प्रोटीन, लिपिड्स, विटामिन्स, खनिज लवण। पशुओं के शरीर के कुल वजन में लगभग 55-75 प्रतिशत प्रोटीन, 3-23 प्रतिशत तक वसा तथा 2-5 प्रतिशत तक खनिज लवण पाया जाता है। इस लिए पानी एक बहुत महत्वपूर्ण एवं आवश्यक तत्व है। कार्बोहाइड्रेड एवं वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। ऊर्जा एवं प्रोटीन की कमी होने पर पशु उत्पादन एवं स्वस्थ्य तुरंत प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि विटामिन दो प्रकार की होती है। वसा में घुलनशील तथा जल में घुलनशील। बताया कि हरे चारे में विटामिन ए,ई अधिक मात्रा में पाया जाता है। उन्होंने बताया कि संतुलित एवं पौष्टिक आहार बनाने के लिए पशु आहार के दाने में (मक्का, गेहूं, जौ, ज्वार आदि) खल्ली में सरसों की खल्ली, कपास की खल्ली, मूंगफली की खल्ली) और चूनी, चूरी, कनकी,, राईस पालिश, चोकर आदि को समुचित मात्रा में मिलाना आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि जो पशुपालक पुरानी पद्धति से दाना, चारा पशुओं को खिलाते हैं उनके पशुओं में सभी आवश्यक तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती है। इससे धीरे धीरे पशु के शरीर में उन तत्वों की कमी हो जाती है तथा उत्पादन गिरने लगता है।
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