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50 करोड़ का चावल जिले में डंप

Ghazipur

Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। सूबे की राइस मिलों में छह अरब रुपये से ज्यादा मूल्य के चावल डंप पड़े हैं। शासन-प्रशासन से बार-बार अनुरोध और पत्राचार करने के बावजूद अभी तक इसका उठान नहीं कराया जा रहा है। इससे राइस मिलों में रखे चावल सड़ रहे हैं जबकि गरीब और मेहनतकश मजदूर दाने-दाने को मोहताज हैं, लेकिन सरकार को इसकी परवाह नहीं है।
पूर्वांचल राइस मिलर कल्याण समिति के मुताबिक प्रदेश सरकार हर वर्ष किसानों से धान का क्रय करती है। बाद में खरीदे गए धान को जिलों की राइस मिलों को कुटाई के लिए दिया जाता है। इसके एवज में राइस मिलरों को दस रुपये प्रति कुंतल दिया जाता है। मौजूदा समय में जिले में 250 राइस मिल हैं। वर्ष 2011-12 में जिले में 6 लाख कुंतल धान खरीदा गया था जिसे कुटाई के लिए मिलरों को दिया गया। कुटाई के बाद चार लाख कुंतल चावल तैयार हुआ। इसके बाद राइस मिलर मालिकों ने खाद्य विभाग से लगायत शासन प्रशासन के अधिकारियों से चावल का भंडारण एफसीआई के गोदाम में कराने की गुहार लगाई। इसके बाद मिलों से काफी मात्रा में चावल उठवाकर कर उसका भंडारण कराया गया जिसके चलते जिले की 250 राइसमिलों में 1 लाख 85 हजार कुंतल चावल अभी भी डंप है जिसकी कीमत 50 करोड़ रुपये बताई गई है। कमोेबेश यह हाल सूबे के अन्य जिलों में भी है जिसके चलते पूरे सूबे में 6 अरब रुपये मूल्य का चावल डंप होकर बर्बाद हो रहा है। खास बात यह है कि सरकार की ओर से इस सीजन में धान क्रय का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। ऐसे में राइसमिलों में डंप पड़े चावल के भंडारण की व्यवस्था नहीं कराए जाने से राइस मिलरों की हैरानी बढ़ गई है। इसके खिलाफ जब पूर्वांचल राइस मिलर कल्याण समिति ने आवाज उठानी शुरू की तो उनकी बातों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जा सका। पूर्वांचल राइस मिलर कल्याण समिति के अध्यक्ष आलोक राय डब्बू ने बताया कि एफसीआई राइसमिलों में डंप पड़े चावल को पुराना बताते हुए उसे लेने से इंकार कर दिया है और इस चावल के बदले नया चावल मांग रही है। ऐसे में राइसमिलर नया चावल देने में असमर्थ हैं। राइस मिलर भी आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं। इस बाबत पूछे जाने पर खाद्य विपणन अधिकारी अश्विनी मिश्र ने बताया कि मिलरों की परेशानी को देखते हुए सीएमआर चावल उतरवाने की व्यवस्था देवकठिया में की गई है लेकिन पुराने और नए चावल के रगड़े में मामला पेचीदा हो गया है। इस मामले में उच्चस्तरीय हस्तक्षेप ही सार्थक हो सकता है।
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