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हमीद के नाम पर बनेगा भव्य अस्पताल

Ghazipur

Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
दुल्लहपुर। आजादी की लड़ाई में जब भी शहीदों का जिक्र होगा उसमें गाजीपुर के वीर सपूतों का नाम हमेशा श्रद्धा से लिया जाएगा। इस लड़ाई में गाजीपुर के कई वीरों ने लहू बहाए हैं। वीरता के सर्वोच्च पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित वीर अब्दुल हमीद की शहादत बेकार नहीं जाएगी। यहां हमीद के नाम पर चार बीघा भूमि पर एक भव्य और आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल खोला जाएगा। वीर अब्दुल हमीद के 47वें शहादत दिवस पर आयोजित समारोह में यह घोषणा मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि बन कर आए पंचायती राजमंत्री बलराम यादव ने कही।
धामूपुर में आयोजित समारोह में श्री यादव ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि सरकार के पास शहीदों के लिए धन की कमी नहीं है। उन्होंने हमीद की विधवा रसूलन बीबी की ओर से दिए गए मांगपत्र की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें शामिल सभी मांगों को पूरा किया जाएगा। अस्पताल के शुभारंभ के लिए अगले साल मुख्यमंत्री को यहां लाने का वादा करते हुए श्री यादव ने कहा कि वीर सपूतों के सम्मान की रक्षा के लिए वह हमेशा तैयार रहेंगे। विशिष्ट अतिथि श्रम एवं नियोजन राज्यमंत्री शाहिद मंजूर ने कहा कि शहीदों की धरती पर आकर वह अपने को धन्य महसूस कर रहे हैं। सपा सरकार के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसमें अड़ंगा डाल रही विरोधी पार्टियों को भी आड़े हाथों लिया। भारतीय आतंक विरोधी मोर्चो के चेयरमैन एमएस बिट्टा ने समारोह में मौजूद भीड़ को देखकर गदगद होते हुए कहा कि ये इस बात का प्रमाण है कि शहीदों के प्रति लोगों में कितना सम्मान है। कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वीर शहीद को याद किया यह बहुत बड़ी बात है। मैं चाहता हूं कि वीर अब्दुल हमीद के लिए उनके गांव में लगने वाला मेला अब पूरे देश स्तर पर लगाया जाय। उन्होंने एलान किया कि अगले साल वह यह मेला दिल्ली में लगाएंगे तथा वहां देशभर के लोगों को बटोरेंगे। इस मौके पर सांसद राधे मोहन सिंह, विधायक सुब्बा राम, पूर्व सांसद अफजाल अंसारी, सुभाष चंद्र प्रसाद, छोटू यादव, परवेज अंसारी, डा. रामबृक्ष यादव, सुदर्शन यादव, रामधारी यादव, जयकिशुन साहू, डा. रामअवध यादव, अनिल गुप्ता, नरेन्द्र मौर्या समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

बरसात में भी डटे रहे लोग
दुल्लहपुर। धामूपुर में शहीदों के प्रति सम्मान की झलक उस समय देखने को मिली जब भारी भीड़ रिमझिम बरसात में भी डटी रही। कार्यक्रम में करीब दस मिनट तक जमकर बरसात हुई जिससे सभी लोग भीग गए। हमीद पार्क में लोगों के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया गया। इसके बाद छात्राओं ने स्वागत गीत गा कर अतिथियों का सम्मान किया। पंचायती राजमंत्री बलराम यादव तथा श्रम एवं नियोजन राज्यमंत्री शाहिद मंजूर को गारद सलामी दी गई। मंच पर अतिथियों का माल्यापर्ण कर स्वागत करने का क्रम देर तक बना रहा। इस मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी चाक चौबंद की गई थी। रास्तो समेत कार्यक्रम स्थल पर हर जगह सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। जिलाधिकारी प्रभुएन सिंह तथा एसपी सिटी मान सिंह चौहान भी व्यवस्था को संभालने के लिए चक्रमण करते रहे।




किसी हालत में देश बंटने नहीं दूगां
कहा काले अंग्रेजों के आज भी गुलाम हैं हम सब
राजनीतिक सूरमा ही दे रहे आतंकवाद को खाद-पानी
कहा अनर्गल बयानबाजी से बाज आएं मनसे प्रमुख
संवाददाता
दुल्लहपुर। परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की शहादत दिवस पर आयोजित समारोह में आए भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के चेयरमैन एमएस बिट्टा ने साफ कहा कि अंग्रेजों की गुलामी से तो आजादी मिल गई है लेकिन काले अंग्रेेजों के हम आज भी गुलाम हैं। वोट बैंक के चक्कर में राजनीतिक दल आतंकवाद की जड़ में मट्ठा डालने के बजाए उसे खाद-पानी दे रहेे हैं और जनता को दिग्भ्रिमित करने के लिए एक-दूसरे पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। जरूरी है कि आतंकवाद के खात्मे के लिए बिना किसी भेदभाव के हम सभी आगे आएं।
राजनीति में आए विकारों पर जमकर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में राजनीतिज्ञ देश को बांटने का काम कर रहे हैं लेकिन वह किसी भी हालत में देश को बंटने नहीं देंगे। एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि मनसे के राज ठाकरे अनर्गल बयानबाजी से बाज आएं, देश सबका है। राजनीति के लिए देश को बांटने या तोड़ने जैसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। कहा कि यह केन्द्र सरकार का भी निठल्लापन है कि वह इस प्रकार के बयानों को बर्दाश्त कर रही है। इस पर रोक लगाने के लिए केन्द्र सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए।

शहीद के परिजनों का हुआ सम्मान
दुल्लहपुर। वीर अब्दुल हमीद की शहादत दिवस पर धामूपुर में आयोजित समारोह में जिले भर के शहीद की विधवाओं, उनके परिजनों तथा कार्यक्रम में आए अतिथियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर उन्हें स्मृति चिन्ह तथा अंगवस्त्रम भेंट किया गया। इस मौके पर क्षेत्र के अनिल कुमार पांडेय, विंदू देवी, राधेश्याम सिंह, राधिका देवी, रामबली, लूखुर, रामअधार यादव, ललिता यादव, जय प्रकाश यादव आदि उपस्थित थे।
उदास आंखों से रसूलन बीबी ने दर्द किया बयां
शहादत दिवस पर आए और भाषण देकर चल दिए
दुल्लहपुर। पति की शहादत दिवस पर सीएम अखिलेश यादव के नहीं आने का दुख शहीद की पत्नी रसूलन बीबी के चेहरे पर साफ दिख रहा था। अपने इस मलाल को उन्होंने बयां भी किया। वहीं शहादत दिवस के मौके पर आए सरकार के दूतों सहित अन्य लोगों ने वही किया जो हर बार करते आए हैं। शहीद की पत्नी और उनके परिजनों के लिए कोई कुछ भी नहीं कहा।
इस कार्यक्रम में सीएम को आने के लिए वह खुद निमंत्रण देने लखनऊ गई थीं। उनकी ओर से आने की सहमति मिलने के बाद उनका उत्साह बहुत बढ़ गया था। करीब 90 साल की बुजुर्ग महिला ने इस कार्यक्रम की व्यापक तैयारियां की। जिलेभर के शहीदों के घर गईं और उन्हें आने का निमंत्रण दिया। जिले तथा प्रदेश स्तर के नेताओं तथा जन प्रतिनिधियों को बुलाया। सभी को बुलावा पत्र देते समय वह इस बात को बड़े गर्व से सीएम के आने की बात बताया था। कई शहीदों की पत्नियों को उन्होंने यह कह कर भी आश्वासन दिया था कि सीएम से वह सीधी बात कर उनकी समस्याओं का समाधान कराएंगी। लेकिन ऐन मौके पर सीएम के नहीं आने पर उनका उत्साह फीका पड़ गया। उन्हें लग रहा था कि सीएम की ओर से उनके पति की वीरता को तवज्जो नहीं दिया गया। उन्होंने पूरे जिले के विकास के लिए 13 सूत्रीय मंाग पत्र तैयार किया था और उसे अपने हाथों से उन्हें सौंपना चाहती थीं। अपनी दादी की इस उदासी को भांपते हुए पौत्र जमील अंसारी ने मंच से कहा कि सीएम के पास शहीदों के लिए समय नहीं है। उनका कहना था कि जब सीएम से मुलाकात की गई थी, तभी उन्होंने शहादत दिवस पर आने की हामी भरी थी। उनके आश्वासन पर ही कार्यक्रम का प्रचार प्रसार किया गया। कई दिनों से पार्क की रंगाई-पुताई कराई गई। जगह-जगह सीएम के आने के बैनर और बोर्ड भी लगवाए गए। आखिर ऐसी कौन सी व्यस्तता थी कि सीएम देश की आन-बान और शान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले शहीद की शहादत में भाग लेने नहीं आए।



...और फफक पड़ीं महावीर चक्र विजेता की पत्नी
कहा शहादत दिवस पर उन्हें नहीं दी गई तवज्जो
बीमारी अवस्था में बनारस से भाग लेने आईं थीं
जखनिया। क्षेत्र के धामूपुर में आयोजित कार्यक्रम में एक तरफ जहां जिले भर की शहीद की पत्नियों तथा उनके परिजनों को सम्मानित किया जा रहा था। वहीं देश के दूसरे सैन्य सम्मान से नवाजे गए महावीर चक्र विजेता रामउग्रह पांडेय की बीमार विधवा श्यामा देवी की याद किसी को नहीं आई। इस बात का मलाल मन में लिए श्यामा देवी की आंखों में उस समय आंसू आ गए जब उनसे इस बारे में बात की गई।
जिले के जखनिया के लोगों का सिर गर्व से उस समय उठ जाता है जब वीरता के लिए देश के लगातार दो सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र और महावीर चक्र पाने वाले यहां के दो वीर सपूतों का नाम लिया जाता है। धामूपुर के वीर अब्दुल हमीद के परमवीर चक्र पाने के बाद एमावंशी गांव के रामउग्रह पांडेय को मरणोपरांत वीरता के लिए महावीर चक्र सम्मान दिया गया था। सोमवार को धामूपुर में हमीद की शहादत दिवस पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसकी तैयारी पहले से ही की जा रही थी। सीएम को निमंत्रण दे कर वापस आने के बाद से हमीद की पत्नी रसूलन बीबी खुद ही कई शहीद परिवारों में गई तथा निमंत्रण दिया। इस समारोह में शहीद रामउग्रह की विधवा श्यामा देवी को निमंत्रित नहीं किया गया। समारोह में करीब डेढ़ दर्जन शहीद की पत्नियों तथा परिजनों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर श्यामा देवी नहीं दिखी। इस बात की चर्चा लोगों में जोर शोर से हो रही थी। इधर जब संवाददाता ने एमावंशी की श्यामादेवी से निमंत्रण के बावत पूछा तो वह फफक पड़ीं। उन्होंने कहा कि न तो रसूलन बीबी ही निमंत्रण लेकर आईं और न ही उनका कोई प्रतिनिधि ही। उन्होंने बताया कि उनके फेफड़े में संक्रमण हो गया है और वाराणसी में भरती हो कर इलाज भी करा रही हैं। इस समय वह आर्थिक तंगी को झेल रही हैं तथा हालत भी दयनीय है। उन्होंने बताया कि वह इलाज को बीच में ही छोड़ कर इसीलिए घर आ गईं कि शायद उन्हें इस समारोह में जरूर बुलाया जाएगा।
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