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मनरेगा अब बदले कलेवर में

Ghazipur

Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश में मनरेगा योजना अब नए कलेवर में दिखेगी। योजना के जरिए जहां गरीबों की किस्मत को संवारा जाएगा वहीं ऐसे कार्य कराए जाएंगे, जिससे लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिले। गरीबों को उनके ही गांव में बेहतर रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए दर्जनों कार्यक्रम घोषित किए गए हैं। शासन का पत्र आते ही जिलाधिकारी प्रभुएन सिंह ने सभी बीडीओ को निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
प्रदेश में मनरेगा योजना को लागू हुए आठ वर्ष हो गए है। आठ वर्ष में योजना के माध्यम से हजारों करोड़ों रुपये जल संरक्षण, सामाजिक वानिकी, संपर्क मार्गों आदिपर खर्च की जा चुकी है। बाद में अधिकारियों की लापरवाही से योजना गरीबों से दूर होती चली गई। इसका अधिकांश धन सफेदपोशों में बंट गया। मनरेगा के संविदा कर्मी नेताओं से मिलकर योजना का बंटाधार कर दिया। इसे देख भारत सरकार ने इस योजना को और व्यापक रूप में लागू करने का फैसला किया है। मनरेगा से अब हर क्षेत्र में कार्य कराने की तैयारी है। लेकिन इस बार इसे पुराने बजट से ही कराया जाएगा। अगले वर्ष बजट में वृद्धि की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी बीडीओ को योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर शौचालय, प्राथमिक विद्यालयों में शौचालयों की इकाई के साथ ही नहरों का निर्माण कराने का निर्देश जारी किया है। इसकी जानकारी देते हुए परियोजना निदेशक आरएन सिंह ने बताया कि मनरेगा की नई गाइड लाइन पूरे प्रदेश के साथ ही अन्य प्रदेशों में लागू कर दी गई है। बीपीएल, इंदिरा आवास के लाभार्थियों, भूमिहीन किसानों, अनुसूचित जाति एवं लघु एवं सीमांत किसानों को रोजगार के साधन उपलब्ध कराएं जाएंगे। उन्होंने बताया कि पुरानी कार्य योजना के स्थान पर नई कार्य योजना का चयन बीडीओ करेंगे। इसके लिए सभी बीडीओ को 22 सितंबर को पूरी तैयारी के साथ बैठक में उपस्थित होेने के निर्देश दिए गए हैं।

इस जिले में मनरेगा योजना तीसरे चरण में एक अप्रैल 2008 को लागू हुई थी।

मनरेगा में पहले
जल प्रबंधन
सामाजिक वानिकी
भूमि सुधार के कार्य
बीपीएल और अनुसूचित के लाभार्थियों का व्यक्तिगत कार्य
हर मौसम में नाली, खंड़जे का निर्माण
अन्य व्यक्तिगत कार्य
इनसेट
मनरेगा में अब
कंटूर खाइयां और कंटूर बांध
गोलश्म चेक, गबियन सरंचनाएं
भूमिगत नहरों का निर्माण
मिट्टी के बांध का निर्माण
स्टांप बांध और झरनों का विकास
आंगनबाड़ी केंद्रों पर शौचालय का निर्माण
प्राथमिक विद्यालयोें में शौचालय इकाई का निर्माण
बाढ़ नियंत्रण के लिए जल निकासी करना
गांव के बाहर पुलिया एवं सड़क का निर्माण करना
ग्रामीण पेयजल के लिए शोकपीट का निर्माण
इनसेट



गांवों में पोल्ट्री फार्म
मनरेगा का नया कलेवर गरीबों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है। योजना यदि गांवों में मूर्त रूप ले लेती है तो गरीबों को दिल्ली-मुंबई जाकर ठोकरें नहीं खानी पड़ेगी। योजना को लागू करने के लिए जिलाधिकारी से लगायत सभी अधिकारियों ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। रोजगार के साधन उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा से जाबकार्ड धारक, अनुसूचित जाति का लाभार्थी, इंदिरा आवास का लाभार्थी, भूमिहीन किसान के साथ-साथ बीपीएल लाभार्थियों को चयनित किया जाएगा। एक कुक्कुट आश्रय पर 40 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसमें 20 प्रतिशत लेबर एवं 80 प्रतिशत धनराशि मैटेरियल्स पर खर्च की जाएगी। बकरी आश्रय का निर्माण 35 हजार में होगा। इस धनराशि से पक्का फ्लोर, यूरिन टैंक और फ्रोडर थ्रो कैटेल का निर्माण होगा। इस पर 30 प्रतिशत लेबर और 70 प्रतिशत मैटेरियल्स पर खर्च होगी। इसके लिए सभी बीडीओ से लाभार्थियों का चयन करने को कहा गया है। इस योजना का संपूर्ण बजट मौजूदा बजट से खर्च किया जाएगा।
इनसेट
मछली पालन के लिए मिलेगा 11 लाख
पोल्ट्री फार्म, बकरी पालने के अलावा अब मछली पालन भी भारत सरकार गरीबों को कराने जा रही है। इसके लिए गांवों के सार्वजनिक तालाबों पर मछली पालन का कार्य किया जाएगा। इसके भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। देखा जाए तो प्रत्येक ग्राम पंचायतों में दो या तीन तालाब अवश्य हैं। सभी तालाबों में मछली पालन के लिए पट्टा किया जाता है। लेकिन अधिकांश गरीब तबके लोग पूंजी के अभाव में मछली पालन का कार्य नहीं कर पाते हैं। इसको गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय गरीबों की राह को आसान बनाते हुए मनरेगा योजना से मछली पालन के लिए धनराशि देने का फैसला किया है। मछली पालन के लिए एक तालाब पर 11 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। इस धनराशि का अधिकांश हिस्सा लेबर बजट पर खर्च किया जाएगा।


मनरेगा से खेतों में लहलहाएंगी फ सलें
मनरेगा योजना का बदला स्वरूप किसानों के चेहरे पर भी मुस्कान लाने का काम करेगी। किसानों के खेतों में फसलों को लहलहाने के लिए मनरेगा में कई योजनाएं आई हैं। नाडेप कंपोस्ट स्कीम में आठ हजार रुपये प्रति लाभार्थी दिए जाएंगे। इस योजना में लेबर 25 एवं मैटेरियल्स पर 75 प्रतिशत की धनराशि व्यय की जाएगी। इस योजना से खेतों को रसायनिक खादों के प्रयोग से बचाया जाएगा। वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए 9 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस 25 एवं 75 के अनुपात से धनराशि खर्च की जाएगी।

किसानों के खेतों की होगी सिंचाई
योजना में वह सब कुछ गरीबों को देखने को मिलेगा। जिसके लिए वह परेशान रहते थे। भारत सरकार ने मनरेगा योजना के व्यक्तिगत कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों के खेतों की सिंचाई कराने का फैसला किया है। यही नहीं उनके खेतों में बागवानी, वृक्षारोपण भी इस योजना से कराए जाएंगे। इसके साथ ही गांवों में पेयजल के संकट को दूर करने के लिए मनरेगा योजना से वाटर रिचार्जिगिं पर पांच हजा रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। इसके लिए बीपीएल, इंदिरा आवास लाभार्थियों के साथ ही भूमिहीन किसानों का चयन किया जाएगा।


कौन होंगे मनरेगा में व्यक्तिगत कार्यों के लाभार्थी
0 बीपीएल सूची में शामिल लाभार्थी
0 जाबकार्ड धारक
0 अनुसूचित जाति का व्यक्ति
0 भूमिहीन किसान
0 इंदिरा आवास के लाभार्थी
0 लघु एवं सीमांत किसान

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